शनिवार, 16 मई, 2009 को 02:50 GMT तक के समाचार
लोकसभा चुनावों परिणामों में आशंका जताई जा रही है कि जनादेश खंडित होगा और किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा.
माना जा रहा है कि सरकार बनाने में चंद्रबाबू नायडू, नवीन पटनायक और नीतीश कुमार की अहम भूमिका होगी.
नीतीश पर डोरे
बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल-यू के नेता नीतीश कुमार इन दिनों बेहद मांग में हैं.
तेलुगू देशम के नेता चंद्रबाबू नायडू ने नीतीश कुमार से संपर्क किया है.
ख़बरें हैं कि उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने शुक्रवार को नीतीश से फ़ोन पर बात की.
इसके पहले शुक्रवार को एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने बिहार के सांसदों से अपील की थी कि वे केंद्र में सरकार बनाने वाले दल या गठबंधन को समर्थन देने के लिए शर्त रखें कि वे बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने संबंधी साफ़-साफ़ घोषणा करें.
उधर, नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इस माँग का समर्थन करते हुए दोहराया कि नीतीश कुमार एनडीए के साथ हैं.
जयललिता के इरादे
किसी भी सरकार के गठन में अन्नाद्रमुक की प्रमुख जयललिता की प्रमुख भूमिका होगी.
जयललिता ने स्पष्ट किया है कि चुनाव नतीजे उनकी उम्मीदों पर खरे उतरे तो वो सरकार गठन के सिलसिले में दिल्ली जाएँगी.
उन्होंने स्पष्ट किया कि वो कोई भी फ़ैसला करने से पहले अपने सहयोगियों से बात करेंगी.
समर्थन करने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वो 16 मई को चुनाव नतीजों का इंतज़ार करेंगी.
चंद्रबाबू पर नज़र
तेलुगू देशम पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू को पटाने की कोशिशें तेज़ हो गईं हैं.
ख़बरें हैं कि चंद्रबाबू नायडू और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार संपर्क में हैं.
चंद्रबाबू एनडीए सरकार का समर्थन कर चुके हैं और इस समय वो तीसरे मोर्चे के साथ हैं.
प्रेक्षकों का कहना है कि चंद्रबाबू दुविधा में हैं कि वो एनडीए के साथ जाएँ या फिर तीसरे मोर्च के साथ रहें.
हालांकि तेलुगू देशम पार्टी के नेता येरेन नायडू का कहना है कि पार्टी तीसरे मोर्चे में ही रहेगी.
मुलायम पड़े कड़े
चौथे मोर्चे के नेता माने जानेवाले मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान को भी अपनी अहमियत पता चल गई है.
तीनों नेताओं ने हाथ मिला लिया है और मिलकर बातचीत करने की घोषणा की है.
ये तीनों नेता एक ज़माने में जनता दल के मुख्य स्तंभ रह चुके हैं.
मुलायम सिंह ने तो एक मौक़े पर केंद्र सरकार को समर्थन के सवाल पर उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार को बर्ख़ास्तगी की शर्त लगा दी थी.