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शुक्रवार, 22 मई, 2009 को 08:29 GMT तक के समाचार

19 कैबिनेट मंत्रियों के साथ मनमोहन सिंह की शपथ कुछ देर में

भारत में 22 मई को मनमोहन सिंह एक इतिहास दोहराने जा रहे हैं. 14वीं लोकसभा के लिए 22 मई 2004 को शपथ लेने वाले मनमोहन सिंह ठीक पाँच साल बाद यानी 22 मई 2009 को एक बार फिर भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं.

मनमोहन सिंह लगातार दूसरी बार कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में शुक्रवार शाम (भारतीय समयानुसार शाम साढ़े छह बजे) शपथ लेंगे.

प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को प्रधानमंत्री के साथ 19 मंत्रियों को शपथ ग्रहण कराई जाएगी.

जिन नामों की मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है उनमें प्रणब मुखर्जी, पी चिदंबरम, एके एंटनी, कपिल सिब्बल, कमलनाथ, शरद पवार, ममता बनर्जी के नाम प्रमुखता से शामिल हैं.

कांग्रेस के साथ यूपीए में शामिल घटक दलों में से केवल ममता बनर्जी और शरद पवार ही शुक्रवार को शपथ ग्रहण करने वाले मंत्री हैं.

इस संबंध में उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के 21 सांसद चुनकर आए हैं मगर उनमें से किसी का भी नाम इस सूची में नहीं है.

शुक्रवार शाम राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल राष्ट्रपति भवन के अशोक हॉल में 76 वर्षीय मनमोहन सिंह को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएँगी.

बाकी के मंत्रिमंडल के विस्तार के लिए फिलहाल 26 मई की तारीख की चर्चा चल रही है. प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार अगले विस्तार में अन्य कैबिनेट मंत्रियों के साथ ही राज्य मंत्रियों (स्वतंत्र प्रभार) और अन्य राज्य मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी.

कार्यालय के अनुसार उसमें सहयोगी पार्टियों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा.

संभावना है कि 15वीं लोकसभा के पहला सत्र दो जून को शुरु होगा और दस जून तक चलेगा.

असंतुष्ट घटक

यूपीए में शामिल डीएमके के साथ मंत्रिमंडल बंटवारे को लेकर कोई अंतिम राय नहीं बन पाई है और इसीलिए डीएमके ने फिलहाल सरकार में शामिल न होते हुए बाहर से समर्थन जारी रखने की घोषणा की है.

उधर भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की नेशनल कॉन्फ़्रेंस भी कांग्रेस के नाराज़ नज़र आई.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक भारतीय टीवी चैनल को बताया कि बेहतर होता यदि कांग्रेस डॉक्टर फ़ारूक़ अब्दुल्ला को ये बता देती कि वे मंत्रिमंडल में शामिल होंगे या नहीं. लेकिन गुरुवार की रात मनमोहन सिंह ने फ़ारुक़ अब्दुल्ला से फ़ोन पर बात की.

फारुक अब्दुल्ला ने पत्रकारों को बताया, "कौन मंत्री बनेगा या नहीं ये प्रधानमंत्री और यूपीए अध्यक्ष को तय करना होता है. प्रधानमंत्री ने मुझसे बात की और बताया कि डीएमके के साथ कुछ मतभेद हैं जिन्हें वो पहले सुलझाना चाहते हैं."

मंत्रालयों और विभागों के बँटवारे के लेकर यूपीए में मतभेद की ख़बर तब सामने आई जब डीएमके के नेता टीआर बालू ने गुरुवार शाम पत्रकारों को बताया, "मेरे नेता करुणानिधि ने मुझे आपसे ये बताने को कहा है कि डीएमके यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन देगी."

समाचार एजेंसियों के अनुसार टीआर बालू की घोषणा के कुछ ही देर बाद यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निवास पर पहुँचीं और लगभग डेढ़ घंटे तक दोनों नेताओं की बातचीत चली. लेकिन ये स्पष्ट नहीं हुआ कि क्या ताज़ा राजनीतिक समस्या का कोई हल निकल पाया है या नहीं.

गुरुवार रात कांग्रेस के प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने भी मतभेदों को स्वीकार किया और कहा कि कांग्रेस और डीएमके के बीच मंत्रालयों के बाँटवारे को लेकर विवाद हो गया था जो सुलझ नहीं सका है.

द्विवेदी ने कहा, "हमारा प्रस्ताव था कि जो स्थिति पिछली बार थी, वही रखी जाए. लेकिन इस बार डीएमके की माँग कुछ ज़्यादा थी. हमने जो उनके सामने पेशकश रखी थी उनकी माँग उससे कुछ अधिक है."

लेकिन कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने डीएमके के फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में भरोसा जताया कि पूरा विवाद सुलझा लिया जाएगा.