कमल हासन: 'अगर वे अखंड भारत की बात करते हैं तो मुझे अखंड द्रविड़वाद के बारे में क्यों बात नहीं करनी चाहिए?'

कमल हासन
    • Author, मुरलीधरन काशी विश्वनाथ
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अब ख़त्म हो गया है.

मक्कल निधि मैयम पार्टी के नेता कमल हासन कोयम्बटूर से चुनाव लड़ रहे हैं. उनके पैर की हाल ही में सर्जरी हुई है और वे पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं.

लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने चुनावी दौरे और जनसंपर्क अभियान में कोई कटौती नहीं की है.

चुनावी व्यस्तताओं के बीच उन्होंने बीबीसी से विधानसभा चुनाव, द्रविड़ पार्टियों, ब्राह्मणों और ग़ैर ब्राह्मणों के मुद्दे पर लंबी बातचीत की.

कमल हासन

सवाल: आपने पूरे राज्य की यात्रा की है. आप क्या माहौल देख रहे हैं?

जवाब: सभी जगहों पर लोग अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं और हमारा स्वागत कर रहे हैं. ये समर्थन वोटों में बदलना चाहिए. इस खेल में जितना पैसा झोंका जा रहा है, उन सब के बीच लोकतंत्र की हर हाल में जीत होनी चाहिए.

सवाल: आपको क्या लगता है, इन चुनावों के प्रमुख मुद्दे क्या हैं?

जवाब: मुद्दे काफी हद तक सामान्य हैं. जो चीज़ें यहां हो रही हैं, लोगों के पास बुनियादी सुविधाओं तक का अभाव है, मुझे इन बातों को लेकर हैरत है. कितना स्वार्थ भरा हुआ है. उन लोगों ने जनता को बहुत सोच-समझकर ग़रीबी में रखा है... ऐसा लगता है कि वे ग़रीबी को किसी संग्रहालय में रखी जाने वाली कलात्मक वस्तु के तौर पर संभाल कर रखे हुए हैं.

सवाल: लेकिन सामाजिक कल्याण के पैमाने पर तमिलनाडु भारतीय राज्यों की सूची में सबसे अव्वल नबंर पर है....?

जवाब: मुमकिन है कि हमारी तुलना बाक़ी भारत से नहीं होनी चाहिए. हमें अपनी तुलना विकसित देशों से करनी चाहिए. तभी हम विकसित हो सकते हैं. अगर हम अपनी तुलना बंगाल में पड़े अकाल के वक़्त से करेंगे तो हमें अपनी स्थिति ठीक लगेगी. क्या ये ठीक है कि बिहार से तुलना के बाद ये सोचें कि हम बेहतर स्थिति में हैं? वे कहते हैं कि हमारे पास कई अस्पताल हैं. वे अस्पताल काम नहीं कर रहे हैं. हर कोई जानता है कि ये सरकार कौन सा उद्योग आश्चर्यजनक रूप से चला रही है, वो है टीएएसएमएसी (तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड). अगर वे उसी दिलचस्पी और सफलता के साथ सभी महकमों को चलाएं तो तमिलनाडु के पास नंबर वन स्टेट बनने का मौका होगा.

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सवाल: क्या आपको लगता है कि तमिलनाडु सरकार की मशीनरी पूरी तरह से नाकाम हो गई है?

जवाब: ये नाकामी से ज्यादा है. ये पूरी तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है. मशीनरी फेल नहीं हुई है, उन्हें नाकाम कर दिया गया है. इसकी सबसे बड़ी वजह है 30 फ़ीसदी कमीशन. तमिलनाडु की हालत आईसीयू में भर्ती मरीज जैसी है.

सवाल: आप लगातार भ्रष्टाचार के बारे में बोलते रहे हैं. ठीक उसी वक्त आप ये भी आरोप लगा रहे हैं कि लोग नोट के बदले अपने वोट का सौदा कर लेते हैं. इन हालात में, बदलाव लाना किस हद तक मुमकिन है?

जवाब: अगर नेता ईमानदार हों तो वे झरने की तरह फैल जाएंगे और सभी चट्टानें उसमें डूब जाएंगी.

सवाल: जहां तक मक्कल निधि मैयम पार्टी का सवाल है, ये आपका दूसरा चुनाव है. मक्कल निधि मैयम पार्टी के लिए इन चुनावों की क्या अहमियत है.

जवाब: हर कोई यही कहता है कि मेरे बिना तमिलनाडु की राजनीति की कल्पना नहीं की जा सकती है. कुछ लोग खुशी और उत्साह में ये दावा भी करते हैं कि वे पहले ही चुनाव जीत चुके हैं. मेरे हिसाब से जीत केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं होती है. लक्ष्यों को पांच साल में हासिल करना ही असली जीत है. इस लिहाज से कहें तो मैंने अभी जीत की तरफ़ कदम बढ़ाना शुरू भी नहीं किया है.

