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शनिवार, 11 अप्रैल, 2009 को 13:09 GMT तक के समाचार

फ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, रायपुर से

विकास है प्रमुख मुद्दा: रमनसिंह

'चावल बाबा' के नाम से मशहूर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह अपनी साफ-सुथरी छवि और योजनाओं की वजह से राज्य में काफ़ी लोकप्रिय हैं.

रमन सिंह ने चुनाव के मुद्दों पर बेबाक बातचीत की.

क्या इस बार भी छत्तीसगढ़ का मुद्दा चावल पर ही आधारित रहने वाला है ?

छत्तीसगढ़ में चावल अहम मुद्दा रहा है और इसका असर कुछ हद तक विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिला है, लेकिन छत्तीसगढ़ में चावल ही अकेला मुद्दा है, ऐसा नहीं है.

हमने किसानों के लिए अनेक योजनाएँ बनाई हैं. धान के लिए आठ सौ करोड़ रुपये का बोनस दिया है. एक लाख 70 हज़ार पंपों के निशुल्क कनेक्शन देने की बात कही है. ब्याजमुक्त कर्ज़ देने की बात कही है.

उपलब्धि

इसके अलावा दो लाख से ज़्यादा कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग का लाभ दिया, 25 हज़ार दैनिक वेतनभोगियों को नियमित किया, 80 हज़ार शिक्षाकर्मियों और 22 हज़ार पुलिसकर्मियों की नई नियुक्तियाँ हुईं.

जहाँ देश के दूसरे राज्यों में बिजली के लिए हाहाकार है और कटौती हो रही है. हम अप्रैल के महीने में बिना कटौती बिजली दे रहे हैं.

केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए के पाँच साल के शासन की असफलता और छत्तीसगढ़ की उपेक्षा बड़ा मुद्दा हैं. छत्तीसगढ़ को दूसरे दर्जे के राज्य की श्रेणी में रखा गया. फिर चाहे धमतरी-रायपुर, दिल्ली-राजहरा-रावघाट नैरोगेज को ब्रॉडगेज में बदलने की बात हो या फिर एम्स के निर्माण का मसला.

कह सकते हैं कि आपके चुनाव प्रचार का मुख्य मुद्दा विकास ही है ?

शत प्रतिशत, हम विकास को ही चुनाव का मुद्दा बना रहे हैं. विधानसभा में भी हम विकास के मुद्दे पर जनता के बीच गए थे और लोकसभा में भी मेरा पूरा चुनाव अभियान इसी पर आधारित है.

आप तो विकास की बात करते हैं, लेकिन आपकी पार्टी के जूदेव जैसे नेता राम मंदिर, मस्जिद आदि धार्मिक मुद्दों की बात करते हैं. क्या ये भाजपा की रणनीति है कि आप विकास की बात करें और दूसरे धार्मिक मुद्दों की. और दोनों को मिलाकर जीत की खिचड़ी पकाई जाए ?

अपने घोषणापत्र में हमने राम मंदिर के निर्माण की बात कही है. रामसेतु की बात को भी भाजपा के घोषणापत्र में शामिल किया गया है. यह मुद्दे जनसंघ से लेकर भाजपा तक हमसे जुड़े रहे हैं और आगे भी जुड़े रहेंगे.

रही बात जूदेव जी की तो वे केंद्र द्वारा छत्तीसगढ़ की उपेक्षा की बात भी काफ़ी दमदारी से उठाते हैं. वे इस देश में धर्मांतरण के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात रखने वाले सांसद हैं और हम विकास के साथ इन मुद्दों को भी लेते हैं तो मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई बुराई है.

आप आडवाणी जी की प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी की बात कर रहे हैं, लेकिन चुनाव प्रचार सामग्री में आडवाणी जी बहुत कम दिख रहे हैं. कई जगह विरोध की बात चल रही है ?

हमारे प्रचार का पूरा तंत्र आडवाणी जी से ही जुड़ा हुआ है. कोई पेपर, कोई फ़ोटो, कोई पंपलेट, कोई विज्ञापन उनके बिना नही है. आडवाणी जी एनडीए के नेता हैं और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं. उनके लिए ही हम इस पूरे चुनाव अभियान में लगे हैं.

एनडीए के शासन में आडवाणी जी ने उप प्रधानमंत्री रहते हुए छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जिससे उनकी राज्य में विशेष छवि बनी है.

मनमोहन सरकार के कार्यकाल के बाद हर किसी को इस बात का अहसास हो रहा है कि देश को प्रधानमंत्री के तौर पर मज़बूत और निर्णायक व्यक्ति की ज़रूरत है.