BBC HINDI: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए

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नमस्ते.
उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे, खुश होंगे.
हम जानते हैं कि रोज़मर्रा की आपा-धापी के बीच आपके लिए देश-दुनिया की हर ख़बर पर नज़र रखना मुश्किल होता होगा.
ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें, जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.
ये पाँच ख़बरें आपने पढ़ लीं तो ये समझिए कि आप पूरी तरह से अपडेटेड हो गए.
ओडिशा ट्रेन हादसे की जाँच सीबीआई को क्यों दी गई?
ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है.
वही सीबीआई, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 'पिंजरे में बंद तोता' कहा था.
सीबीआई पर पहले भी राजनीतिक मशीनरी बनने के आरोप लगते रहे हैं.
आज भी विपक्षी दल सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाते हैं.
दूसरी तरफ़ रेलवे में होने वाले हादसों की जांच आमतौर पर कमिश्नर ऑफ़ रेलवे सेफ़्टी करते हैं.
कई बार सीआरएस के अलावा हादसों की जांच रेलवे की अपनी टीम भी करती है.
दरअसल, रेलवे की तकनीकी और विस्तृत जानकारी रेल विभाग के लोगों को ही होती है, इसलिए इस तरह की जांच को ज़रूरी माना जाता है.
सीआरएस मूल रूप से रेलवे के ही अधिकारी होते हैं और उन्हें डेप्युटेशन पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन रखा जाता है.
बताया जाता है कि हादसे की निष्पक्ष जांच के लिए मामला सीआएस को सौंपा जाता है.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को कहा था कि ओडिशा हादसे की जड़ में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में समस्या और ट्रैक के एक हिस्से में ऑपरेशनल सिग्नल सिस्टम में समस्या सामने आई है.
इसके साथ ही यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया. पूरी कहानी यहां पढ़ें.
अपनी कलम से विकलांगों के सपने पूरे करने वाली पुष्पा

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साल 2007 में दक्षिण भारत के भीड़-भाड़ वाले शहर बेंगलुरु की एक व्यस्त सड़क पर एक दृष्टिबाधित व्यक्ति ने पुष्पा से सड़क पार करने में मदद करने के लिए कहा. जैसे ही दोनों ने सड़क पार की तब दृष्टिबाधित व्यक्ति ने एक और गुजारिश की, जिसकी वजह से पुष्पा की ज़िंदगी बदली दी.
पुष्पा याद करते हुए कहती हैं, "उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं उनके दोस्त के लिए एक परीक्षा लिख सकती हूं."
पुष्पा ने इस गुज़ारिश पर हामी भर दी लेकिन परीक्षा का दिन नज़दीक आते ही पुष्पा का उत्साह घबराहट में बदल गया.
उन्होंने कभी किसी दूसरे के लिए परीक्षा नहीं लिखी थी और उन्हें इस बारे में कोई जानकारी भी नहीं थी.
भारत में शारीरिक रूप से अक्षम कई छात्र परीक्षा लिखने के लिए सहायक की मदद लेते हैं. ऐसे छात्र अपने सहायक को उत्तर बताते हैं, फिर वही सहायक उनके बताए उत्तर को लिखते हैं.
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, परीक्षा लिखने वाले सहायक को किसी ऐसे विषय की परीक्षा देने की मंजूरी नहीं है जिसे उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर तक पढ़ा हो.
पुष्पा इस काम को मुफ़्त में करती हैं. पूरी कहानी यहां पढ़ें.
ये सात चीज़ें खाते हैं तो हो जाइए सावधान

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हाल ही में आंध्र प्रदेश में एक प्राइवेट कॉलेज की 26 लड़कियों को उल्टी आने, सिर दर्द और चक्कर आने की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.
ये कॉलेज अनंतपुरम ज़िले के बुक्कारायसमुद्रम में है.
इन छात्राओं ने बीमार होने से पहले वाली रात में कॉलेज के हॉस्टल में खाना खाया था, जिसके बाद उन्हें फूड पॉयज़निंग हो गई थी.
इससे पहले आंध्र प्रदेश के ही श्रीकाकुलम ज़िले के टेक्कली में भी 29 छात्राओं को फूड पॉयज़निंग की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.
ये सभी लड़कियां पिछड़े वर्ग की छात्राओं के लिए बने हॉस्टल में रह रही थीं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक़, पूरी दुनिया में हर साल औसतन 16 लाख लोग फूड पॉयज़निंग का शिकार होते हैं, या ख़राब खाना खाकर बीमार पड़ते हैं.
और, दुनिया भर में प्रदूषित खाने से हर दिन औसतन 340 बच्चों की जान चली जाती है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन, हर साल 7 जून को 'खाद्य सुरक्षा दिवस' यानी वर्ल्ड फ़ूड सेफ़्टी डे के रूप में मनाता है.
आइए खाने पीने की उन चीज़ों के बारे में जानते हैं, जिनसे फ़ूड पॉयज़निंग हो सकती है और, हम इनसे कैसे बच सकते हैं. पूरी कहानी यहां पढ़ें.
अश्विन को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में मौक़ा न देना क्या भूल है?

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ऐसे बहुत कम मौक़े ऐसे होते हैं, जब क्रिकेट के दिग्गज पंडित और आम क्रिकेट फ़ैन टीम इंडिया के किसी एक फ़ैसले को लेकर पूरी तरह से सहमत होते हैं.
अश्विन को प्लेइंग इलेवन में शामिल न करने का फ़ैसला कुछ ऐसा ही है. सभी इस बात पर सहमत हैं कि उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जाना चाहिए था.
रिकी पोंटिंग से लेकर नासिर हुसैन जैसे जाने-माने पूर्व क्रिकेट कप्तानों ने इस फ़ैसले पर हैरानी जताई तो संजय मांजरेकर भी हतप्रभ दिखे. पूरी कहानी यहां पढ़ें.
'आगरा' फ़िल्म में ऐसा क्या जो आपको झकझोर कर रख देगा?

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25 मई को कान फिल्म फेस्टिवल में निर्देशक कनु बहल की फिल्म आगरा को डायरेक्टर्स फोर्टनाइट वाले सेक्शन में दिखाया गया था. इस फिल्म में भारत के मर्दों की दबी कुचली आकांक्षाओं और कुंठाओं को झकझोर देने वाली बेबाक़ी के साथ पेश किया गया है.
आगरा, भारतीय सिनेमा की बंदिशें तोड़ने वाली वैकल्पिक फिल्मों के सिलसिले की ताज़ा कड़ी है, जिसकी शायद ही कोई ख़ास चर्चा हो रही हो.
आगरा फिल्म में कॉल सेंटर के एक कर्मचारी गुरु की कहानी दिखाई गई है, जो दबी हुई इच्छाओं और कुंठाओं का मारा हुआ है. वो एक छोटे से घर में अपने मां-बाप और भाई-बहनों के साथ रहता है. पूरी कहानी यहां पढ़ें.
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