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सवाल: अगर ये चुनाव आप वास्तव में जीत जाते हैं तो आपका अगला कदम क्या होगा? क्या आप अभिनय जारी रखेंगे? क्या आप लोगों के विरोध को आगे ले जाएंगे?

जवाब: मेरे उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं जबकि उनकी अपनी पेशेवेर जिम्मेदारियां भी हैं. मैं भी उन्हीं की तरह हूं. मैं सिनेमा के लिए वक़्त निकाल लूंगा लेकिन उसे कम समय मिलेगा. मुझे ठीक ठाक पैसा मिल जाता है लेकिन मुझे ज़्यादा काम की ज़रूरत नहीं है. लेकिन ये करना गलत बात नहीं है. जब बुरे लोग राजनीति में आते हैं और इसे पूर्णकालिक रूप से अपना लेते हैं, वैसे लोग जिनके पास काम है और वे इसके लिए समय निकाल रहे हैं, उनके लिए यही असली समाज सेवा है.

सवाल: पर्यावरण को लेकर एमएनएन की अलग शाखा है. आपने अपने चुनावी मैनिफेस्टो में कहा है कि आप खेती में जेनेटिकली मॉडिफ़ाइड उपज का समर्थन करेंगे. लेकिन पर्यावरणविद इस जेनेटिकली मॉडिफ़ाइड उपज का कड़ा विरोध करते हैं...

जवाब: विज्ञान और खेती दो अलग चीज़ें हो सकती हैं लेकिन इन्हें एक साथ मिलाया जाना चाहिए. लोगों के साथ मिलकर हमें इस दिशा में बदलाव लाने की ज़रूरत है. हमने जो मैनिफेस्टों में लिखा है, वो पत्थर पर खिंची लकीर तो नहीं. इस पर चर्चा की जा सकती है और इसे बदला भी जा सकता है.

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सवाल: लंबे वक्त से तमिलनाडु में दो भाषा की नीति है. आपने अपने मैनिफेस्टो में दो भाषा और तीन भाषा रखने की नीति की बात की है. भाषाई शिक्षा को लेकर एमएनएम की नीति क्या है?

जवाब: हमारी नीति वही है जो अन्नादुरई (अन्ना) ने कहा था. उन्होंने तीन भाषा की नीति का समर्थन किया था. तो मेरे हिसाब से अब वक्त गया है कि हम उस नीति को अपनाएं.

सवाल: तो इस मामले में आप अन्ना के नक्शे-क़दम पर चलेंगे...

जवाब: मैं ख़ुद को आधुनिक दौर का राजनेता मानता हूं, मैं उसी का चुनाव करूंगा जो बेहतर है. किसी भी मामले में हम ज़िद नहीं करते कि हमें केवल एक ही रास्ता अपनाना है.

सवाल: आप दक्षिण कोवई से चुनाव लड़ रहे हैं. आपने यही विधानसभा क्षेत्र क्यों चुना? क्या आपको यहां के मुद्दों के बारे में जानकारी है?

जवाब: हां, बिल्कुल. मैं मानता हूं कि ये विधानसभा क्षेत्र एक अच्छा उदाहरण है. राज्य में जितनी भी समसमयाएं हैं, वो इस विधानसभा क्षेत्र में दिखती हैं. ये विधानसभा क्षेत्र हर तरह से योग्य है. इसमें अमेरिकी शहर मैनचेस्टर बनने की क्षमता है. यहां धार्मिक सद्भावना एक बड़ी चुनौती है और मैं यहां काम करना चाहता हूं. एक कारण ये भी है कि बीजेपी को भरोसा है कि वो यहां की सीट अपने नाम करेगी. मैं भी इस बात को लेकर ज़िद पर अड़ा हूं कि मैं यहां उन्हें ज़रूर मात दूंगा.

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सवाल: कुछ दिन पहले जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री यहां आए थे, तब यहां विवाद हो गया था. आपने इसका विरोध किया था. लेकिन आपके चुनाव प्रचार के केंद्र में बीजेपी के विरोध में स्टैंड लेना नहीं है.

जवाब: इतना काफी होगा कि उनका विरोध वहीं किया जाए, जहां इसकी ज़रूरत है. प्रधानमंत्री के तौर पर मैं मोदी जी की इज़्ज़त करता हूं. लेकिन अगर उनके कुछ कदम देश के हित में नहीं होंगे तो मैं उनका विरोध करूंगा. फिर चाहें वो देश के प्रधानमंत्री हों या कोई और. विपक्ष का अर्थ होता है गणतांत्रिक तरीकों को अपनाकर विरोध जताना. मैं कोई नक्सलवादी नहीं कि जो बंदूक पकड़े घूमता है. मुझे गणतांत्रिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है.

