कोरोना वायरस: मां के साथ वीडियो कॉल पर था, जब वो हमेशा के लिए सो गईं

एंडर्यू वेब अपनी मां के साथ

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मां की मौत से कुछ घंटे पहले ही मैंने उनसे वीडियो कॉल पर बात की थी, तब वो अपने क़रीबियों और जिन्हें वो चाहती थीं उनके नाम ले रही थीं. मैं उनसे बातें करता रहा और धीरे धीरे वो चिरनिद्रा में सोने लगीं. अब वो कभी नहीं उठेंगी.

बीबीसी के प्रोड्यूसर एंड्रयू वेब अपनी माँ के अंतिम समय में उनसे मिलने अस्पताल नहीं जा पाए. हालांकि जब वो अस्पताल में भर्ती थीं तो अपनी माँ के साथ समय बिताने के लिए उन्होंने तकनीक का इस्तेमाल किया.

दुनिया भर में इसी तरह की कई कहानियाँ चल रही हैं, क्योंकि कोरोनो वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन की वजह से कई परिवार गंभीर बीमारी की वजह से अस्पताल में दम तोड़ते अपने परिजनों तक उनके अंतिम समय में नहीं पहुंच पा रहे हैं.

ऐसी ही एक कहानी है एंड्रयू वेब और उनकी माँ कैथलीन वेब की है. एंड्रयू ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया की कैसे शारीरिक रूप से दूर होने के बावजूद वह अपनी माँ के साथ उनके अंतिम समय तक जुड़े रहे.

एंड्रयू बताते हैं, "हम अपने माता-पिता की 50वीं शादी की सालगिरह मनाने वाले थे, उसी दिन मेरी माँ को दिल का दौरा पड़ा था."

फ़ेसटाइम से बात करते हुए

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"परिवार के साथ लंच का प्रोग्राम हम पहले की रद्द कर चुके थे. मेरे भाई लारेंस और मैंने कोरोनो वायरस के ख़तरे पर चर्चा की. हमने ब्रिटेन में सोशल प्रतिबंधों के लगाए जाने से दो हफ़्ते पहले ही इस सेलिब्रेशन को रोककर किसी भी तरह इस वायरस के संपर्क में आने से अपने माता-पिता को दूर रखने का फ़ैसला किया."

पापा को भी मजबूरी में अस्पताल जाना बंद करना पड़ा

बीते वर्ष नवंबर 2019 में आंत की समस्या की वजह से मेरी मां की आपातकालीन सर्जरी हुई थी.

इस साल शादी की सालगिरह मनाने से कुछ दिन पहले ही माँ की आंत की समस्या फिर से उभर आयी जिसके चलते पिताजी माँ को अस्पताल ले गए.

डॉक्टरों का कहना था की ऐसी हालत में सर्जरी करने से माँ की जान जा सकती है और यदि वे बच भी गईं तो भी उनका जीवन काफ़ी अच्छा नहीं रहने वाला है.

आने वाले कुछ हफ़्तों में माँ की तबीयत और बिगड़ने लगी, उन्हें खाना खाने में तकलीफ़ होने लगी और उनकी हालत काफ़ी गंभीर हो गई, और अंततः उनकी मौत हो गई.

स्काइप के ज़रिए बात करता परिवार

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ब्रिटेन में अब तक कोरोना वायरस के चलते प्रतिबंध लागू नहीं किए गए थे, पर कोरोना वायरस ने अपना दायरा बड़ा कर लिया था. ऐसी मुश्किल घड़ी में मेरा परिवार एक दुविधा में था- हम अपने बीमार पड़े परिजन को अस्पताल में देखने कैसे जाएं? क्योंकि ऐसे तो हम ख़ुद उसके लिए ख़तरा बन सकते हैं और साथ ही वहां भर्ती अन्य मरीज़ों के लिए भी. इसके साथ ही ख़तरा हमें भी होता.

मेरे भाई ने ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य पर हो सकने वाले इन ख़तरों को देखते हुए अस्पताल नहीं जाने और अपने परिवार की सुरक्षा से समझौता नहीं करने का फ़ैसला किया.

