BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए

नमस्ते.
उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे, खुश होंगे.
हम जानते हैं कि रोज़मर्रा की आपा-धापी के बीच आपके लिए देश-दुनिया की हर ख़बर पर नज़र रखना मुश्किल होता होगा.
ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें, जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.
ये पाँच ख़बरें आपने पढ़ लीं तो ये समझिए कि आप पूरी तरह से अपडेटेड हो गए.
महिला के मालकिन बनने से बदलता माहौल
उषा, नूर और मान के घर उनके पति नहीं चलाते हैं. रूढ़िवादी परंपरा को कैसे बदल पा रही हैं ये औरतें और उनकी बढ़ती तादाद से कैसे बदल रहा है भारत?
"अब हम औरतों को भी सब हमारे नाम से जानते हैं."
जब उषा देवी ने मुझसे ये कहा तो पहले-पहल मैं इसकी अहमियत समझ नहीं पाई.
दरअसल, स्कूल में टीचर को हमेशा मिसेज़ भंडारी-मिसेज़ कंवर बुलाने का रिवाज़ रहा है.
घर में जब कभी कोई न्यौता आया तो उस पर भी घर के मुखिया के नाम के अलावा बाकी सब नाम, 'सपरिवार' में शामिल रहे हैं.
पड़ोस में रहने वाली आंटी को भी सब मिश्रा आंटी या अभिषेक की मम्मी ही बुलाते रहे हैं.
मिश्रा जी का नाम उनकी शादी के बाद नहीं बदला. और इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया कि उनका नाम अपने नाम के साथ जोड़ने में मिसेज़ मिश्रा को अपने मां-बाप से मिला उपनाम छोड़ना पड़ा, जिसका उन्हें मलाल भी हो सकता है. पूरी कहानी यहां पढ़ें.
मनोज बाजपेयी ने जिन पीसी सोलंकी का किरदार निभाया, वो क्यों हैं नाराज़?

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ओटीटी चैनल ज़ी फ़ाइव पर 23 मई को कथित तौर पर आसाराम केस से जुड़ी फ़िल्म 'एक बंदा काफ़ी है' रिलीज़ हुई.
फ़िल्म में अभिनेता मनोज बाजपेयी ने इस मामले से जुड़े वकील पीसी सोलंकी का किरदार निभाया है.
फ़िल्म को लेकर कई विवाद भी सामने आए हैं और ख़ुद पीसी सोलंकी इस मामले को लेकर कोर्ट पहुंच गए हैं.
पेशे से वकील पीसी सोलंकी राजस्थान के जोधपुर शहर के उम्मेद चौक के पास तंग गलियों में रहते हैं.
मनोज बाजपेयी की मुख्य भूमिका वाली फ़िल्म का ज़्यादातर हिस्सा अदालती कार्यवाही पर केंद्रित है. जिसमें अभियुक्त का किरदार आसाराम बापू से मिलता जुलता है.
फ़िल्म में अभियुक्त के ख़िलाफ़ लगे दुष्कर्म के आरोपों को लेकर अदालती सुनवाई और गवाहों की कथित तौर पर हत्या से लेकर केस कमज़ोर करने के लिए दिए गए प्रलोभनों और धमकियों के बारे में दिखाया गया है. पूरी कहानी यहां पढ़ें.
नए संसद भवन की ज़रूरत क्यों पड़ी और आख़िर क्या ख़ास है इसमें?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 28 मई को संसद के नए भवन का उद्घाटन किया.
कांग्रेस समेत 19 विपक्षी पार्टियों ने नई संसद के उद्घाटन समारोह का बायकॉट करने का फैसला किया है. उनका कहना है कि इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जगह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों से होना चाहिए.
नए संसद भवन पर हो रही राजनीति से अलग कुछ ऐसे सवाल भी हैं जिनके जवाब सोशल मीडिया से लेकर गूगल तक पर खोजे जा रहे हैं.
नई संसद कैसी दिखाई देगी, आख़िर इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी, इसे किसने बनाया और अब क्या पुरानी संसद को तोड़ दिया जाएगा? पूरी कहानी यहां पढ़ें.
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से मानव सभ्यता के अंत का ख़तरा

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'आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से इंसानी वजूद को ख़तरा हो सकता है.' कई विशेषज्ञों ने इसे लेकर आगाह किया है. ऐसी चेतावनी देने वालों में ओपनएआई और गूगल डीपमाइंड के प्रमुख शामिल हैं.
इसे लेकर जारी बयान 'सेंटर फ़ॉर एआई सेफ़्टी' के वेबपेज़ पर छपा है. कई विशेषज्ञों ने इस बयान के साथ अपनी सहमति जाहिर की है.
विशेषज्ञों ने चेतावनी देते हुए कहा है, "समाज को प्रभावित कर सकने वाले दूसरे ख़तरों, मसलन महामारी और परमाणु युद्ध के साथ साथ एआई (आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस) की वजह से वजूद पर मौजूद ख़तरे को कम करना वैश्विक प्राथमिकता होनी चाहिए."
लेकिन कई लोगों की राय है कि इसके डर को बढ़ा चढ़ाकर बताया जा रहा है. पूरी कहानी यहां पढ़ें.
आबादी में चीन पिछड़ा, भारत क्या ग्लोबल सुपर पावर भी बनेगा?

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संयुक्त राष्ट्र के अनुसार चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत पृथ्वी का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है.
अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या वो एक वैश्विक सुपर पावर के तौर पर अपने ताक़तवर पड़ोसी की बराबरी या उसे पीछे भी छोड़ सकता है?
अर्थव्यवस्था के आकार, भूराजनैतिक दबदबे और सैन्य ताक़त के मामले में बीजिंग अभी बहुत आगे है. लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि यह तस्वीर बदल रही है.
अर्थशास्त्र में 2001 के नोबल पुरस्कार विजेता माइकल स्पेंस का मानना है कि भारत का वक़्त आ चुका है. पूरी कहानी पढ़ें.
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