सवाल: जब आम लोगों को दिक्कतें पेश आती हैं तो राजनीतिक पार्टियों विरोध करती हैं. क्या आपकी राजनीति में विरोध की कोई जगह है?

जवाब: अगर विरोध गांधी जी के नेतृत्व में होगा तो उसका रूप अलग होगा, वो असहयोग आंदोलन करेंगे. अगर आप बसों को तोड़ने, जब छात्र बसों में हों उस वक्त उनमें आग लगाने, दफ्तरों को आग के हवाले करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने को विरोध कहते हैं तो हम इससे पूरी तरह इनकार करते हैं. अगर पार्टी का कोई व्यक्ति इस तरह के काम करता है तो उसे पार्टी से निष्कासित कर दिया जाएगा.

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सवाल: एमएनएम, द्रविड़ विचारधारा का कितना समर्थन करता है? क्या आपकी पार्टी इस विचारधारा से अलग भी सोचती है?

जवाब: इस मामले में दोनों में फ़र्क है. कहा जाए तो मिड डे मील अच्छी योजना थी, अब भले ही इस योजना का आगाज़ एमजीआर ने किया हो या फिर कामराज ने. जहां तक आरक्षण की बात है, जब तक एक भी तमिल नागरिक हाशिए पर है इसकी ज़रूरत बनी रहेगी.

सवाल: बीते सौ वर्षों की तमिलनाडु की राजनीति को देखें तो ये ब्राह्मण और ग़ैर-ब्राह्मणों के बीच बंटी हुई है. आपको क्या लगता है, क्या आगे भी ये जारी रहना चाहिए?

जवाब: नहीं. असल में ये मुद्दा आसानी से सुलझाया जा सकता है. जाति को इस तरह से दो हिस्सों में बांटा नहीं जा सकता. क्या सभी ग़ैर-ब्राह्मण मिलजुल कर रहते हैं? नहीं. समाज में ऊंच नीच है और सभी स्तरों पर समस्याएं मौजूद हैं. हमें समाज के सभी स्तरों पर इस असमानता पर हमला कर इसे मिटाना होगा.

सवाल: क्या आपको लगता है कि मौजूदा वक्त में ब्राह्मणों को निशाना बनाया जा रहा है?

जवाब: हम उन लोगों का विरोध करते हैं जो ब्राह्मणवाद में यक़ीन करते हैं. लेकिन ब्राह्मणों का विरोध करके आप इसे समझ नहीं सकेंगे. मैं जाति के आधार पर किसी की पहचान नहीं करना चाहता.

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सवाल: क़रीब पचास साल से राज्य में द्रविड़ राजनीतिक पार्टियां सत्ता पर काबिज़ रही हैं. समाज और राज्य के प्रति उनके योगदान पर आपके क्या विचार हैं?

जवाब: उनकी विचारधारा को देखते हुए कहा जा सकता है कि उनसे जो योगदान अपेक्षित था, वो ठीक-ठाक रहा है. वक्त को देखते हुए इन पार्टियों का उत्थान महत्वपूर्ण था. लेकिन अब उनका जाना भी उतना ही ज़रूरी हो गया है क्योंकि अब वो भ्रष्ट हो गई हैं.

सवाल: पेरियार, अन्नादुरई और राजाजी की विचारधारा से आप कितने सहमत हैं?

जवाब: जैसा मैंने पहले कहा था, अब जो वक्त आ गया है. उसमें ये ज़रूरी हो गया है. हमें निधि कच्ची, द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम से शुरुआत करनी होगी. उन्होंने आदि द्रविड़ार नाम का एक शब्द बनाया है और वो चाहते थे कि ये शब्द राजनीति का हिस्सा बन जाए. ये देश की आज़ादी के पहले की बात है. उस वक्त निधि कच्ची में तमिल लोग थे, और मलयामल और कन्नड़ भाषा बोलने वाले शामिल थे. मुझे लगता है कि ऐसा पूरे दक्षिण भारत में होना चाहिए. द्रविड़वाद पूरे देश में है, इसे तीन परिवारों के भीतर सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए.

सवाल: क्या आप इस विचारधारा को पूरे भारत में फैलाना चाहते हैं?

जवाब: हां क्यों नहीं. द्रविड़वाद केवल एक विचारधारा नहीं है. ये हमारी भौगोलिक स्थिति दर्शाता है और ये हमारे लिए जीवन का अहम हिस्सा है. ये पूरे देश में है, चाहे वो मोहेंजोदड़ो की बात हो या फिर हड़प्पा की. अगर वो अखंड भारत की बात कर सकते हैं तो क्या मैं अखंड द्रविड़वाद की बात नहीं कर सकता?

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