कोरोना लॉकडाउन में रिलेशनशिप को कैसे रखें जवां

दूर दूर प्रेमी

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    • Author, लेवी जुवेएल, मनीष पांडेय, जिम फार्थिंग
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़बीट
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ब्रिटेन ही नहीं दुनिया भर के प्रेमी जोड़ों को इन दिनों एक संकट के दौर से गुजरना पड़ रहा है. लॉकडाउन के समय में लोग अपने घरों से ज़रूरी काम के लिए ही बाहर निकल सकते हैं.

अगर आप एक साथ नहीं रहते हों तो अफ़सोस यह है कि प्रेमी- प्रेमिका से मिलना ज़रूरी काम में शामिल नहीं है, यानी आप लॉकडाउन के दौरान एक दूसरे से नहीं मिल सकते.

ऐसे मुश्किल दौर में ब्रिटेन की डिप्टी चीफ़ मेडिकल आफिसर डॉ. जेन्नी हैरिस ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर प्रेमी-प्रेमिका एक दूसरे के घर आते जाते हैं तो इससे संक्रमण हो सकता है.

उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि ऐसे समय में कपल्स को अपनी रिलेशनशिप का टेस्ट लेना चाहिए और ऐसा करने के लिए लॉकडाउन की पाबंदियों के दौर में एकसाथ रहना चाहिए.

27 साल की लाउरा कौलिंस ने इस टेस्ट को स्वीकार करते हुए अपने पार्टनर जोन पीयर्सन के साथ रहना शुरू कर दिया. चार साल से दोनों रिलेशनशिप में हैं, लेकिन इस दौरान दोनों अलग अलग ही रह रहे थे.

लाउरा कौलिंस ने बताया कि लॉकडाउन में अपने फ्लैट में अकेले रहने से ज़्यादा ख़राब क्या ही होता. इसलिए जब लॉकडाउन की घोषणा हुई तो लाउरा अपने पार्टनर जोन के साथ रहने के लिए उनके माता-पिता के घर कॉर्नवाल आ गईं.

लाउरा ने बीबीसी रेडियो 1 न्यूज़बीट से बताया, "जोन अभी अपने बचपन के कमरे में काम कर रहे हैं, वे अपने पुराने खिलौनों से घिरे हुए हैं, जिसमें टेडी बीयर, पोकमैन कार्ड और उनका एक पुराना गिटार शामिल है. यह काफ़ी मज़ेदार है."

"हमलोगों ने जिस तरह एकसाथ होने के लिए सोचा था, यह वैसा तो नहीं है. लेकिन हमारा एक साथ होना शानदार अनुभव है. हम लोग एक साथ गार्डेन में लंच ब्रेक लेते हैं."

प्रेमी

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कोरोना महामारी के दौर में अपनी गर्लफ्रेंड के साथ आठ साल के लंबे अंतराल बाद अपने माता पिता के पास आने के अनुभव पर जोन ने बताया, "अभी तो हमने उस तरह से नहीं देखा है. लेकिन डैड छोटी छोटी बातों पर नाराज़ हो जाते हैं. अगर हमने डिश वाशर को पूरी तरह खाली नहीं किया तो भी वह नाराज़ हो जाएंगे."

जोन और लाउरा ने कभी कार्नवाल आने की योजना नहीं बनाई थी लेकिन अब वे यहां हर पल का लुत्फ़ उठा रहे हैं.

मैं अपनी एक्स के साथ रहने आ गया

आपने ऊपर ठीक ही पढ़ा है.

केयर्न लाइनहैम और एजे जेम्स, दोनों की उम्र 23 साल है. चार साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद पांच महीने पहले इनका ब्रेकअप हो गया था. लेकिन दोनों एक दूसरे के अच्छे दोस्त बने रहे.

एजे जेम्स ने न्यूज़बीट ने कहा, "इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है, हम और हमारे परिवार वाले इसके बारे में मज़ाक़ भी करते थे."

कंप्यूटर पर काम करता व्यक्ति

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जब लॉकडाउन की अफ़वाह शुरू हो रही थी तब एजे जेम्स ने केयर्न से पूछा कि वह कहां रहेंगे. एजे ने बताया, "कुछ वजहों से, उन्होंने कहा कि वे तीन सप्ताह तक मेरे घर में रहना चाहते हैं."

केयर्न, एजे के घर आ गए. एजे के माता पिता और उनके छोटे भाई के साथ रहने के लिए. एजे ने बताया, "मुझे लगता है कि मेरा परिवार मुझसे ज़्यादा उनको प्यार करता है. लॉकडाउन समाप्त होने के बाद वे अपने घर चले जाएंगे. उनके पिता उन्हें बुला सकते हैं."

केयर्न और एजे, दोनों कामकाजी हैं. केयर्न एक लॉरी ड्राइवर हैं जबकि एजे विशेष देखभाल की ज़रूरतमंद लोगों की देखभाल करती हैं.

