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कोरोना वायरस की वजह से महाराष्ट्र में 14 अप्रैल की शाम से कड़े प्रतिबंध
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता दिल्ली
- प्रकाशित
भारत के सबसे धनी राज्य महाराष्ट्र में 14 अप्रैल की शाम से कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं. महाराष्ट्र इस समय कोरोना संक्रमण का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है. भारत में कोरोना की दूसरी लहर में महाराष्ट्र में हर दिन 60 हज़ार से ज़्यादा संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जिन पाबंदियों की घोषणा की है, उनके कारण उद्योग और इ-कॉमर्स सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. अगले 15 दिनों के लिए लगाई जा रही ये पाबंदियाँ कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए हैं.
महामारी के कारण राज्य में रेस्टोरेंट, कैफ़े और लक्ज़री दुकानों को पहले से ही बंद कर दिया गया हैं. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने घोषणा की है कि बैंक, अस्पताल, स्टॉक एक्सचेंज और किराने की दुकानों जैसी ज़रूरी सेवाओं के अलावा अधिकतर व्यपार और उद्योग बंद रहेंगे.
एक सरकारी अधिसूचना के अनुसार ज़रूरी सामान बनाने वाले यूनिट्स और निर्यात के लिए सामान बनाने वाले कारख़ानों के अलावा सभी फ़ैक्टरियाँ और उद्योग 15 दिनों के लिए बंद रहेंगे. ठाकरे ने कहा कि जान है तो जहान है.
आर्थिक विशेषज्ञ कहते हैं कि इन क़दमों का न केवल महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में जारी रिकवरी पर भी इसका नकारात्मक असर होगा.
देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में महाराष्ट्र का योगदान 15 प्रतिशत है. महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में रोज़ की मज़दूरी करने वाले बिहार और उत्तर प्रदेश के लाखों मज़दूर पलायन करके अपने घरों को लौट रहे हैं. वो अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का एक अटूट हिस्सा हैं और उनके वापस जाने से राज्य की फ़ैक्टरियों और उद्योगों को आर्थिक नुक़सान उठाना पड़ेगा.
टाटा मोटर्स, महिंद्रा और बजाज जैसी गाड़ियाँ बनाने वाली कंपनियां बुरी तरह से प्रभावित होंगी. ये कारख़ाने पुणे और इसके आस-पास हैं, जो बुरी तरह से तरह कोरोना के चपेट में हैं.
मुंबई-स्थित अर्थशास्त्री विवेक कौल कहते हैं, ''जहाँ तक मैन्युफैक्चरिंग की बात है, महाराष्ट्र देश में सबसे ऊपर है. साल 2018-19 में भारत के कुल विनिर्माण का लगभग 17% योगदान महाराष्ट्र से था. सरकार के कड़े क़दम से महाराष्ट्र और देश की आर्थिक प्रगति प्रभावित होगी. उदहारण के लिए ऑटो और इससे जुड़े उद्योगों को ले लें, ये सब पुणे और इसके क़रीब के शहर में हैं, जो भारत के सबसे अधिक संक्रमित इलाक़ों में से एक है. पाबंदियों का इन उद्योगों के उत्पादन पर असर पड़ेगा, चाहे सरकार इन्हें खुला भी रखे."
नुक़सान कितना होगा?
विवेक कौल का मानना है कि इसका असर उन उद्योगों पर भी पड़ेगा, जिन पर प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं. वे कहते हैं, "इस्पात, से लेकर रबर और प्लास्टिक तक, ऑटोमोबाइल के निर्माण में इस्तेमाल की जाने वाली हर चीज़ नकारात्मक रूप से प्रभावित होगी."
देश की अर्थव्यवस्था को कितना नुक़सान होगा? इस पर विवेक कौल ने कहा, ''इस प्रभाव को मापना बिल्कुल संभव नहीं है. फिर भी बड़ा नुक़सान तो होगा. महाराष्ट्र देश के अमीर राज्यों में से एक है, तो ज़ाहिर है इससे व्यक्तिगत उपभोग पर भी असर पड़ेगा. लोग कम ख़र्च करेंगे, क्योंकि वो घरों में रहेंगे, जिससे डिमांड में कमी आएगी."
मुंबई में चूड़ीवाला सिक्योरिटीज़ के प्रमुख अलोक चूड़ीवाला के अनुसार महीनो की मंदी के बाद कुछ समय से देश की अर्थव्यवस्था विकास की पटरी पर चल पड़ी थी, लेकिन महाराष्ट्र में लगाई गई पाबंदियों से विकास दर में रुकावट आएगी.
चुनाव प्रचार और कुंभ मेले से ख़तरा
आलोक चूड़ीवाला कहते हैं कि चुनावी प्रचारों और कुंभ मेले के आयोजन जैसे मामले ''सुपर स्प्रेडर" बन सकते हैं. वो आगे कहते हैं, "इससे आने वाले महीनों में वायरस केवल कुछ राज्यों में सीमित नहीं रहेगा, ये पूरे देश में फैलेगा. आने वाले महीने, दो महीने में इसका असर काफ़ी ख़तरनाक लग रहा है. जिससे आर्थिक विकास की रफ़्तार धीमी पड़ेगी."
महाराष्ट्र के बाद दूसरे राज्य भी अपने तौर पर या तो प्रतिबंध लगा रहे हैं या लगाने की सोच रहे हैं. आलोक कहते हैं, "जिस तरह से अस्पतालों में बेड की कमी है, ऑक्सीजन की कमी हो रही है. जिस तरह से संक्रमण फैल रहा है, दूसरे राज्यों को भी व्यपारिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाना पड़ेगा, जिसका हमारी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर होगा."
लेकिन अलोक के अनुसार, "स्थिति पिछले साल जैसी नहीं होगी, क्योंकि पिछले साल वायरस के बारे में कुछ जानकारी नहीं थी. अब सरकारों के पास अनुभव है.'' उनके कहने का मतलब ये था कि अब राज्य सरकार स्मार्ट लॉकडाउन का रास्ता अपना रही हैं, जो एक अच्छा क़दम है.
वे कहते हैं, "लेकिन छोटे और मध्यम उद्यम को पूरी से बंद कर दिया गया है. मेरे विचार में आर्थिक असर बुरा होगा, लेकिन उतना नहीं होगा, जितना पिछले साल हुआ था.''
उधर मुद्रा बाज़ार में सक्रिय एक कंपनी के अध्यक्ष पराग गायकवाड़ के मुताबिक़, व्यपारियों का आत्मविश्वास कम हुआ है, जिसका असर सभी तरह के व्यपार पर पड़ेगा, चाहे वो प्रतिबंध के अंदर हो या बाहर.
उन्होंने कहा, ''देखिए, हमारे क्षेत्र में डॉलर के मुक़ाबले रुपए का भाव पिछले कुछ दिनों से लगातार गिरता जा रहा है, जिससे आयात पर फ़र्क़ पड़ेगा. इससे हमारे आत्मविश्वास में कमी आई है. इसके अलावा आयात करने वाले परेशान हो रहे हैं. हम सबके घरों में या मोहल्लों में लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं या इसका शिकार हुए हैं. हम सब न्यूज़़ में देख रहे हैं कि अस्पतालों का क्या हाल है. इससे आपका हौसला पस्त तो होगा ही."
महाराष्ट्र कोरोना वायरस के फैलाव से देश भर में सबसे अधिक प्रभावित है. मंगलवार तक, भारत के एक करोड़ 35 लाख मामलों में से एक चौथाई मामले इसी राज्य से थे. मंगलवार को, महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के 60,212 नए मामले सामने आए.
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