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रविवार, 03 मई, 2009 को 23:53 GMT तक के समाचार

आशुतोष चतुर्वेदी
बीबीसी संवाददाता, मेरठ से

हाईकोर्ट पीठ का मुद्दा किसी के एजेंडे में नहीं

कुछ समय पहले तक मेरठ में उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट की बेंच का मामला पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ज्वलंत मुद्दा था.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न ज़िलों के वकीलों ने जोरदार ढंग से बेंच की मांग उठाई थी और उसको लेकर उग्र प्रदर्शन भी हुए थे.

इसको लेकर व्यापक आंदोलन चला और कई बार हफ़्तों तक अनेक इलाक़ों में बंद रखा गया.

इस सबमें मेरठ सबसे आगे था लेकिन दिलचस्प तथ्य ये है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों से जुड़ा ये मसला इस बार किसी भी राजनीतिक दल के एजेंडे में नहीं है.

मेरठ लोक सभा चुनावों में इस मुद्दे का कोई पार्टी ज़िक्र तक नहीं कर रही है.

जबकि इसको लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 18 ज़िलों में चक्का जाम हुआ था.

'सभी दल ज़िम्मेदार'

मेरठ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल बख्शी इस आंदोलन का नेतृत्व कर चुके हैं. वो इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को ज़िम्मेदार ठहराते हैं.

उनका कहना है कि राजनीतिज्ञ मान रहे हैं कि ये मुद्दा वोट में नहीं तब्दील हो सकता इसलिए वो इसे नहीं उठा रहे हैं.

अनिल बख्शी का कहना है कि ये बुनियादी मुद्दा है और न्याय व्यवस्था से जुड़ा है.

अखिल भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय महामंत्री गोपाल अग्रवाल कहते हैं कि राजनीतिक दल जो वास्तविक मुद्दे हैं, उन्हें छोड़कर संप्रदाय और जाति के नाम पर वोट माँग रहे हैं.

वो कहते हैं कि ये लोकतंत्र का दुर्भाग्य है क्योंकि जनता त्रस्त है लेकिन उससे जुड़े मुद्दे नहीं उठाए जा रहे हैं.

गोपाल अग्रवाल का कहना है कि पहले तो कहा जाता था कि अदालत जितनी दूर रहे उतना अच्छा, लेकिन अब मानवाधिकार संबंधी मामलों में इनकी अहम भूमिका है.