BBC Hindi: बीते हफ़्ते की वो ख़बरें, जो शायद आप मिस कर गए

सुप्रीम कोर्ट

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नमस्ते जी. कैसे हैं? उम्मीद है कि अच्छे ही होंगे.

आप अपनी व्यस्त ज़िंदगी से वक़्त निकालकर इस कहानी को पढ़ रहे हैं, आपका आभार.

हमें मालूम है कि बीता हफ़्ता आपके लिए काफ़ी व्यस्त रहा होगा. ऐसे में कई ज़रूरी चीज़ों को करते हुए आपसे कुछ ख़बरें छूटी होंगी.

ऐसे में हम लाए हैं बीते सप्ताह की कुछ दिलचस्प और अहम ख़बरें जिन पर शायद आपकी नज़र ना गई हो.

ये पांच ख़बरें आपने पढ़ लीं तो ये समझिए कि आप पूरी तरह से अपडेटेड हैं.

पीएफ़आई: क्या पाँच साल के बैन से ख़त्म हो जाएगा संगठन?

पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया यानी पीएफ़आई और इससे जुड़े दूसरे अग्रणी संगठनों पर बैन लगाने से ये संस्था दक्षिण भारत से 'पूरी तरह साफ़' नहीं होगी क्योंकि वहां इसका आधार बहुत 'मज़बूत' है, ख़ासतौर पर केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में.

राजनीतिक टिप्पणीकार और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (एसडीपीआई) के पूर्व पदाधिकारियों ने बीबीसी हिंदी को बताया कि पीएफ़आई को 2014 से ही बैन लगने का अंदेशा था जब बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में सत्ता में आई थी.

राजनीतिक टिप्पणीकार एनपी चेकुट्टी के मुताबिक, "इसे एक चरमपंथी और सांप्रदायिक संगठन कहकर नहीं दबाया जा सकता है क्योंकि अल्पसंख्यकों, ओबीसी और एससी-एसटी समुदाय पर इसकी अच्छी पकड़ है और भारत के आम लोगों, ख़ासतौर पर पिछड़े वर्ग पर इसके आर्थिक और राजनीतिक विचारों का असर होता है."

चेकुट्टी कहते हैं, "कुल मिलाकर सरकार के लिए उसे पूरी तरह हटाना मुश्किल होगा. उनके पास एक स्पष्ट राजनीतिक और आर्थिक एजेंडा है. उन्होंने एक गैर-मुस्लिम, धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक स्लोगन का इस्तेमाल कर और ग्लोबलाइज़ेशन के दौर में 'इस्लाम को ख़तरे' की टैगलाइन का इस्तेमाल कर अपना सपोर्ट बेस बड़ा किया है." पूरी स्टोरी यहां पढ़िए.

अमेरिकी डॉलर

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डॉलर इतना मज़बूत क्यों हो रहा, दुनिया भर में मची है खलबली

अमेरिकी डॉलर दूसरी मुद्राओं की तुलना नें पिछले दशकों में सबसे मज़बूत स्थिति में हैं. इसका मतलब है कि डॉलर ख़रीदना महंगा हो गया है, और एक डॉलर अब पहले से ज़्यादा पाउंड, यूरो या येन ख़रीद सकता है.

इसका असर दुनिया भर के व्यापार और घरों पर पड़ रहा है.

डॉलर इंडेक्स यानी डीएक्सवाई, अमेरिकी डॉलर की दुनिया की छह दूसरी मुद्राओं से तुलना करता है. इसमें यूरो, पाउंड और येन शामिल हैं.

डीएक्सवाई 2022 में 15 प्रतिशत बढ़ा है. ये आँकड़े बताते हैं कि डॉलर पिछले 20 सालों में सबसे ऊंचाई पर है.

अमेरिका के सेंट्रल बैंक ने इस साल बढ़ती क़ीमतों को काबू में करने के लिए कई बार ब्याज दर बढ़ाए हैं. आगे की कहानी यहां पढ़िए...

