गुरुवार, 16 अप्रैल, 2009 को 03:32 GMT तक के समाचार
भारतीय चुनाव आयोग के मुताबिक़ 15वीं लोकसभा के लिए हो रहे चुनाव के पहले चरण में 124 सीटों के लिए हुए मतदान में गुरुवार को क़रीब 50 फ़ीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.
मतदान की समय सीमा ख़त्म होने के बाद नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कांफ़्रेंस में उप चुनाव आयुक्त आर बालाकृष्णन ने बताया कि अभी जो आंकड़े मिले हैं, वे शुरूआती हैं.
पहले चरण में मतदान करने वाले लोगों की सही संख्या का पता गुरुवार देर रात या शुक्रवार सुबह तक ही चल पाएगा.
बालाकृष्णन ने बताया कि शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक सबसे कम मतदान 46 फ़ीसदी बिहार में और सबसे अधिक 86 फ़ीसदी लक्ष्यद्वीप में हुआ.
उप चुनाव आयुक्त ने बताया कि नक्सल प्रभावित इलाक़ों को छोड़कर अन्य हिस्सों में मतदान काफ़ी शांतिपूर्ण रहा.
झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार में हुए पहले चरण के मतदान में कई जगह हुई हिंसक घटनाओं में 19 लोग मारे गए.
झारखंड में हिंसा
बीबीसी संवाददाता सलमान रावी ने राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार के हवाले से बताया कि झारखंड में चुनावी हिंसा में 10 लोगों के मारे गए हैं. इनमें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ़) के छह जवान और दो आम लोग शामिल है.
राजीव कुमार ने बताया कि लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के विशुनपुरा और चतरा लोकसभा क्षेत्र के हाता मतदान केंद्र से आठ चुनावकर्मी लापता हैं.
पुलिस के अनुसार झारखंड के खुंटी लोकसभा क्षेत्र के रनिया इलाक़े में एक सुरक्षा कर्मी लापता है.
छत्तीसगढ़ का हाल
उधर, छत्तीसगढ़ के पुलिस उपमहानिरीक्षक पवन देव ने बताया कि राजनांदगांव ज़िले में माओवादियों ने चुनाव दल की एक गाड़ी को बारूदी सुरंग से उड़ा दिया. इसमें पांच सुरक्षाकर्मी मारे गए.
बीबीसी संवाददाता फ़ैसल मोहम्मद अली के अनुसार छत्तीसगढ़ में क़रीब 51 फ़ीसदी मतदान हुआ. राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर इलाक़ें से मिले शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक़ वहाँ 46 फ़ीसदी मतदान हुआ.
दंतेवाड़ा में माओवादी हमले में सीआरपीएफ़ का एक जवान मारा गया और छह घायल हो गए. दंतेवाड़ा में भी सीआरपीएफ़ के दो जवान मारे गए.
राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर इलाक़े से 14 ईवीएम के लूटे जाने और 20 से अधिक जगहों पर पुलिस के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ होने की ख़बर है.
बिहार के गया में हिंसा
बिहार से बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर ने बताया कि गया में बांकेपुर थाना क्षेत्र में माओवादियों ने हमला कर एक पुलिसकर्मी और एक होमगार्ड की हत्या कर दी.
मणिकांत ठाकुर ने बिहार पुलिस के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में बारूदी सुरंगरोधी 50 गाड़ियाँ लगाई थीं और निगरानी रकने के लिए हेलिकॉप्टरों की मदद ली गई.
लालू, जोशी, रेणुका का भाग्य ईवीएम में बंद
इस चरण में जिन बड़े नेताओं के भाग्य का फ़ैसला होना है उनमें राष्ट्रीय जनता दल नेता लालू प्रसाद यादव और भारतीय जनता पार्टी के मुरली मनोहर जोशी शामिल हैं.
तेलंगाना राष्ट्र समिति चंद्रशेकर राव, कांग्रेस की रेणुका चौधरी, अभिनेत्री विजयाशांति, एनटीआर की पुत्री डी पुरंदेश्वरी और पूर्व केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय के नाम भी उन नेताओं की सूची में शामिल हैं जिनके चुनाव क्षेत्रों में इसी चरण में मतदान हुआ है.
पहले चरण में केरल की सभी 20 सीटों, छत्तीसगढ़ की 11 और मेघालय तथा अरुणाचल की दो-दो सीटों के लिए मतदान हुआ.
बिहार की 40 में से 13, उत्तर प्रदेश की 80 में से 16, महाराष्ट्र की 48 में से 13, आंध्र प्रदेश की 42 में से 22, झारखंड की 14 में से छह और उड़ीसा की 21 में से 10 सीटों के लिए भी मतदान हुआ.
पूर्वोत्तर में असम की 14 में से तीन और मणिपुर की दो में से एक सीट के लिए वोट डाले गए. भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की छह में से एक सीट के लिए भी मतदान हुआ. पहले चरण में अंडमान निकोबार, लक्षद्वीप, मिजोरम और नगालैंड की एक-एक लोकसभा सीट के लिए भी वोट डाले गए.
गुरुवार को ही आंध्र प्रदेश और उड़ीसा में विधानसभा चुनावों के लिए भी मतदान हुआ. आंध्र प्रदेश की 294 में से 154 विधानसभा सीटों और उड़ीसा की 147 में से 70 विधानसभा सीटों के लिए पहले चरण में वोट डाले गए.
बीबीसी संवाददाता उमर फ़ारूक़ के अनुसार चुनाव के समाप्त हो जाने के बाद भी कई मतदान केंद्रों पर लंबी-लंबी क़तारें देखी गई.
उत्तर प्रदेश
बीबीसी संवाददाता पाणिनी आनंद ने बनारस के ज़िलाधिकारी और चुनाव अधिकारी एके उपाध्याय के हवाले से बताया कि बनारस संसदीय सीट और ज़िले में मतदान शांतिपूर्ण तरीक़े से संपन्न हो गया.
ज़िलाधिकारी के मुताबिक़ किसी भी इलाक़े से किसी तरह के अप्रिय घटना की ख़बर नहीं मिली है. हालांकि सुबह मतदान शुरू होने के बाद कुछ स्थानों पर वोटिंग मशीनों में ख़राबी की शिकायत मिली थी जिन्हें तत्काल दुरुस्त कर दिया गया.
एके उपाध्याय ने बीबीसी को बताया कि बनारस संसदीय सीट के बाहर लेकिन ज़िले के ही पिंडारा विधानसभा क्षेत्र के खतौरा गांव में लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया था. ऐसा उन्होंने जन प्रतिनिधियों से असंतुष्ट होने के कारण किया न कि किसी दबाव में.
आंध्र प्रदेश और उड़ीसा में नक्सलवादियों के प्रभाव को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे.