पाकिस्तान: हिंदू लड़की का 'जबरन धर्म परिवर्तन' कराने के बाद निक़ाह

शादी (फ़ाइल फ़ोटो)
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सिंध के रेगिस्तानी इलाके थारपरकर में पुलिस ने नौ साल की एक हिंदू लड़की के कथित अपहरण का मामला दर्ज कर लिया है.

अभियुक्त अली नवाज़ शाह पर रवेता मेघवाड़ का जबरन धर्म परिवर्तन कराकर उससे निकाह करने का आरोप है.

ननगरपारकर थाने में सतराम मेघवाड़ की फरियाद पर अपहरण का मामला दर्ज किया गया है.

फरियादी सतराम मेघवाड़ ने बताया कि छह जून की रात जब सभी लोगों सो रहे थे कि कुछ लोग उनके घर में दाखिल हुए और रवेता को जबरन साथ ले जाने की कोशिश की.

सतराम मेघवाड़ के अनुसार, 'लड़की की चीख-पुकार पर उनका चचेरा भाई हरीश उठ गया. हरीश ने अली नवाज़ शाह और उनके साथियों को पहचान लिया. नवाज़ अली शाह ने धमकी दी और लड़की को जबरन अपने साथ ले गया.'

शादी (फ़ाइल फ़ोटो)

अपहरण की शिकायत

सतराम मेघवाड़ ने एफ़आईआर में बताया है कि लड़की के अपहरण की शिकायत उन्होंने इलाके के बड़े लोगों से भी की थी लेकिन अभी तक लड़की को वापस नहीं किया गया जिसकी वजह से वह अब यह मामला दर्ज कराने आए हैं.

बीबीसी संवाददाता रियाज़ सुहैल के अनुसार उमरकोट ज़िले के सामारू इलाके में स्थित धार्मिक केंद्र 'मजदीदया गुलज़ार खलील' में रवेता का धर्म परिवर्तन किया गया है और सोमवार को अयूब जान सरहिंदी के दस्तखत से मदरसे का प्रमाणपत्र जारी किया गया है, जो रवेता का नाम गुलनाज़ लिखा गया है.

इस प्रमाण पत्र में लड़की की उम्र 18 साल बताई गई है, जबकि लड़की के माता पिता के पास मौजूद प्राथमिक स्कूल प्रमाण पत्र के अनुसार रवेता की उम्र 16 साल है.

कथित जबरन धर्म परिवर्तन के बाद उसी दिन मदरसे में रवेता का नवाज़ अली शाह के साथ शादी कराई गई जिसमें कहा गया है कि दो गवाहों की मौजूदगी में दूल्हे और दुल्हन की स्वीकृति के बाद ये निकाह पढ़ाया गया.

वीडियो कैप्शन, पाक संसद ने हिंदू विवाह अधिनियम पारित किया

जबरन धर्म परिवर्तन

पिछले साल सिंध असेंबली ने जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ एक कानून पारित किया था. इसके मुताबिक अगर कोई नाबालिग ये दावा करता है कि उसने धर्म परिवर्तन कर लिया है तो उसके दावे को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

हालांकि नाबालिग के माता पिता या अभिभावक अपने परिवार सहित धर्म बदलने का फैसला कर सकते हैं. जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने वाला ये क़ानून शादी से लेकर बंधुआ मजदूरी तक के मामलों में लागू होता है.

इस कानून के अनुसार अगर किसी पर जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप सिद्ध हो जाता है तो अभियुक्त को पांच साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई जाएगी और ये हर्जाना पीड़ित पक्ष को दिया जाएगा.

वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान में अल्पसंख्यक

मानवाधिकार संगठन

जमाते इस्लामी, जमात-उद-दावा सहित अन्य दलों के विरोध के बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार ने इस क़ानून से किनारा कर लिया और सूबे के वरिष्ठ मंत्री निसार खोड़ो ने कहा था कि इस कानून में संशोधन किया जाएगा लेकिन अभी तक ये संशोधन नहीं हो सका है.

सिंध में फिलहाल 18 साल से कम उम्र की शादी पर भी प्रतिबंध है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सरकार इस कानून पर भी अमल करने में सफल नहीं हो सकी है.

दूसरी तरफ हिंदू समुदाय का दावा है कि उनकी किशोर लड़कियों का अपहरण करके जबरन विवाह किया जाता है.

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