सोमवार, 04 मई, 2009 को 14:10 GMT तक के समाचार
सुशील झा
बीबीसी संवाददाता, आंध्र प्रदेश से
आंध्र प्रदेश की राजनीति में पहली बार उतरे तेलुगू सुपरस्टार चिरंजीवी का कहना है कि चाहे राजनीति में जो हो वो वापस फ़िल्मों की दुनिया में नहीं जाएँगे.
चिरंजीवी अपने 30 वर्ष के फ़िल्मी करियर में 149 फ़िल्में कर चुके हैं लेकिन वो 150 का आँकड़ा बनाने के भी इच्छुक नहीं है.
वो कहते हैं, "मेरे परिवार के लोग भी यही सवाल करते हैं कि क्या आप एक फ़िल्म और नहीं कर सकते. मैं दो नावों की सवारी नहीं करता. अब चाहे जो हो मुझे राजनीति में ही रहना है और काम करना है."
अपनी जीत के प्रति आश्वस्त दिखते चिरंजीवी बार-बार कहते हैं कि वो ग़रीबों के लिए काम करेंगे लेकिन ग़रीबों के लिए योजनाओं के बारे में उनका दृष्टिकोण बहुत साफ़ नहीं दिखता.
उनके जवाब रटे रटाए से होते हैं मानो वो फ़िल्मों के डॉयलॉग बोल रहे हों.
तमिल फ़िल्मों के मेगास्टार और बाद में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) से वो प्रेरित हैं और साथ ही कहते हैं कि राजनीति में आने की प्रेरणा उन्हें पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मिली है.
लेकिन ये कब हुआ. वो बताते हैं, "मैं राजनीति के बारे में सोचता तो पहले से था लेकिन फ़ैसला नहीं ले पा रहा था. जब कलाम से मुलाक़ात हुई तो उन्होंने कहा कि आज का युवा वर्ग राजनीति में नहीं आना चाहता है. तुम्हारे जैसे लोगों को राजनीति में आना चाहिए तभी युवाओं की रुचि राजनीति में होगी."
राजनीति में युवा
तो क्या युवा वर्ग उन्हें पसंद कर रहा है?
चिरंजीवी मतदान के आँकड़े गिनाते हुए कहते हैं, "इस बार आंध्र प्रदेश में 72 प्रतिशत मतदान हुआ है. ऐसा पहले नहीं हुआ कभी भी. महिलाओं और युवाओं ने मतदान में अधिक हिस्सा लिया है और कह सकता हूं कि इस वर्ग ने मुझे वोट दिया है."
चिरंजीवी की प्रजा राज्यम पार्टी के बारे में कहा जा रहा है कि आंध्र प्रदेश के चुनावों में उसे भले ही बहुमत न मिले, लेकिन सरकार के गठन में वो निर्णायक हो सकती है.
आंध्र प्रदेश की राजनीति में चिरंजीवी एमजी रामचंद्रन की तरह सफल साबित होंगे या नहीं ये 16 मई के परिणामों के बाद पता चलेगा लेकिन इतना तय है कि फ़िलहाल चिरंजीवी ने राजनीति के लिए फ़िल्मी दुनिया को अलविदा कह दिया है.