कोरोना वायरस ने बढ़ाई ग़रीब और अमीर देशों के बीच की खाई- बीबीसी सर्वे

कोरोना वायरस महामारी

इमेज स्रोत, Getty Images

प्रकाशित

कोरोना वायरस महामारी की मार पूरे विश्व की तुलना में ग़रीब देशों पर अधिक पड़ी है और इससे वैश्विक स्तर पर असमानता बढ़ी है. बीबीसी के एक सर्वेक्षण में ये बात सामने आई है.

11 मार्च को कोरोना वायरस को वैश्विक महामारी घोषित करने के छह महीने बाद अलग-अलग देश महामारी से कैसे प्रभावित हुए हैं, ये समझने के लिए बीबीसी ने क़रीब 30,000 लोगों के बीच सर्वे किया.

दुनिया के कई देशों में कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन लगाया गया. इसका इन देशों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा. ग़रीब देश और युवाओं का कहना है कि वो महामारी के कारण अपनी ज़िंदगी के सबसे बुरे दौर से गुज़र रहे हैं.

सर्वे में हिस्सा लेने वाले लोगों में से ग़रीब देशों में रहने वाले 69 फ़ीसदी लोगों ने बताया कि उनकी आय कम हुई है. वहीं अमीर देशों में रहने वाले 45 फ़ीसदी प्रतिभागियों की आय में कमी हुई है.

कोरोना महामारी के कारण असमानता का स्तर नस्ल और जेंडर के आधार पर भी दर्ज किया गया है. जहां पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं की स्थिति अधिक ख़राब हुई है वहीं अमरीका में गोरों की तुलना में काले लोगों में कोरोना संक्रमण के मामले अधिक हैं.

27 देशों में बीबीसी के लिए ये सर्वे ग्लोबस्कैन ने जून 2020 में किया, जिस दौरान कई इलाकों में कोरोना संक्रमण के मामले सबसे अधिक आ रहे थे. इस सर्वे के लिए 27,000 से अधिक लोगों से कोविड-19 और उनके जीवन पर इसके असर के बारे में सवाल किए गए थे.

ग्लोबस्कैन के चीफ़ एग्ज़ेक्यूटिव क्रिस कोल्टर ने बीबीसी को बताया, "इस महामारी को लेकर जितने तरह के नैरटिव आए हैं उनमें सबसे अहम यह है कि 'हम सभी इस मुश्किल दौर में हैं'."

वो कहते हैं, "लेकिन हमारे सर्वे में इसके विपरीत बात सामने आई. अलग-अलग देशों में और कई देशों के भीतर जो लोग पहले से ही वंचित थे उन पर महामारी का ज़्यादा बुरा असर पड़ा."

1px transparent line
कोरोना वायरस महामारी

इमेज स्रोत, EPA/STR

दुनिया में असमानता बढ़ी

सर्वे में ये जानकारी सामने आई है कि ग़रीब देशों के लोगों पर महामारी का गंभीर असर पड़ा है और इसने लोगों के बीच पहले से मौजूद असमानता की खाई को और बढ़ा दिया है.

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन यानी ओईसीडी और इसके ग़ैर-सदस्य देशों के बीच फ़र्क की बड़ी खाई पैदा हो गई है. ओईसीडी 37 देशों का अंतरराष्ट्रीय समूह है जिसमें दुनिया के सबसे अमीर देश शामिल हैं.

सर्वे में पता चला है कि ग़ैर-ओईसीडी सदस्य देशों में रहने वाले 69 फ़ीसदी प्रतिभागियों की आय में महामारी के कारण कमी आई है जबकि ओईसीडी सदस्य देशों में रहने वाले 45 फ़ीसदी लोगों ने आय कम होने की बात स्वीकार की है.

सर्वे में पता चला है यूरोप और उत्तर अमरीका में रहने वालों की तुलना में लैटिन अमरीका, एशिया और अफ्रीका में रहने वाले लोग कोरोना वायरस का असर अधिक पड़ने की बात कर सकते हैं.

A graphic showing how Covid-19 affected people in different countries

कीनिया में 91 फ़ीसदी लोग, थाईलैंड में 81 फ़ीसदी, नाइजीरिया में 80 फ़ीसदी, दक्षिण अफ्रीका में 77 फ़ीसदी और वियतनाम में 74 फ़ीसदी लोग आर्थिक तौर पर प्रभावित हुए हैं.

