बजट 2023: विकास को रफ़्तार देने के लिए कितनी तैयार है भारतीय अर्थव्यवस्था की ज़मीन

बजट 2023
इमेज कैप्शन, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट से पहले सीआईआई की एक बैठक में
    • Author, आलोक जोशी
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

बजट से एक दिन पहले और क्या ख़ुशखबरी मिल सकती थी. सरकार अपने आंकड़े देती इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ ने बता दिया कि कुहासे भरी दुनिया में भारत एक चमकता सितारा होगा.

हालांकि आईएमएफ़ ने भारत की जीडीपी बढ़ने की रफ़्तार पिछले साल के 6.8 फ़ीसदी से घट कर 6.1 फ़ीसदी रहने का अनुमान बरक़रार रखा है.

लेकिन साथ में कहा है कि यह दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ रफ़्तार होगी.

आईएमएफ़ का कहना है कि 2023 में दुनिया की अर्थव्यवस्था में जो भी तेज़ी दिखेगी उसमें आधा हिस्सा भारत और चीन का होगा.

चीन भारत के बाद सबसे तेज़ी से बढ़ेगा. उसकी जीडीपी में 5.2 फ़ीसदी बढ़त होगी.

यह बढ़त ऐसे दौर में हो रही है जब पूरी दुनिया की ग्रोथ गिरकर 2.9 फ़ीसदी ही रहने जा रही है.

हालांकि आईएमएफ़ के मुताबिक़ मंदी का डर कम हो रहा है और दुनिया की अनेक अर्थव्यवस्थाएं अप्रत्याशित मज़बूती दिखा रही हैं.

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दुनिया के हालात सुधरे हैं

आईएमएफ़ ने अक्टूबर में कहा था कि दुनिया के लगभग एक तिहाई हिस्से की अर्थव्यवस्था इस साल या अगले साल बढ़ने के बजाय सिकुड़ेगी जबकि दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन परेशानी में बने रहेंगे.

यानी बुरा वक्त आना अभी बाक़ी है और बहुत से लोगों के लिए 2023 मंदी जैसा एहसास लाएगा.

लेकिन अब संस्था का अनुमान है कि हालात इससे बेहतर रहेंगे. मंदी की आशंका अब नहीं दिख रही है और 2023 में सुस्ती के बाद 2024 में दुनिया की तरक़्क़ी फिर रफ़्तार पकड़े ऐसी उम्मीद है.

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इमेज कैप्शन, चीन की फ़ैक्ट्रियों में उत्पादन शुरू

भारत में महामारी का असर ख़त्म

संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक़, भारत की अर्थव्यवस्था अब कोरोना संकट के असर से पूरी तरह निकल आई है और वापस तरक़्क़ी की राह पर है. सर्वेक्षण के मुताबिक़, वित्त वर्ष 2022-23 में जीडीपी 7 फ़ीसदी बढ़ने का अनुमान है, जबकि अगले साल यह बढ़त साढ़े छह फ़ीसदी रह सकती है.

हालांकि आईएमएफ़ और तमाम भारतीय एजेंसियां इससे कम बढ़त का अनुमान जता रही हैं, लेकिन सर्वेक्षण में भरोसा जताया गया है कि अगले वित्त वर्ष में तरक़्क़ी तेज़ होने के लिए ज़मीन अब तैयार है.

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महंगाई की चुनौती

सर्वे में कहा गया है कि 2022 के शुरुआती दस महीनों तक क़ाबू से बाहर रहने के बाद ख़ुदरा महंगाई का आंकड़ा वापस रिज़र्व बैंक की बर्दाश्त की हद में आ गया है.

लेकिन अभी यह फ़िक़्र बाक़ी है कि अगर चीन की अर्थव्यवस्था खुलने और दुनिया में मांग बढ़ने से कच्चे तेल और दूसरी कमोडिटीज़ के दाम बढ़े तो फिर परेशानी पैदा हो सकती है.

पश्चिमी देशों में महंगाई रोकने के लिए जिस तरह ब्याज बढ़ाया गया है उससे डॉलर महंगा हुआ है और यह आगे भी चला तो फिर भारत के लिए इंपोर्ट भी महंगा होगा और व्यापार घाटा बढ़ने का भी डर है.

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इमेज कैप्शन, महंगाई आने वाले समय में बढ़ सकती है

रोज़गार पर ज़ोर

सर्वे में साफ़ लिखा गया है कि तरक़्क़ी तभी समावेशी होती है जब इससे रोज़गार पैदा हों. सरकारी और ग़ैर सरकारी दोनों ही आंकड़े दिखा रहे हैं कि इस वित्त वर्ष में बेरोज़गारी कम हुई है.

ख़ास कर शहरों में पंद्रह साल से ऊपर के बेरोज़गारों की गिनती जुलाई से सितंबर की तिमाही में पिछले साल के 9.8 फ़ीसदी से गिर कर इस साल 7.2 फ़ीसदी हो चुकी है.

सर्वे के मुताबिक़, यह इस बात का एक और सबूत है कि अर्थव्यवस्था कोरोना के असर से बाहर आ चुकी है.

हालांकि आर्थिक विशेषज्ञ इस आंकड़े पर आज भी सवाल उठा रहे हैं और उनका कहना है कि असंगठित कामगारों के रोज़गार या बेरोज़गारी का हिसाब न होने से यह आंकड़े भरोसेमंद नहीं हैं.

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इमेज कैप्शन, सरकारी और गैर सरकारी दोनों ही आंकड़े दिखा रहे हैं कि इस वित्त वर्ष में बेरोज़गारी कम हुई है

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