केयर्न बताते हैं कि वे कभी कभी इस बात पर कंफ्यूज हो जाते हैं कि एजे के घर में वे मेहमान हैं. दोनों एजे के कुत्ते के साथ बेड भी शेयर करते हैं. लेकिन दोनों ज़ोर देते हुए कहते हैं कि भविष्य में एकबार फिर से एक होने की संभावना अब नहीं है.

वर्चुअल सैर सपाटा

लंदन से पेरिस से न्यूयार्क- रिया और राजीव ने दुनिया भर की काल्पनिक सैर कर रहे हैं. दोनों एक साल से रिलेशनशिप में हैं और अलग अलग रहते हैं. लेकिन दोनों लॉकडाउन को दिलचस्प बनाने की कोशिशों में जुटे हैं.

दोनों अब तक दुनिया भर के म्यूज़ियम की सैर कर चुके हैं. न्यूयार्क की गुगेनहेम और म्यूजियम ऑफ़ मॉर्डन आर्ट के अलावा पेरिस के लोवरे म्यूज़ियम को रिया और राजीव ऑनलाइन देख चुके हैं.

23 साल की रिया ने कहा, "एक साथ दुनिया के आश्चर्यजनक जगहों को देखना कूल अनुभव है. भले हम प्लेन से यात्रा करने की जगह इंटरनेट के ज़रिए यह काम कर रहे हैं."

कुत्ता और प्रेमी

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इन दिनों राजीव को शर्ट पहनना भी अतिरिक्त काम लगता है. वैसे सच यह भी है कि दोनों के लिए रिलेशनशिप के मायने केवल दुनिया घूमना नहीं है.

इसलिए रिया और राजीव ने मिलकर एक रीडिंग क्लब भी बनाया है. इसमें दोनों एक दूसरे की फेवरिट पब्लिकेशन को सब्सक्राइब कर रहे हैं. जैसे कि रिया के लिए न्यूयार्क टाइम्स और राजीव के लिए मीडियम सब्सक्राइब किया गया है. दोनों जो भी पढ़ते हैं, उस पर बाद में चर्चा करते हैं.

राजीव डेटा साइंटिस्ट हैं. ऐसे में रिया ने उनके काम को बेहतर ढंग से समझने के लिए वक़्त निकाला है. रिया ने बताया, "मैं उनसे कोडिंग ट्यूटेरियल ले रही हैं. मैं अब समझने लगी है. इस अच्छी स्किल को सीखना कूल है."

दोनों के मुताबिक उनकी रिलेशनशिप के लिए यह सब महत्वपूर्ण है. राजीव ने बताया, "घर में ऐसे ही रहने से इन दिलचस्प चीज़ों को करना बेहतर है. अगर आप कुछ नहीं करते हैं तो निगेटिव सोच पनपने लगती है. फिर मौजूदा स्थिति के लिए आप एक दूसरे को ज़िम्मेदार ठहराने लगते हैं. दिलचस्प चीज़ों को करके आप एक दूसरे को अच्छा एहसास कराते हैं और नया अनुभव हासिल करते हैं."

लॉकडाउन के समय में रिलेशनशिप को जवां रखने की 5 टिप्स

सामी वुंडर, डेटिंग एंड रिलेशनशिप कोच

1. एकसाथ वक़्त व्यतीत करने के साथ साथ आप खुद और अपने पार्टनर को पर्याप्त समय दें. जब आपके पति प्लेस्टेशन खेलने में व्यस्त हों तो आप कोई किताब पढ़ सकती है. एक दूसरे को स्पेस दें और आज़ादी भी. घर पर एकसाथ हैं तो यह उम्मीद ना करें कि आपको सबकाम एकसाथ ही करना है.

2. आप घर में फंसे हुए हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि जीवन से रोमांस पूरी तरह ग़ायब हो जाए. आप रात में घर पर ही डेट का इंतजाम कर सकते हैं, कैंडल लाइट डिनर कर सकते हैं. अच्छे कपड़े पहन कर अच्छे दिख सकते हैं.

3. ईमानदारी से समस्याओं को स्वीकार करना चाहिए और उसके हल की दिशा में प्रयत्न करना चाहिए. अगर आपको लगे एक दूसरे में शारीरिक आकर्षण कम हो रहा है, तो इसके लिए समय निकालिए. एक दूसरे को अच्छी लगने वाली चीज़ें कीजिए. अच्छे संदेश भेजकर इसकी शुरुआत कर सकते हैं.

4. अगर पार्टनर के साथ नहीं रह रहे हों तो क्रिएटिव हो सकते हैं. पाटर्नर को फूल, भोजन और पत्र भेज सकते हैं. सरप्राइज दे सकते हैं.

5. आप जीवन में अपनी प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय कर सकते हैं. लॉकडाउन ने इसका अवसर भी मुहैया कराया है. आपको लग सकता है आप कैद में हैं लेकिन ऐसे वक़्त में उन लोगों को कनेक्ट कर सकते हैं जिनसे आप प्यार करते हैं. कुछ ऐसा कर सकते हैं जो आपने पहले कभी नहीं किया हो.

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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