इन देशों में पहले से कम आय पर गुज़ारा कर रहे लोग महामारी के कारण आय में और कमी होने की बात कर सकते हैं.

हालांकि यह भी बात उभरी है कि ग़रीबों के मुक़ाबले ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, रूस और ब्रिटेन में रहने वाले अधिक आय वाले लोग आर्थिक तौर पर ज़्यादा प्रभावित हुए हैं.

कोरोना वायरस महामारी

इमेज स्रोत, Getty Images

युवाओं-बुज़ुर्गों पर कितना असर

सर्वे के अनुसार महामारी ने युवाओं और बूढ़ों के बीच के अंतर को बढ़ा दिया है.

युवा पीढ़ी का कहना है कि बुज़ुर्गों की तुलना में उन्हें ज़्यादा मुश्किल हुई है. ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि महामारी के दौरान काम करने, लोगों से मुलाक़ात करने और पढ़ाई के मौक़े कम हुए हैं

1990 के दशक के मध्य से लेकर 2010 के शुरूआती दौर के बीच जन्म लेने वाले (जेनरेशन ज़ेड) 55 फ़ीसदी प्रतिभागी और 1980 के शुरूआती दौर से लेकर 1990 के मध्य तक पैदा हुए ( जिन्हें मिलेनियल्स) प्रतिभागियों का मानना है कि महामारी ने उनके जीवन को असरदार तरीके से प्रभावित किया है.

A graphic showing how people in different age groups around the world were affected by Covid-19

वहीं सर्वे में शामिल 1965 से 1980 में जन्मे लोगों ( इस पीढ़ी को जेनरेशन एक्स भी कहते हैं) और 1946 से 1964 के बीच पैदा हुए प्रतिभागियों (इस पीढ़ी को बेबी बूमर्स भी कहा जाता है) ने कहा कि उन्हें भी लगता है कि उनके जीवन को महामारी ने बुरी तरह प्रभावित किया है.

सर्वे में हिस्सा लेने वाले जेनरेशन ज़ेड प्रतिभागियों ने कहा कि आर्थिक तौर पर उन पर सबसे बुरी मार पड़ी है. इनमें से 63 फ़ीसदी लोगों का कहना है कि उनकी आय में कमी आई है. इसकी तुलना में 42 फ़ीसदी बेबी बूमर्स ने अपनी आय कम होने की बात की है.

इस बात की भी संभावना अधिक है कि बुज़ुर्गों की सेहत और आर्थिक स्थिति पर महामारी का अधिक बुरा असर नहीं पड़ा. वैश्विक स्तर पर जहां 39 फ़ीसदी बुज़ुर्गों पर महामारी का असर पड़ा है वहीं सर्वे में शामिल क़रीब 56 फ़ीसदी बेबी बूमर्स ने कहा कि उनकी सेहत और आर्थिक स्थिति पर महामारी का असर नहीं पड़ा है.

कोरोना वायरस महामारी

इमेज स्रोत, EPA/Paolo Aguilar

1px transparent line

बीबीसी सर्वे में सामने आईं अन्य बातें -

  • तक़रीबन 57 फ़ीसदी यानी प्रत्येक दस में छह लोगों ने ये कहा कि उनकी माली हालत पर कोरोना का असर पड़ा है.
  • महिलाओं का कहना है कि पुरुषों की तुलना में उन पर महामारी का अधिक बुरा असर पड़ा है और उनकी आय अधिक कम हुई है. महिलाओं और पुरुषों की आय में सबसे अधिक असमानता जर्मनी (32 फ़ीसदी महिलाएं बनाम 24 फ़ीसदी पुरुष), इटली (50 फ़ीसदी महिलाएं बनाम 43 फ़ीसदी पुरुष) और यूनाइटेड किंगडम (45 फ़ीसदी महिलाएं बनाम 38 फ़ीसदी पुरुष) में देखी गई है.
  • अमरीका में 14 फ़ीसदी काले अमरीकियों का कहना है कि वो या उनके परिवार के कोई सदस्य कोविड-19 से संक्रमित हुए हैं. वहीं इसकी तुलना में सात फ़ीसदी गोरे अमरीकी कोरोना संक्रमित हुए हैं.
  • बच्चों के माता-पिता पर भी महामारी का अधिक प्रभाव पड़ा है. सर्वे में शामिल 57 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि वो महामारी से प्रभावित हुए हैं. वहीं बिना बच्चों वाले 41 फ़ीसदी लोग महामारी से प्रभावित हुए हैं.
1px transparent line

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)