निकाह

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निकाह: ट्रिपल तलाक़ पर बनी फ़िल्म जिसके संवाद पर रुकती नहीं थी तालियां

"आप भी औरों की तरह मर्द ही निकले जो औरत को औरत नहीं जायदाद समझते हैं. लेकिन मैं कोई जायदाद नहीं. मैं जीती जागती औरत हूँ. कोई लाश नहीं जो मर्दाना समाज अपनी मर्ज़ी से क़ब्रें बदलता रहे. आप मुझे क्या छोड़ेंगे. मैं ही आपको छोड़ रही हूँ."

40 साल पहले 24 सितंबर 1982 को रिलीज़ हुई और ट्रिपल तलाक़ के मुद्दे पर बनी फ़िल्म निकाह के ऐसे कितने ही डायलॉग हैं जिन पर उस वक़्त थिएटर में तालियाँ बजीं. फ़िल्म निकाह को लिखने वाली अचला नागर ने ये क़िस्सा बीबीसी को दिए इंटरव्यू में बताया था जो ज़हन में रह गया. निकाह 1982 में बनी बेहद कामयाब फ़िल्म थी जिसमें पाकिस्तानी मूल की सलमा आग़ा, राज बब्बर और दीपक पराशर ने काम किया था. निकाह निलोफ़र नाम की एक युवा लड़की की कहानी है जो वसीम से प्यार करती है और उसी से शादी भी करती है. लेकिन बढ़ते झगड़ों के बीच पति अचानक तीन बार तलाक़ तलाक़ तलाक़ कहते हुए निलोफ़र से अलग हो जाता है.. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

जसप्रीत बुमराह

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बुमराह अगर टी-20 वर्ल्ड कप में नहीं खेले, तो कौन गेंदबाज़ लेगा उनकी जगह

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ टी-20 सिरीज़ से बाहर हो गए हैं.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI ने बुमराह की जगह मोहम्मद सिराज को टीम में जगह दी है.

तीन टी-20 मैचों की सिरीज़ का एक मैच हो चुका है और दो मैच बाक़ी हैं.

भारतीय टीम अक्तूबर में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप की तैयारी के सिलसिले में ये सिरीज़ खेल रही है.

इससे पहले भारत ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भी तीन टी-20 मैचों की सिरीज़ खेली थी और उसे 2-1 से जीत लिया था. आगे की स्टोरी यहां पढ़ें...

गर्भपात और मैरेटन रेप

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गर्भपात और मैरिटल रेप पर बड़ा फ़ैसला - क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने

अबॉर्शन या गर्भावस्था को खत्म करना... कई देशों में ये हमेशा वाद-विवाद का विषय रहा है. हाल ही में, अमेरिका में गर्भपात के ख़िलाफ़ वहां के सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आया था जिसे लेकर अमेरिका में विरोध प्रदर्शन हुए और दुनिया भर में चर्चा.

अमेरिका में आए फ़ैसले को रूढ़िवादी और महिलाओं के अधिकार के ख़िलाफ़ बताया गया लेकिन भारत में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर ना सिर्फ़ स्पष्टता दी है बल्कि सुरक्षित गर्भपात के अधिकार के दायरे को भी बढ़ाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने सभी महिलाओं को सुरक्षित और क़ानूनी गर्भपात का अधिकार देते हुए कहा है कि अविवाहित महिलाएं भी 24 हफ़्ते तक की गर्भावस्था को ख़त्म करवा सकती हैं.

कोर्ट ने ये भी कहा कि वैवाहिक जीवन में पति के ज़बरन शारीरिक संबंध बनाने की वजह से हुई गर्भावस्था भी एमटीपी एक्ट यानी मेडिकल टर्मिनेशन प्रेग्नेंसी क़ानून के दायरे में आती है.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच एक 25 साल की अविवाहित महिला की याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें 24 हफ़्ते की प्रेगनेंसी को टर्मिनेट करने की मांग की गई थी. पूरी स्टोरी यहां पढ़ें...

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