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सोमवार, 11 मई, 2009 को 04:09 GMT तक के समाचार

नितिन श्रीवास्तव
बीबीसी संवाददाता, देहरादून से

'केंद्र सरकार का व्यवहार सौतेला रहा है'

उत्तराखंड राज्य में इस वक़्त भाजपा की सरकार जिसके मुख्यमंत्री हैं रिटायर्ड मेजर जनरल भुवन चन्द्र खंडूरी.

खंडूरी के लिए इन पांच सीटों पर हो रहे चुनाव प्रतिष्ठा के प्रश्न बने हुए है जिसके कारण वो पूरे प्रदेश में चुनाव प्रचार की कमान अपने हाथों में लिए घूम रहे हैं.

बीसी खंडूरी से हुई ख़ास बातचीत के अंश.

क्या भारतीय जनता पार्टी सरकार की उपलब्धियों पर वोट मांग रही है?

जी हाँ बिलकुल. क्योंकि जो तीन मुख्य मुद्दे हैं वो है शासन, विकास और पारदर्शिता.

और इन्ही तीन चीजों को ध्यान में रख कर हम लोगों के पास जा रहे हैं. हमने लोगों से कहा है कि आपके पास तो देश की दो बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों का लेखा जोखा है, एक है भाजपा का गठबंधन और दूसरा है कांग्रेस का.

और हम लोगों से कह रहे हैं कि केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार और मनमोहन सिंह सरकार में भी आप तुलना कर के देख ले. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

केंद्र के इस सौतेले व्यवहार का मुद्दा आजकल गर्माया हुआ है. हाल ही में सोनिया गाँधी ने आरोप लगाया की केंद्र से पैसा भेजा जाता है और खंडूरी के नेतृत्ववाली भाजपा सरकार विकास के लिए खर्च नहीं करती. आखिर सच क्या है?

बिल्कुल, हम इसको लोगों तक ले के जा रहे हैं. आखिर अटल बिहारी वाजपेयी की ही सरकार थी जिसने उत्तराखंड बनाया.

उन्हीं की सरकार ने इस राज्य को ख़ास पैकेज दिए जबकि इस सरकार ने सत्ता में आते ही उसको घटा दिया. इससे बड़ा सौतेला व्यवहार और दुश्मनी या खुंदक निकलना और क्या हो सकता है. तो ये जो दोष है ये केंद्र का है न कि हमारा.

सोनिया जी कहती है कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी है. तो जब एम्स बनने की बात थी तो क्यों नहीं पहल की. ऐसे ही नारायण दत्त तिवारी ने खाद्यान्न के कोटे कम कर दिए.

चूँकि आपने तिवारी जी का ज़िक्र किया तो मुझे याद आ रहा कि कहा जाता है कि तिवारीजी के समय में प्रदेश का विकास हो रहा था, पूंजीनिवेश हो रहा था, पर पिछले दो साल में आपकी सरकार में ये प्रक्रिया धीमी पड़ गई?

पहली बात तो इस मसले के जो सही आंकडे हैं वो मैंने विधानसभा में दे दिए थे और ये आंकड़ों पर आधारित नहीं है.

ये सब एक दुष्प्रचार चल रहा है, जबकि जो आंकडे मैंने दिए है उनके हिसाब से मेरे समय में पूंजीनिवेश ज्यादा हुआ है. एक तरफ तो ये कांग्रेसी पानी वाले नल में नलका बंद कर देते हैं फिर कहते हैं कि निवेश नहीं हो रहा. क्या है ये सब!

खंडूरी जी प्रदेश में घूमते हुए लोगों से बात भी हुई. ऐसा आभास होता है कि प्रदेश में एक सत्ता विरोधी लहर है जो कहीं न कहीं भाजपा को इन आम चुनावों में नुक़सान पहुँचा सकती है. इसमें कितनी सच्चाई है?

ये बिलकुल ही कांग्रेस द्वारा चलाया गया एक दुष्प्रचार है. मुझे नहीं मालूम की आपको ये अनुभव कहाँ हुआ है! जबकि आम जनता हमसे इतनी ज्यादा खुश है क्योंकि हमने दो साल ही में जन हित के लिए इतनी सारी चीज़ें कर दी हैं कि किसी ने नहीं कीं.

आपके पास समय होता तो मैं गिनाता हमने क्या किया है. पहले हर चीज़ में घूस चलती थी, नौकरी के लिए घूस मांगी जाती थी, हमने ये सब बंद करवा दिया है. मजाल है कि आज इस राज्य में कोई पैसे दे कर काम करने की बात करे. आपके बारे में तो नहीं पता लेकिन मेरा फीडबैक यही है कि आम जनता काफ़ी खुश है.

और उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी में चल रहे आतंरिक कलह या मतभेदों पर आप क्या कहना चाहेंगे?

एक ट्रेंड बन गया है कि देश की पार्टियों में चाहे वो बड़ी हों या छोटी थोडी बहुत अंतर्कलह होता रहता है. ऐसी छोटी चीज़ें होती रहती हैं, मैं मानता हूँ, लेकिन हमारी पार्टी में नेतृत्व इससे निपटने का एक माध्यम है और हम इससे उबर जाते हैं.