BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें जो शायद आप मिस कर गए

डिजिटल पेमेंट

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नमस्ते, उम्मीद है कि आप अच्छे होंगे.

हमें मालूम है कि घर का काम, बाहर का काम करते हुए आपको ख़बरों पर नज़र रखने का वक़्त नहीं मिला होगा.

इस वजह से आप देश दुनिया की अहम ख़बरों को देख या पढ़ नहीं पाए होंगे.

इसी के चलते हम लाए हैं आपके लिए कुछ अहम ख़बरें. शायद इन ख़बरों में से कुछ पर आपकी नज़र नहीं गई होगी.

अगर आपने ये पांच ख़बरें पढ़ लीं तो समझिए कि आपको बीते हफ़्ते की ख़ास खबरें पता चल गईं.

भारत के डिजिटल पेमेंट का बज रहा है डंका, चीन भी पीछे

इन दिनों ऑटो रिक्शा चालक, सब्ज़ी बेचने वाले और यहाँ तक कि कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने वाले मज़दूर भी डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं.

इसकी शुरुआत 2016 में हुई थी, लेकिन कुछ ही वर्षों में अब ये उसी तरह से व्यापक हो गया है जैसे आज मोबाइल फ़ोन है.

डिजिटल वॉलेट पेमेंट के क्षेत्र में भारत ने एक लंबी छलांग मारी है.

नीलेश शाह कोटक म्युचुअल फ़ंड के मैनेजिंग डायरेक्टर और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अंशकालिक सदस्य हैं.

वे कहते हैं कि भारत एक डिजिटल क्रांति का अनुभव कर रहा है.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "निस्संदेह यह एक डिजिटल क्रांति है और यह भारत के कोने-कोने में और समाज के हर वर्ग में पहुँच रहा है."

डिजिटल वॉलेट को ई-वॉलेट या मोबाइल वॉलेट के रूप में भी जाना जाता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यूनिफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) ने भारतीयों के लेन-देन के तरीक़े में क्रांति ला दी है और लोगों के लिए तुरंत पैसा भेजना और प्राप्त करना काफ़ी आसान बना दिया है. पूरी स्टोरी यहां पढ़िए...

डॉक्टर की सलाह के बिना विटामिन लेने से कितना फ़ायदा- नुकसान?

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डॉक्टर की सलाह के बिना विटामिन लेने से कितना फ़ायदा- नुक़सान?

शरीर में पोषक तत्वों की कमी पूरी करने के लिए न्यूट्रिशनल सप्लिमेंट लेना कोई नई बात नहीं है.

ये सप्लिमेंट बाज़ार में अनगिनत ब्रैंड के अलग-अलग रूपों- सिरप, गोलियां, एनर्जी बार, पेय पदार्थों या पाउडर की शक्ल में भी मिल जाएंगे, जो आपके शरीर में विटामिन, खनिज, कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने का दावा करते हैं.

हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि ये सप्लिमेंट संतुलित आहार की कमी को पूरा नहीं कर सकते हैं. उनका कहना है कि 30 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाओं में ऐसे सप्लिमेंट लेने का चलन बढ़ा है. डॉ सुनीला गर्ग बीबीसी से कहती है, "शाकाहारी लोगों के लिए मल्टीविटामिन ज़रूरी भी होते हैं, लेकिन 'वन साइज़ डज़ नॉट फिट ऑल' तो ऐसे में मरीज़ों को सप्लिमेंट स्वयं की बजाए डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए." पूरी स्टोरी यहां पढ़िए...

सऊदी अरब को अचानक भारत की राह क्यों अच्छी लगने लगी

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सऊदी अरब को अचानक भारत की राह क्यों अच्छी लगने लगी

यूएई के आर्टिफिशल इंटेलिजेंस मंत्री उमर सुल्तान ओलामा ने पिछले साल अक्टूबर में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की तारीफ़ करते हुए कहा था कि यूक्रेन संकट के दौरान उन्होंने भारत की विदेशी नीति को जिस तरह से आगे बढ़ाया, उससे वह काफ़ी प्रभावित हैं.

इसी साल मार्च में सऊदी अरब के रिसर्चर और राजनीतिक विश्लेषक सलमान अल-अंसारी ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की तारीफ़ करते हुए कहा था कि भारत ने पश्चिम के भारी दबाव के बावजूद अपने हितों से समझौता नहीं किया.

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भारत की विदेश नीति के लिए परीक्षा की घड़ी थी. लेकिन भारत ने मुश्किल वक़्त में नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति में ही समाधान देखा. ऐसे में जयशंकर की टिप्पणी चौंकाती नहीं है. लेकिन सऊदी अरब यूक्रेन संकट में एक तरह से अपनी पुरानी विदेश नीति से बाहर निकलता दिखा और उसे भी गुटनिरपेक्षता में ही समाधान नज़र आया.