75 वर्षीय मेरे पिता बर्नी, उन मास्क और दस्ताने को पहनकर माँ से मिलने अस्पताल गए जो मैंने उन्हें पोस्ट से भेजे थे.

धीरे-धीरे मैंने उन्हें इस बात के लिए राज़ी करना शुरू किया कि कैसे उनका अस्पताल जाना न सिर्फ़ उनके लिए बल्कि दूसरों के लिए एक संभावित ख़तरा हो सकता है, इसके अलावा अस्पताल जाने से रोके जाने को लेकर क़ानून बनाए जाने की भी संभावना थी.

एंड्र्यू वेबस के माता पिता

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जब पापा अस्पताल में होते तो हम अपनी मां से व्हाट्सऐप्प के ज़रिए बातें किया करते थे. पापा मां के सिरहाने बैठकर फ़ोन को ऊपर उठा लिया करते थे ताकि वो हमें ठीक से देख सकें.

वीडियो कॉल का ये सिलसिला कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा पर जैसे ही कोरोना वायरस के चलते देश में लॉकडाउन हुआ तो पापा को भी मजबूरी में ख़ुद अस्पताल जाना रोकना पड़ा.

मां कमज़ोर होती चली गईं

मां

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माँ की हालत इतनी कमज़ोर हो गयी थी कि जो फ़ोन उनके पास अस्पताल में रखा गया था वो उसे उठाने तक में असमर्थ थीं, ऐसे में हमें उनसे बातें करने के लिए अस्पताल कर्मियों से मदद लेनी पड़ती थी, उनसे माँ के पास रखे फ़ोन को उठाने के लिए कहना पड़ता था.

फिर अचानक एक दिन, मेरी मां को संदिग्ध कोरोना वायरस मरीज़ समझ एक अलग कमरे में ले जाया गया, नर्सों ने माँ के कमरे में जाने से पहले दस्ताने, मास्क और गाउन पहना शुरू कर दिया.

मैंने नर्सों की मदद से वीडियो कॉल के ज़रिए मां के पास जाने की व्यवस्था की. नर्स हमेशा मदद के लिए तैयार रहती थीं. वो यह जानती थीं कि फ़ोन लॉकडाउन के दौरान अस्पताल से बाहरी दुनिया के साथ जुड़ने का एकमात्र साधन है.

तकनीक ने आसान की मां से हमारी बातचीत

स्काइप का स्क्रीनशॉट

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लेकिन फिर एक दिन फ़ोन ने काम करना बंद कर दिया था. वो टूट गया था, अब हमें माँ के लिए एक नया फ़ोन लेना था तो हमने तय किया की इस बार हम फ़ोन में कुछ ऐसे ऐप्प का इस्तेमाल करेंगे जिससे माँ से बात करने की पूरी व्यवस्था को सरल बनाया जा सके.

मेरे भाई और पिताजी ने स्काइप और एयर ड्रॉइड नामक ऐप फ़ोन में इंस्टॉल कर दिए.

स्काइप में एक ऑटो ऐन्सर फ़ंक्शन होता है जो इसे सरल बनाता है वहीं एयर ड्रॉइड ऐप नए फ़ोन की स्क्रीन को छोटे रूप से देखने और इसे संचालित करने में सक्षम बनाता है.

मेरे भाई अपने साथ ये नया फ़ोन लेकर अस्पताल गए और एक नर्स को इस फ़ोन को दे दिया.

माँ कुछ और दिनों तक जीवित थीं पर दिनों के गुज़रने के साथ वो बेहद कमज़ोर होती जा रही थी.

हम जब भी माँ को देखने के लिए स्काइप पर फ़ोन किया करते थे तो नर्स फ़ोन को उठा लेती थी और उनकी मदद से हम माँ को देख पाते थे.

मैंने ऑनलाइन एक फ़ोन ट्राइपॉड भी ऑर्डर किया लेकिन वो माँ के अंतिम संस्कार के समय ही पहुंच सका.

अलविदा माँ

वीडियो के ज़रिए अंतिम संस्कार

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स्काइप वीडियो पर, मेरी माँ ने मुझे, मेरे भाई और उनके पोते को अलविदा कह दिया, जिसमें मेरी छह साल की बेटी भी शामिल है जो अमरीका के वर्जीनिया में रहती है.

