गुरुवार, 21 मई, 2009 को 14:33 GMT तक के समाचार
कांग्रेस की अगुआई में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के शपथ लेने से पहले ही मुश्किलें शुरू हो गई हैं.
मंत्रालयों के बँटवारे पर मतभेद होने के कारण डीएमके ने कांग्रेस की अगुआई में बनने वाली यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन देने का फ़ैसला किया है.
कांग्रेस के प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने स्वीकार किया कि कांग्रेस और डीएमके के बीच मंत्रालयों के बाँटवारे को लेकर विवाद हो गया था जो सुलझ नहीं सका.
डीएमके के नेता टीआर बालू ने पत्रकारों को बताया, "मेरे नेता करुणानिधि ने मुझे आपसे ये बताने को कहा है कि डीएमके यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन देगी."
ये पूछने पर कि किस मुद्दे पर मतभेद थे, उनका कहना था, "जब 2004 में सरकार बनी थी तब कोई फ़ॉर्मूला नहीं था."
इससे पहले टीआर बालू और अन्य डीएमके नेताओं की कांग्रेस नेताओं के साथ बातचीत हुई.
ख़बरों के मुताबिक यूपीए की महत्वपूर्ण घटक डीएमके पाँच कैबिनेट और चार राज्यमंत्री के पद की माँग कर रही है.
डीएमके की नज़र स्वास्थ्य, दूरसंचार, बिजली, भूतल परिवहन और रेलवे जैसे मंत्रालयों पर थी.
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने कहा, "हमारा प्रस्ताव था कि जो स्थिति पिछली बार थी, वही रखा जाए. लेकिन इस बार डीएमके की माँग थोड़ी ज़्यादा थी."
उनका कहना था, "उनकी माँग हमने जो उन्हें पेशकश की थी उससे कहीं अधिक है."
उन्होंने कहा, "लेकिन इसका अर्थ नहीं है कि संवाद समाप्त हो गया है. यूपीए में कोई समस्या नहीं है."
कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने डीएमके के फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सारा विवाद सुलझा लिया जाएगा.
उन्होंने एक भारतीय समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, "इसको लेकर कई निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए. हमारी बातचीत डीएमके के साथ जारी है. सारी चीजें हल हो जाएंगी."