भारत के साथ सटी सीमा की तारबंदी क्यों नहीं कर रहा पाकिस्तान?

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    • Author, जुगल आर पुरोहित
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली
  • प्रकाशित

भारत और चीन के सैनिकों के बीच अनिर्धारित वास्तविक सीमारेखा (एलएसी) पर कई जगहों पर हुई झड़पों की ख़बरें भारतीय मीडिया में छाई हुई हैं. लेकिन एक सीमा ऐसी भी है जिस पर हो रही गतिविधियों को किसी ने नोटिस नहीं किया है.

8 मई को ईरान के साथ लगी पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की सीमा के नजदीक़ छह पाकिस्तानी सुरक्षाबल मारे गए थे. इनकी गाड़ी रिमोट कंट्रोल के ज़रिए किए गए आइईडी बलास्ट से उड़ा दी गई थी. मरने वाले पाकिस्तानी सैनिकों में एक मेजर रैंक के अधिकारी भी थे.

पाकिस्तानी सेना के पब्लिक रिलेशंस विभाग के डायरेक्टर (डीजी आईएसपीआर) के मुताबिक़, यह टीम पाकिस्तान-ईरान सीमा से 14 किमी के इलाक़े में नियमित गश्त पर थी. ये टीम बेहद मुश्किल और पहाड़ी वाले इस इलाक़े में चरमपंथियों के संभावित रास्तों को चेक कर रही थी.

चार दिन बाद 12 मई को पाकिस्तान के आर्मी चीफ़ जनरल क़मर जावेद बाजवा ने ईरानी सेना के चीफ़ मेजर जनरल बाघेरी को एक कॉल किया. इस कॉल में बाजवा ने "पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर हुए हालिया चरमपंथी हमले को लेकर चिंता जताई जिसमें पाक-ईरान सीमा के क़रीब 6 सुरक्षाबलों की मौत हो गई थी."

उन्होंने अपने ईरानी समकक्ष से यह भी कहा कि "पाकिस्तान ने सीमा पर तारबंदी का काम शुरू कर दिया है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों के सहयोग की ज़रूरत होगी."

इसके अगले दिन बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में जनरल बाजवा हालात का जायज़ा लेने पहुंच गए. आईएसपीआर के मुताबिक़, उन्हें "सुरक्षा हालात, ऑपरेशनल तैयारियों और पाक-अफ़ग़ान और पाक-ईरान सीमाओं पर तारबंदी करने समेत सीमा प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया गया."

लेकिन, पाकिस्तान के अपने पड़ोसियों के साथ रिश्तों को लेकर भारत क्यों फ़िक्र करे?

इसका जवाब जानने के लिए पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति समझना ज़रूरी है.

कितने देशों से घिर है पाकिस्तान?

पाकिस्तान की सीमाएं चार देशों के साथ लगी हैं. पाकिस्तान की सीमा का सबसे छोटा हिस्सी चीन के साथ सटा हुआ है और यह क़रीब सीमा 599 किलोमीटर लंबी है.

इसके बाद नंबर आता है ईरान का और पाकिस्तान के पश्चिम में ईरान के साथ उसकी 909 किलोमीटर लंबी सीमा है. यह पूरा बलूचिस्तान प्रांत का इलाक़ा है.

पाकिस्तान की 2611 किलोमीटर लंबी सीमा अफ़ग़ानिस्तान के साथ सटी हुई है. बलूचिस्तान और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांतों की सीमाएं अफ़ग़ान सीमा के साथ लगी हुई हैं.

पाकिस्तान अपनी सीमा का सबसे बड़ा हिस्सा भारत के साथ साझा करता है. भारत के साथ लगती अपनी सीमा को पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा, वर्किंग बाउंड्री और लाइन ऑफ़ कंट्रोल (एलओसी) के तौर पर बांटता है. ये सीमा भारत के साथ 3,163 किलोमीटर लंबी है.

ऐसे में पाकिस्तान सीमा के कुछ हिस्से पर तारबंदी क्यों कर रहा है? और वो अपने चार पड़ोसियों में से केवल दो के साथ सटी अपनी सीमाओं पर ही क्यों तारबंदी कर रहा है?