शीत युद्ध में भारत न सोवियत संघ के साथ था और न ही अमेरिकी खेमे में लेकिन सऊदी अरब कम्युनिस्ट विरोधी खेमे में था. सऊदी अरब पर्सियन गल्फ़ में अमेरिका के नेतृत्व वाले क्षेत्रीय सिक्यॉरिटी नेटवर्क में शामिल था. पूरी स्टोरी यहां पढ़िए...

आईपीएल में क्या कारगर साबित हो रहे हैं इम्पैक्ट प्लेयर्स?

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आईपीएल में क्या कारगर साबित हो रहे हैं इम्पैक्ट प्लेयर्स?

आईपीएल के 16वें संस्करण में इम्पैक्ट प्लेयर का नियम लागू हुआ. टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही इस नियम के बारे में काफ़ी चर्चा थी.

क्रिकेट के मूल स्वरूप के तहत 11 खिलाड़ी खेलते हैं, लेकिन इम्पैक्ट प्लेयर नियम के साथ टीमों को 12 खिलाड़ियों के बारे मे सोच कर रणनीति बनानी पड़ती है.

इम्पैक्ट प्लेयर का मक़सद खेल को और रोचक बनाने का है. मैच के दौरान तेज़ गेंदबाजों के चोटिल होने का ख़तरा रहता है.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में एक के पीछे एक सिरीज़ रहती है. ऐसे में हर बोर्ड अपने खिलाड़ियों के साथ वर्कलोड मॅनेजमेंट पॉलिसी अपना रहा है.

इम्पैक्ट प्लेयर जैसे नियम के तहत खिलाड़ी को पूरे 40 ओवर खेलने की ज़रूरत नहीं.

आईपीएल जैसी प्रतियोगिता में बड़े उम्र के खिलाड़ी भी शामिल रहते हैं. चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा था, 'इम्पैक्ट प्लेयर का होना कप्तान के लिए लक्ज़री है.'

दूसरी तरफ इम्पैक्ट प्लेयर से कप्तान की परेशानी बढ़ेगी, ऐसा गुजरात टाइटंस के कप्तान हार्दिक पंड्या का मानना था. मैच पर इम्पैक्ट प्लेयर्स का क्या असर हो रहा है, यहां पढ़िए.

भारत में स्टार्ट अप कंपनियों का वो समारोह जो बन गया स्कैंडल

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भारत में स्टार्ट अप कंपनियों का वो समारोह जो बन गया स्कैंडल

मार्च में सैकड़ों नए उद्यमी नोएडा में जमा हुए थे. वो यहां तीन दिनों के एक सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे, जिसे 'स्टार्ट-अप कंपनियों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा फंडिंग कार्यक्रम' कहकर प्रचारित किया गया था.

इस सम्मेलन (वर्ल्ड स्टार्ट-अप कन्वेंशन) में आए नई स्टार्ट-अप कंपनियों के संस्थापक, बड़े कारोबारियों से मिलने की उम्मीद में बहुत उत्साहित थे. उन्हें लग रहा था कि जब इन कारोबारियों के सामने उन्हें 15 मिनट तक अपनी कंपनी के बारे में बताने का मौक़ा मिलेगा, तो इससे वो अपनी कारोबार के विस्तार के लिए पूंजी जुटा सकेंगे.

साल 2021 और 2022 के ज़्यादातर वक़्त में भारत के स्टार्ट-अप इकोसिस्टम में पैसों की भरमार थी.

इन कंपनियों ने अपने कारोबार के लिए रिकॉर्ड मात्रा में पूंजी जुटाई थी, जिससे कई कंपनियां यूनिकॉर्न (जिनका बाज़ार मूल्य एक अरब डॉलर हो) बन गईं, और उनकी शुरुआत करने वाले उद्यमी रातों-रात करोड़पति बन गए. लेकिन, दुनिया की अर्थव्यवस्था में आ रही सुस्ती को देखते हुए इन कंपनियों में पैसे लगाने वाले निवेशक ज़्यादा चौकस हो गए, और स्टार्ट-अप कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना मुश्किल हो गया.

यही वजह थी कि नोएडा में हो रहे वर्ल्ड स्टार्ट-अप कन्वेंशन (WSC) को लेकर कुछ ज़्यादा ही उम्मीदें लगाई जा रही थीं. लेकिन, 24 मार्च को कार्यक्रम शुरू होने के कुछ घंटों के भीतर ही ये सम्मेलन अराजकता के गर्त में डूब गया. आगे क्या हुआ, जानने के लिए पढ़िए पूरी कहानी.

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