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शुक्रवार, 01 मई, 2009 को 00:19 GMT तक के समाचार

आशुतोष चतुर्वेदी
बीबीसी संवाददाता, मथुरा से

'भाजपा-आरएलडी गठबंधन आगे है'

मथुरा लोकसभा चुनाव क्षेत्र से इस बार चौधरी चरण सिंह के पौत्र और अजित सिंह के पुत्र जयंत चौधरी चुनाव मैदान में हैं.

वो राष्ट्रीय लोक दल और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी हैं. विदेश में शिक्षित जयंत चौधरी पहली बार कोई चुनाव लड़ रहे हैं.

उनसे हुई लंबी बातचीत के अंश...

आपका ये पहला चुनाव है, कैसा महसूस कर रहे हैं?

मैं पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी सक्रिय था और मैंने उत्तर प्रदेश और देश का व्यापक दौरा किया था और वास्तविकताओं को जाना, उसके बाद चुनाव में उतरने का फ़ैसला किया.

वैसे मैं बचपन से ही राजनीति में सक्रिय रहा हूँ और बड़ी उम्मीदों के साथ जनता के बीच आया हूँ. मुझे जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है और कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है.

आपने विदेश में शिक्षा पाई है और अब किसानों और जाटों की राजनीति करने में कैसा लग रहा है?

चौधरी साहब (चरण सिंह) ने ग़रीबों के लिए काम किया, किसी बिरादरी विशेष के लिए काम नहीं किया, मैं उनके काम को आगे बढ़ाना चाहता हूँ.

साथ ही मैं मानता हूँ कि स्वच्छ विचारों को आगे बढ़ाने का वक्त आ गया है.

आप किन मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ रहे हैं?

मै मथुरा को तीर्थस्थल घोषित करवाना चाहता हूँ. यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं और यमुना मथुरा की संस्कृति का अहम हिस्सा है, मैं उसके प्रदूषण के मुद्दे को उठा रहा हूँ. साथ ही ग्रामीण और शहरी इलाक़े में पेयजल का भारी संकट है और ताज की वजह से विकास रुक गया है, अगर मुझे मौक़ा मिला तो संसद में इन मुद्दों को उठाऊंगा.

आप चौधरी चरण सिंह के परिवार के तीसरी पीढ़ी के नेता हैं, आपके आदर्श कौन हैं?

देश में कई बड़े नेता हुए हैं. लेकिन चौधरी साहब में सादगी और उनकी सोच में सरलता थी. आज के परिवेश में ये बहुत बड़ी बात लगती है. मैं कोशिश इस परिवेश में अपने आपको ढालने की कोशिश कर रहा हूँ.

आपका मुक़ाबला किससे है, कांग्रेस के मौजूदा सांसद मानवेंद्र सिंह या फिर छह बार के विधायक बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार श्यामसुंदर शर्मा से?

बहुजन समाज पार्टी को हराने के लिए भाजपा और आरएलडी का गठबंधन एक साथ आया है और ये गठजोड़ मथुरा में भी आगे है.

कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह आपकी दादी गायत्री देवी और बुआ ज्ञानवतीजी को हरा चुके हैं, ऐसे में आप जीत का दावा किस आधार पर कर सकते हैं?

वो दौर अलग था, वो परिस्थितियाँ अलग थीं और 16 मई को जब परिणाम आएँगे तो स्थितियाँ स्पष्ट हो जाएँगीं.