फिर उठेगा स्कॉटलैंड की आज़ादी का मुद्दा ?

ब्रितानी संसद की इमारत.
    • Author, सरा स्मिथ
    • पदनाम, स्कॉटलैंड एडिटर, बीबीसी
  • प्रकाशित

ब्रितानी प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने कहा है कि वो समय पूर्व चुनाव कराए जाने की सिफ़ारिश संसद से करेंगी. अगर इस चुनाव को शेष ब्रिटेन में ब्रेक्सिट पर जनमत संग्रह माना जाए तो स्कॉटलैंड में यह बहस हावी रहेगी कि स्कॉटलैंड की आज़ादी के लिए एक और जनमत संग्रह होना चाहिए.

स्कॉटलैंड की फ़र्स्ट मिनिस्टर निकोला स्टर्जन ने कहा है कि जनमत संग्रह पर जनादेश के लिए उन्हें इस चुनाव को इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं क्योंकि स्कॉटलैंड की संसद ने पहले ही एक और पोल के समर्थन में मतदान कर दिया है.

लेकिन अब जब ब्रिटेन यूरोपीय संघ से निकलने को तैयार है तो वो इस चुनाव का उपयोग निश्चित रूप से यह मुद्दा बनाने के लिए करेंगी कि स्कॉटलैंड को अपना भविष्य चुनने की इजाजत दी जानी चाहिए,

ब्रेक्सिट पर ध्यान

प्रधानमंत्री टेरिजा मे के इस बयान में एक विरोधाभास भी है, जब वो चुनाव की बात भी करती हैं और यह भी कहती हैं कि यह स्कॉटलैंड की आज़ादी पर एक और जनमत संग्रह कराने का समय नहीं है. और नेताओं को ब्रेक्सिट पर ध्यान देना चाहिए.

स्कॉटलैंड की फर्स्ट मिनिस्टर निकोला स्टर्जन

स्कॉटलैंड की कंजर्वेटिव पार्टी के कार्यकर्ताओं 'टोरिज़' के लिए स्टर्जन को यह कहना थोड़ा मुश्किल होगा कि उन्हें आम चुनाव के बीच अपने दिन-प्रतिदिन के काम पर ध्यान देना चाहिए.

स्कॉटलैंड नेशनलिस्ट पार्टी (एसएनपी) को लगता है कि उसके लिए यह बड़ा अवसर होगा. चुनाव में उनका अच्छा प्रदर्शन आजादी के लिए जनमत संग्रह की उनकी मांग को तेज़ करेगा.

लेकिन उनके लिए मुश्किल 2015 के आम चुनाव में उनका बेहतरीन प्रदर्शन होगा. एसएनपी ने स्कॉटलैंड की 59 में से 56 सीटें जीती थीं. लेकिन क्या वो इससे बेहतर कर पाएगी ?

अगर चुनाव में उन्हें कम सीटें मिलती हैं, उनके विरोधी कहेंगे कि नजीतों से पता चलता है कि स्कॉटलैंड के मतदाता आज़ादी पर एक और जनमत संग्रह नहीं चाहते हैं.

पार्टियों की उम्मीद

'टोरिज़' यानी कॉन्ज़रवेटिव पार्टी के नेताओं का कहना है कि उन्हें अपनी सीटें बढ़ने की उम्मीद है. उनके पास अभी केवल एक ही सीट है.

ब्रितानी प्रधानमंत्री टेरिजा मे.

पार्टी इस चुनाव में यह कहते हुए शामिल होगी कि केवल उन्होंने ही स्कॉटलैंड की आज़ादी पर एक और जनमत संग्रह का विरोध किया था.

स्कॉटलैंड की संसद के लिए 2016 के चुनाव में लेबर पार्टी को पीछे छोड़ते हुए में कंजर्वेटिव पार्टी दूसरे नंबर की पार्टी बन गई थी.

स्कॉटलैंड की संसद को संबोधित करतीं वहां की फर्स्ट मिनिस्टर निकोला स्टर्जन

स्कॉटलैंड की एसएनपी को इस बात का एहसास है कि उसके लिए 2015 जैसा प्रदर्शन दोहरा पाना मुश्किल होगा, जब उन्होंने 50 फ़ीसद वोट के साथ स्कॉटलैंड की क़रीब हर सीट जीत ली थी.

आज़ादी के लिए 2014 में हुए जनमत संग्रह के कुछ महीने बाद कराए गए इस चुनाव में यह आश्चर्यजनक नतीजा था.

उसके बाद से बहुत सी बहसें बदल गई हैं. इस चुनाव में एसएनपी का प्रदर्शन आने वाले सालों में स्कॉटलैंड में संवैधानिक बहस का दिशा निर्धारित करेंगे.

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