आधुनिक फ़ोन एप्लिकेशन के बिना, यह असंभव होता.

कोरोनोवायरस ने हमें संचार का एक तरीक़ा खोजने के लिए मजबूर तो कर ही दिया, ताकि ऐसी कठिन परिस्थितियों में भी हम अपने परिवार के साथ रह सकें.

मेरे पापा ने फ़ोन कॉल पर ही 50 साल की अपनी पत्नी को अलविदा कहा, हालांकि वे माँ से केवल 30 किलोमीटर की दूरी पर थे.

अस्पताल की नर्सें काफ़ी अच्छी थीं. वो मदद के लिए हमेशा तैयार रहती थीं. हालांकि दो बार ऐसा भी हुआ जब माँ को उनके कमरे में मैंने अकेले दवाई मांगते सुना.

अंतिम संस्कार में भी वीडियो कॉल

वीडियो

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माँ की मौत से कुछ घंटे पहले लगभग दो बजे मैंने उन्हें वीडियो कॉल की और उन्हें अपने क़रीबी और प्यारे लोगों का नाम पुकारते सुना.

मैंने फिर उन्हें 15 मिनट तक सांत्वना दी और तब तक बात की जब तक उन्हें नींद नहीं आ गयी.

माँ अब कभी नहीं उठेंगी

पापा और भाई का परिवार मां के अंतिम संस्कार में शामिल हुए. अंतिम संस्कार केवल 10 मिनट चला.

ब्रिटेन के क़ानून के मुताबिक़, अंतिम संस्कार में 10 लोग तक ही शामिल हो सकते हैं. लेकिन हमने कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए फ़ैसला किया कि कुछ ही लोगों का जाना ज़्यादा सुरक्षित रहेगा और इसलिए दो पड़ोसियों के अलावा, कोई अन्य इस शोक सभा में उपस्थित नहीं था, मैं भी नहीं.

हम अब भी संक्रमण के ख़तरे को लेकर चिंतित थे इसलिए मेरे भाई के परिवार ने मास्क पहन रखा था.

श्मशान की तरफ़ से वीडियो की कोई सुविधा नहीं थी, इसलिए मेरे भाई और भतीजे ने अपने दोस्तों और मेरे साथ अंतिम संस्कार के पलों को साझा करने के लिए अपने फ़ोन पर ज़ूम ऐप का इस्तेमाल किया. मैंने इस ऐप के ज़रिये माँ के अंतिम संस्कार को उन लोगों के लिए रिकॉर्ड किया जो इसका हिस्सा नहीं बन पाए थे.

श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि सभा भी वीडियो पर ही की गई

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जैसे ही अंतिम संस्कार ख़त्म हुआ मैंने वीडियो को एडिट किया और तस्वीरों का इस्तेमाल माँ का एक मेमोरियल बनाने में किया.

मैंने जानबूझकर अंतिम संस्कार के दौरान अलग-अलग शॉट्स लिए ताकि मैं उन सभी लोगों का जो इसमें ऑनलाइन शामिल हुए थे और श्मशान के शॉट्स को शामिल कर वीडियो बना सकूं.

फिर मुझे वो अहसास हुआ जो अब तक नहीं हो रहा था. अब मैं सही मायने में अपनी माँ को खोने पर दुखी था.

बीते तीन हफ़्ते से मैंने ख़ुद को संभाले रखा था और मुझे डर था कि कहीं मैं बाद में टूट न जाउं.

कैथलीन वेब

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इस दौरान मैंने तकनीक में ख़ुद को उलझाए रखा और यह तकनीक ही थी जिसके कारण मैं ऐसे भावुक और कठिन समय में अपनी माँ के साथ जुड़ सका.

उम्मीद करता हूं कि ऐसी कठिन परिस्थिति में जिस तरह मैंने तकनीक का उपयोग किया है उससे ऐसी परिस्थितियों में पड़े कुछ अन्य लोगों को सीखने में मदद मिलेगी.

लोग यह समझ सकेंगे कि कैसे अत्यंत कठिन समय में भी आधुनिक तकनीक हमें अपनों के क़रीब रहने में मददगार साबित हो सकती है.

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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