मई 13 की इस तस्वीर में क्वेटा में सेना की तैयारियों का जायज़ा लेते पाक सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा

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इमेज कैप्शन, मई 13 की इस तस्वीर में क्वेटा में सेना की तैयारियों का जायज़ा लेते पाक सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा

तारबंदी से किसे होगा फ़ायदा?

सलमान ज़ैदी इस्लामाबाद के जिन्ना इंस्टीट्यूट में प्रोग्राम डायरेक्टर के तौर पर काम करते हैं. ज़ैदी कहते हैं कि इसकी पाकिस्तान ने कभी योजना नहीं बनाई थी.

वो कहते हैं, "ईरान के साथ दोनों तरफ़ कम विकसित इलाक़े मौजूद हैं. इन जगहों पर सरकारी नियंत्रण ढीला है. इस वजह से ये इलाक़े प्रतिबंधित समूहों, तस्करों और अवैध गतिविधियों के अड्डे बन गए हैं."

"पाकिस्तान और ईरान के बीच तारबंदी को लेकर चर्चा कई सालों से चल रही है. इसकी वजह सीमा के दोनों तरफ़ सरकार विरोधी तत्वों के सरकार पर होने वाले हमले हैं. लेकिन, हाल में ही पाकिस्तान ने ज़्यादा सख्त क़दम उठाना शुरू किया और एकतरफ़ा तारबंदी करने का ऐलान कर दिया है."

"अभी 10 दिन पहले ही यहां सीनेट ने 950 किलोमीटर सीमा की तारबंदी के लिए 3 अरब रुपयों के एक प्रस्ताव का ऐलान किया था. तारबंदी को लेकर पहले ईरान और पाकिस्तान दोनों सहमत थे और इससे दोनों ही पक्षों को अवैध आवाजाही और गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी."

ज़ैदी बताते हैं, "जहां तक अफ़ग़ानिस्तान की बात है तो अमरीका, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच एक दशक से ज़्यादा वक्त तक चली चर्चा पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर कोई मज़बूत सुरक्षा तैयार करने में नाकाम ही रही. इस इलाक़े में चरमपंथी आसानी से आवाजाही करते हैं."

"अफ़ग़ान सरकार सीमा पर तारबंदी करने के लिए राज़ी नहीं थी क्योंकि वो ऐतिहासिक रूप से डूरंड रेखा को नहीं मानते. ऐसे में पाकिस्तान को एकतरफ़ा तारबंदी करने का फ़ैसला लेना पड़ा क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान की सरकार चरमपंथियों को सीमा पार करने और पाकिस्तान में हमले करने से रोकने में नाकाम रही है. यह तारबंदी इस साल पूरी हो जाएगी."

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चीन के साथ सटी सीमा पर तारबंदी क्यों नहीं करता पाकिस्तान?

सलमान ज़ैदी बताते हैं, "चीन के साथ पाकिस्तान की सीमा दुश्मनी भरी नहीं है. इसके बावजूद इस पर बड़ी तादाद में सुरक्षाबल तैनात हैं. यहां पर संयुक्त पेट्रोल होती है, लेकिन यहां तारबंदी करने का कोई सवाल नहीं है. पाक-चीन सीमा में घुसपैठ आसान भी नहीं है. साथ ही यहां दिहाड़ी मज़दूरों समेत कई दूसरी समस्याएं भी नहीं हैं."

पाकिस्तान भारत के साथ अपनी सीमा पर तारबंदी क्यों नहीं करता है?

आख़िरकार इसे लेकर पाकिस्तान ने भारत के साथ युद्ध लड़े हैं दोनों मुल्कों के बीच कई मसलों को लेकर विवाद हैं और साथ ही वो भारत पर आंतरिक अस्थिरता पैदा करने के लिए घुसपैठ कराने का आरोप भी लगाता है.

पाकिस्तान के आईएसपीआर ने इन सवालों के कोई जवाब नहीं दिए.

