कोरोना वायरस को झूठ मानने वाले शख़्स की पत्नी की कोविड-19 से मौत

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- Author, मारियाना स्प्रिंग
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
कोरोना वायरस के ख़तरे को झूठा दावा मानने वाले फ़्लोरिडा के एक टैक्सी ड्राइवर को उस समय झटका लगा जब उनकी पत्नी की कोविड-19 से जान चली गई.
ब्रायन ली हिचेन्स और उनकी पत्नी एरिन ने ऐसे ऑनलाइन दावों को पढ़ा था जिनमें कहा गया था कि इस वायरस का हौव्वा बनाया गया है, यह 5जी से लिंक्ड है या सामान्य ज़ुकाम जैसा है.
पति-पत्नी ने स्वास्थ्य को लेकर जारी दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया. मई की शुरुआत में जब वे बीमार पड़े तो उन्होंने किसी तरह की मदद भी नहीं ली.
ब्रायन तो बच गए लेकिन उनकी 46 साल की पत्नी गंभीर रूप से बीमार हो गईं और वायरस की वजह से पैदा हुई दिल संबंधी दिक़्क़तों के चलते उनकी इस महीने मौत हो गई.
ब्रायन ने कोरोना वायरस से जुड़ी ग़लत सूचनाओं से होने वाले नुक़सान के विषय में की गई एक पड़ताल के तहत बीबीसी से जुलाई में बात की थी. उस वक़्त उनकी पत्नी हॉस्पिटल में वेंटीलेटर पर थीं.
'काश सलाह मानी होती'

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एरिन फ़्लोरिडा में पादरी थीं और उन्हें पहले से स्वास्थ्य दिक़्क़तें थीं. वो अस्थमा और नींद आने की समस्या का शिकार थीं.
उनके पति ने बताया कि उन दोनों ने ऑनलाइन किए जा रहे झूठे दावों के चलते शुरुआत में स्वास्थ्य सलाहों पर ग़ौर नहीं किया.
ब्रायन बतौर टैक्सी ड्राइवर काम करते रहे और वो सामाजिक दूरी का पालन किए बग़ैर या मास्क पहने बग़ैर अपनी पत्नी की दवाइयां लाते रहे.
मई में जब वो बीमार पड़े तो उन्होंने किसी तरह की मदद भी नहीं मांगी और बाद में दोनों ही कोविड-19 से पीड़ित पाए गए.
ब्रायन ने बीबीसी न्यूज को बताया कि 'काश उन्होंने शुरुआत में ही सलाह मानी होती.' उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी पत्नी उन्हें माफ़ कर देंगी.
ब्रायन ने बताया, "यह एक असली वायरस है जो कि लोगों को अलग तरह से प्रभावित करता है. मैं गुज़रा वक़्त नहीं बदल सकता हूं. मैं केवल आज में जी सकता हूं और भविष्य के लिए अच्छे विकल्प चुन सकता हूं."
वो कहते हैं, "वो अब दर्द नहीं झेल रही हैं और शांति में हैं. मैं उन्हें याद करते हुए बीते वक़्त में चला जाता हूं, लेकिन मैं जानता हूं कि वो एक अच्छी जगह पर हैं."
'यह वायरस असली है'
ब्रायन कहते हैं कि उन्होंने और उनकी पत्नी को कोविड-19 को लेकर कोई पक्का भरोसा नहीं था. इसकी बजाय वो मानते थे कि यह फ़र्ज़ी चीज़ है. कभी उन्हें लगता था कि यह 5जी टेक्नोलॉजी से लिंक्ड है या असली है मगर एक हल्की बीमारी है. उन्होंने फ़ेसबुक पर ये सभी थ्योरीज़ पढ़ी थीं.
ब्रायन कहते हैं, "हमने सोचा कि सरकार हमारा ध्यान भटकाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है. या इसका संबंध 5जी से है."
ब्रायन ने फ़ेसबुक पर एक पोस्ट लिखी जो कि वायरल हो गई. उस पोस्ट में उन्होंने बताया कि वो वायरस को लेकर ऑनलाइन पढ़े कंटेंट से गुमराह हो गए थे.
उन्होंने लिखा था, "अगर आप बाहर निकल रहे हैं तो कृपया ज्ञान का इस्तेमाल कीजिए और मेरी तरह मूर्ख मत बनिए ताकि आपके साथ वैसा न हो, जैसा मेरे और मेरी पत्नी के साथ हुआ है."
मई में कोरोना वायरस से जुड़ी ग़लत जानकारियों की जांच कर रही बीबीसी की एक टीम ने पाया कि कोरोना को लेकर फैली ग़लत सूचनाओं के कारण हिंसा, आगज़नी की घटनाएं और लोग मौत तक हुई है.
डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि ऑनलाइन पड़ी हुई अफ़वाहों, गुमराह करने वाली थ्योरियों और ग़लत स्वास्थ्य सूचनाओं से अप्रत्यक्ष नुक़सान का बड़ा ख़तरा अभी भी मौजूद है. ख़ासतौर पर वैक्सीन विरोधी साज़िशें सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हैं.
हालांकि, सोशल मीडिया कंपनियों ने ग़लत जानकारियों को रोकने के लिए कोशिशें की हैं लेकिन आलोचकों का कहना है कि आने वाले महीनों में इस संबंध में और काम करना ज़रूरी है.
फ़ेसबुक के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया, "हम अपने प्लेटफ़ॉर्म पर ग़लत सूचनाओं को फैलाने की इजाज़त नहीं देते हैं. अप्रैल से जून के बीच हमने 70 लाख से ज़्यादा कोविड-19 से जुड़ी हुई नुक़सानदेह ग़लत सूचनाओं को हटाया है. इनमें कोविड-19 के ग़लत इलाज और सामाजिक दूरी के अप्रभावी होने जैसी ग़लत सूचनाएं शामिल हैं."
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