बुधवार, 22 अप्रैल, 2009 को 19:07 GMT तक के समाचार
संजीव श्रीवास्तव
भारत संपादक, बीबीसी हिंदी
अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस के प्रचार का मुख्य ज़िम्मा उठाए प्रियंका गांधी ने राजनीति में आने से स्पष्ट शब्दों में इनकार करते हुए कहा है कि लोग समझ नहीं पाते कि वह राजनीति में क्यों नहीं आना चाहतीं.
उनका कहना था कि वह अपने बच्चों के साथ ख़ुश हैं और उनका कभी भी राजनीति में आने का इरादा नहीं है.
प्रियंका ने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने राजनीति में आने को लेकर कभी हाँ या कभी ना जैसी स्थिति रखी है. उनका कहना था, "कभी भी हाँ तो मैंने कहा ही नहीं. मैं 20 वर्षों से कह रही हूँ कि मैं राजनीति में नहीं आऊँगी. मैंने अपनी बात कभी नहीं बदली है."
ये पूछे जाने पर कि वह कांग्रेस का प्रचार सिर्फ़ दो ही चुनाव क्षेत्रों- अमेठी और रायबरेली तक क्यों सीमित रखती हैं, उन्होंने कहा, "अगर मैं राजनीति में आना चाहती तब मैं लोगों की आशाएँ बढ़ाती, देश भर में घूमती और ये सही रहता लेकिन मैं अगर नहीं आना चाहती तो मैं लोगों को गुमराह भी नहीं करना चाहती."
प्रियंका ने कहा कि वह अपने मौजूदा जीवन से बहुत ख़ुश हैं. उनका कहना था, "जो जीवन मैं जी रही हूँ मैं उससे बहुत ही संतुष्ट हूँ और माँ बनकर बहुत ही ख़ुश हूँ."
प्रियंका ने कहा, "लोग बार-बार राजनीति में आने को लेकर पूछते हैं वो समझ नहीं पाते कि मैं क्यों नहीं आना चाहती मगर मैं नहीं आना चाहती और मैं अपने बच्चों के साथ घर पर बहुत ही ख़ुश हूँ."
श्रीलंका का संघर्ष
श्रीलंका के उत्तरी हिस्से में जारी संघर्ष पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और भारत के रवैये पर प्रियंका ने कहा कि भारत को संघर्ष में फँसे लोगों की मदद के लिए जो हो सके वो करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष की वजह से ही एक तरह से उनको भी पीड़ा मिली और वह संघर्ष को अच्छी तरह समझती हैं और उनकी व्यक्तिगत राय है कि संघर्ष में फँसे लोगों की मदद करना भारत की ज़िम्मेदारी है.
तमिल विद्रोही संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम यानी एलटीटीई और श्रीलंका के आम तमिल नागरिकों के अंतर पर उन्होंने अँगरेज़ी की एक कहावत का उल्लेख किया जिसका अर्थ था-'आपका मक़सद आपको आतंकवादी नहीं बनाता, आपका तरीक़ा आपको आतंकवादी बनाता है.'
प्रियंका का कहना था कि वह श्रीलंका के उस संघर्ष का मक़सद समझती हैं.
राष्ट्रीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका के बारे में प्रियंका का कहना था कि आज के समय में गठबंधन की राजनीति एक वास्तविकता है, जिससे कोई मुँह नहीं मोड़ सकता.
राजनीति और उसका स्वरूप
उन्होंने कहा कि सबकी अपनी जगह है और क्षेत्रीय दलों की भी अपनी जगह है. मगर साथ ही उन्होंने इस बारे में राष्ट्रीय दलों की सोच को सामने रखते हुए कहा, "ज़ाहिर है कांग्रेस या भाजपा जैसे जो बड़े राजनीतिक दल हैं वे चाहते हैं कि उनकी विचारधारा चले."
प्रियंका ने अमेठी और रायबरेली में प्रचार के दौरान लगातार लोगों से जागरूक होने की अपील करते हुए विकास को एक मुद्दा बनाने की कोशिश की है.
मगर राजनीति में जिस तरह पैसे का बोलबाला बढ़ा है और जातिगत राजनीति बढ़ी है उस पर प्रियंका का कहना था कि विकास के ज़रिए ही बात बन सकती है.
उनका कहना था, "विकास के साथ शिक्षा बढ़ेगी और लोगों में जागरूकता होगी. तभी परिवर्तन आएगा."
प्रियंका ने कहा कि भारतीयों को शिकायत करने की आदत है और इसीलिए वह कहती हैं कि शिकायत तो पाँच साल कर ली मगर अब जब मौक़ा मिला है तो सोच समझकर वोट डालिए.