ज़ैदी इस मामले में पाकिस्तान का नज़रिया बताते हैं. वो कहते हैं, "तारबंदी करने के पीछे वजह सुरक्षा संबंधी दिक्क़तें होती हैं. भारत ने तारबंदी की है ताकि जिसे वह घुसपैठ कहता है उसे रोका जा सके."

"जब भारत ने तारबंदी का फ़ैसला किया तो पाकिस्तान ने इस पर कोई विरोध नहीं किया. लेकिन, इलाक़े और आबादी की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अब भारत पर है. वह सीमा पार से होने वाली घुसपैठ के सवाल नहीं उठा सकता क्योंकि तारबंदी ख़ुद भारत ने की है."

दूसरी ओर भारत में जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान के क़दम में एक संदेश छिपा है.

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पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह बताते हैं, "यह साफ़ जाहिर है कि पाकिस्तान ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के साथ अपनी सीमाओं के जोख़िम को कम करने की कोशिश कर रहा है. इन सीमाओं के ज़रिए घुसपैठ में होने वाली आसानी के चलते चरमपंथी हमले होते रहे हैं."

वो कहते हैं, "भारत के साथ पाकिस्तान को तारबंदी की ज़रूरत नहीं महसूस होती क्योंकि भारत एक ज़िम्मेदार लोकतांत्रिक मुल्क है और वो पाकिस्तान को नुक़सान पहुंचाने के लिए चरमपंथियों को बढ़ावा नहीं देता."

भारत के सीमा सुरक्षा बल (बीएएफ) के पूर्व एडिशनल डीजी संजीव कृष्णन सूद कहते हैं, "तारबंदी नहीं करने के ज़रिए पाकिस्तान एक तरह से यह स्वीकार करता है भारत की ओर से कोई घुसपैठ या दूसरी ग़लत गतिविधि नहीं होती है. अगर पाकिस्तान को तारबंदी करनी होती तो जिन घुसपैठियों को वह सीमा पार भेजता है उन्हें भारत के लिए पकड़ना काफ़ी आसान हो जाएगा."

दिसंबर 2018 में भारत के गृह मंत्रालय ने कहा था कि सरकार ने केवल पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ सीमाओं पर तारबंदी करने की योजना बनाई है.

भारत की सीमाएं म्यांमार, चीन, नेपाल और भूटान से भी लगती हैं.

आंकड़ों के अनुसार गृह मंत्रालय के मुताबिक़, पाकिस्तान से सटी 2,289 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा में से 2004 किलोमीटर सीमा पर तारबंदी का काम पूरा हो चुका है.

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पूर्व एडिशनल डीजी संजीव कृष्णन सूद के मुताबिक़, "भारत ने तारबंदी की और इससे पाकिस्तान हमारी गश्ती आवाजाही को देख पाने में सक्षम हो गया है क्योंकि इसके लिए गेट खोलकर तारबंदी के आगे जाकर रात के वक्त इलाक़ै पर दबदबे को क़ायम रखना होता है. घुसपैठ रोकने के लिए हमें यह क़ीमत चुकानी पड़ रही है."भारतीय सेना ने पाकिस्तान से सटी 740 किलोमीटर लंबे लाइन ऑफ़ कंट्रोल के नज़दीक एंटी इनफ़िल्ट्रेशन ऑब्स्टेकल सिस्टम (एआईओएस) लगाया है.

सूद बताते हैं कि भारत में सीमा पर तारबंदी करने का विचार पहली बार अस्सी के दशक में आया था.

उन्होंने कहा, "तब ऐसा सोचा गया था कि चरमपंथियों की घुसपैठ रोकने के लिए यह उपाय ज़रूरी है और अपनी सीमित क्षमताओं के चलते बीएसएफ़ घुसपैठ रोक नहीं पाएगा."

ऐसे में क्या पाकिस्तान कभी भारत से सटी अपनी सीमा पर तारबंदी करेगा? हमें इस बात का जवाब हमें नहीं पता.

हालांकि, पाकिस्तान की सेना इस सवाल का जवाब नहीं देती, लेकिन ज़ैदी के मुताबिक़, उन्होंने अभी तक ऐसे किसी प्रस्ताव के बारे में सुना भी नहीं है.

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