फ़्रांस, जर्मनी, इटली और ऑस्ट्रिया ने पत्रकार को फांसी देने पर किया ईरान का बहिष्कार

रोहुल्लाह ज़ाम

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ईरान में सत्ता विरोधी रुझान के लिए मशहूर रहे पत्रकार रोहुल्लाह ज़ाम को फांसी देने के बाद यूरोप के चार देशों ने उसका बहिष्कार किया है.

दरअसल, बिज़नेस फ़ोरम की तेहरान में सोमवार को पहले से निर्धारित एक ऑनलाइन मीटिंग में शामिल होने से इन चार देशों ने इनकार कर दिया है.

और बहिष्कार करने वाले ये देश हैं फ़्रांस, जर्मनी, इटली और ऑस्ट्रिया. इन देशों के राजदूत को इस ऑनलाइन मीटिंग में हिस्सा लेना था.

हालांकि बिज़नेस फ़ोरम की मीटिंग के आयोजकों ने बाद में ये कहा कि वे इस इवेंट को फ़िलहाल के लिए स्थगित कर रहे हैं.

ईरानी पत्रकार रोहुल्लाह ज़ाम की फांसी के बाद ईरान और यूरोपीय देशों के बीच कूटनीतिक संकट लगातार बढ़ता हुआ दिख रहा है.

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बिज़नेस फ़ोरम की बैठक

और सोमवार को बिज़नेस फ़ोरम की बैठक का टल जाना इसी संकट का नतीजा माना जा रहा है.

रोहुल्लाह ज़ाम पर एक मैसेजिंग ऐप के ज़रिये असंतोष को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया था.

ईरान में साल 2017 में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे जिसकी रोहुल्लाह ज़ाम ने रिपोर्टिंग की थी और अपने ऑनलाइन न्यूज़ फ़ीड पर पब्लिश किया था.

रोहुल्लाह को इस वजह से ईरान छोड़ना पड़ा जिसके बाद फ़्रांस ने उन्हें पनाह दी थी.

बाद में वे इराक़ में पकड़ लिए गए, जहां से उन्हें ईरान लाया गया. शनिवार को रोहुल्लाह ज़ाम को फांसी पर लटका दिया गया.

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'बर्बर और अस्वीकार्य'

फ़्रांस ने इस कार्रवाई को 'बर्बर और अस्वीकार्य' क़रार देते हुए कहा था कि ये ईरान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के उलट किया गया काम है.

यूरोपीय संघ ने भी रोहुल्लाह ज़ाम की फांसी की कड़े शब्दों में निंदा की है.

इसके जवाब में ईरान ने फ़्रांस और जर्मनी के राजदूत को तलब किया और अपना विरोध दर्ज कराया.

जर्मनी के पास इस समय यूरोपीय संघ की कमान है.

रविवार को फ्रांस ने ट्विटर पर घोषणा की कि ईरान में उसके और तीन अन्य देशों के राजदूत यूरोप-ईरान बिज़नेस फ़ोरम की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे.

फ्रांस के इस ट्वीट में #nobusinessasusual का हैशटैग इस्तेमाल किया गया था.

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कौन हैं रोहुल्लाह ज़ाम

रोहुल्लाह ज़ाम एक सुधारवादी मौलवी मोहम्मद अली ज़ाम के बेटे थे. वे अमाद न्यूज़ के नाम से एक न्यूज़ वेबसाइट भी चलाया करते थे.

इस लोकप्रिय वेबसाइट को सरकार विरोधी माना जाता है. ईरान की हुकूमत ने साल 2017-18 के विरोध प्रदर्शनों को भड़काने का इलज़ाम इस वेबसाइट पर लगाया था.

मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर अमाद न्यूज़ के दस लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं जो विरोध प्रदर्शन के वीडियो शेयर कर रहे थे.

ईरान की सरकार के अधिकारियों को इससे तगड़ा झटका लगा था.

हालांकि मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम ने ख़तरनाक किस्म के कॉन्टेंट के नाम पर कंपनी के नियमों का हवाला देते हुए इस एकाउंट को बंद कर दिया लेकिन बाद ये एकाउंट दूसरे नाम से शुरू हो गया.

इस साल की शुरुआत में रोहुल्लाह ज़ाम को 'धरती पर भ्रष्टाचार' के आरोप में कसूरवार ठहराया गया. ये ईरान में एक बेहद घृणीत अपराध माना जाता है.

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रोहुल्लाह ज़ाम की फांसी पर कहा कि वे एक 'पक्षपातपूर्ण सुनवाई का शिकार हुए जो जबरन लिए गए इकबालिया बयान पर आधारित' था.

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