महिंदा राजपक्षे ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद से दिया इस्तीफ़ा

महिंदा राजपक्षे

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इमेज कैप्शन, सात हफ़्ते पहले ही महिंदा राजपक्षे ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी.
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श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफ़ा दे दिया है. सात हफ़्ते पहले ही श्रीलंका के राष्ट्रपति ने उन्हें एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत प्रधानमंत्री नियुक्त किया था.

राजपक्षे के पद छोड़ने के बाद उनके बेटे नमल ने बीबीसी को बताया कि उनके पिता ने देश की स्थिरता बनाए रखने के लिए पद छोड़ा है.

विश्लेषकों की राय है कि राजपक्षे के पद छोड़ने के बाद श्रीलंका में क़रीब दो महीने से जारी सत्ता संघर्ष पर विराम लग सकता है.

बीते अक्टूबर के महीने में श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरीसेना ने तत्कालीन प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर दिया था और उनकी जगह राजपक्षे को प्रधानमंत्री बना दिया था.

ये माना जा रहा है कि विक्रमसिंघे रविवार को प्रधानमंत्री के तौर पर कार्यभार संभाल सकते हैं.

विक्रमसिंघे की पार्टी के प्रवक्ता हरीन फर्नांडो ने बीबीसी को बताया, "राष्ट्रपति रविवार सुबह 10 बजे रानिल विक्रमासिंघे को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाने के लिए तैयार हो गए हैं."

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प्रवक्ता फर्नांडो ने कहा कि इससे राजनीतिक गतिरोध ख़त्म होगा. उन्होंने कहा कि 50 दिन पहले राजनीतिक संकट की शुरुआत होने के बाद से देश और इसकी अर्थव्यवस्था को 'ख़ासा नुकसान' हुआ है.

श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने एक फ़ैसले में राष्ट्रपति सिरीसेना के नवंबर में संसद भंग करके तय वक़्त से क़रीब दो साल पहले चुनाव कराने को फ़ैसले को अवैध बताया था.

राजनीतिक संकट के पूरे दौर के दौरान विक्रमसिंघे ने लगातार कहा कि वैधानिक रूप से वो ही श्रीलंका के प्रधानमंत्री हैं.

श्रीलंका के राजनीतिक संकट के दौरान संसद में भी हंगामा हुआ और लोगों ने सड़कों पर भी प्रदर्शन किए. श्रीलंका के घटनाक्रम पर भारत, चीन, अमरीका और यूरोपीय संघ की भी नज़र थी.

राजपक्षे का साल 2015 तक श्रीलंका की राजनीति पर दबदबा था. उनके पश्चिमी देशों के साथ संबंध अच्छे नहीं माने जाते हैं. इसकी वजह श्रीलंका में साल 2009 में ख़त्म हुए गृहयुद्ध के दौरान मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप हैं.

श्रीलंका सरकार, सेना और अलगावदी तमिल टाइगर दोनों पर ही मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे थे. श्रीलंका में गृहयुद्ध के दौरान हज़ारों आम लोग मारे गए थे.

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श्रीलंका की संसद ने बुधवार को रानिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री बनाए रखने के पक्ष में विश्वासमत पारित किया था.

विक्रमसिंघे के पास अपनी पार्टी और उनके सहयोगियों को मिलाकर संसद में मामूली बहुमत है.

सिरीसेना किसी समय राजपक्षे के सहयोगी थे और उनकी सरकार में भी शामिल थे. साल 2015 में उन्होंने रानिल विक्रमसिंघे के साथ गठजोड़ किया और चुनाव में राजपक्षे को मात दी. इसके बाद सिरीसेना और विक्रमासिंघे ने मिलकर सरकार बनाई.

बाद में दोनों के रिश्तों में खटास आई और सिरीसेना ने अक्टूबर में विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद से हटा दिया.

सिरीसेना ने विक्रमसिंघे को घमंडी बताया. उन्होंने विक्रमसिंघे पर विवादास्पद तौर पर केंद्रीय बैंक के बॉन्ड बेचने से भी जोड़ा था जिसकी वजह से कथित तौर पर श्रीलंकाई रुपयों में 11 अरब का नुक़सान हुआ था.

राष्ट्रपति ने ये आरोप भी लगाया था कि एक कैबिनेट मंत्री उनकी हत्या की योजना में शामिल था और पुलिस जांच में अवरोध पैदा कर रही है.

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