नौदीप के साथ गिरफ़्तार शिव कुमार की मेडिकल जाँच में गंभीर चोट के निशान

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- Author, अरविंद छाबड़ा
- पदनाम, बीबीसी पंजाबी संवाददाता
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मज़दूर अधिकारी संघ के अध्यक्ष शिव कुमार, जिन्हें पिछले महीने पुलिस ने गिरफ़्तार किया था, उनकी मेडिकल रिपोर्ट में कई गंभीर और सामान्य चोटों की बात कही गई है.
रिपोर्ट में हाथों और पैरों में फ्रैक्चर, टूटे हुए नाख़ून और पोस्ट ट्रॉमैटिक डिसऑर्डर (किसी अप्रिय घटना के बाद लगने वाला सदमा) जैसी बातें कही गई हैं.
उनके वकील अर्शदीप चीमा के मुताबिक, "पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में पेश की गई उनकी मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटों की बात सामने आई है."
चीमा ने कहा कि कोर्ट ने हरियाणा पुलिस से पुरानी रिपोर्ट भी माँगी है जिसमें दावा किया गया था कि उनके शरीर पर कोई चोट नहीं है.
हाईकोर्ट इस मामले को सीबीआई को ट्रांसफर करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था.
बीबीसी के पास रिपोर्ट की एक कॉपी है जिसमें चोटों की ये जानकारियां दी गई हैं: दाएं और बाएं पैर मे चोट, लंगड़ा कर चलना, दाएं पैर में सूजन, बाएं पैर में सूजन, बाएं पैर के अंगूठे में कालापन, बाएं अंगूठे और तर्जनी में कालापन, कलाई में सूजन, बाएं जांघ पर कालापन.
रिपोर्ट के मुताबिक ये चोटें दो हफ़्ते से ज़्यादा पुरानी हैं, मुमकिन है कि ये किसी कुंद हथियार के कारण हुआ हो.
वकीलों के मुताबिक ये बात ग़ौर करने वाली है कि ये चोटें गिरफ़्तारी के एक महीने बाद तक भी मौजूद हैं. हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के डॉक्टरों से मेडिकल परीक्षण के लिए कहा था.
सोनीपत (हरियाणा) के जेल अधिकारियों ने अदालत को बताया कि शिव कुमार को दो फ़रवरी को जेल में लाया गया था.
उन पर सेक्शन 148, 149, 323, 384 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. ये धाराएं दंगा भड़काने और डराने धमकाने से जुड़ी हैं.
इसके अलावा 12 जनवरी को उनपर हत्या के प्रयास, दंगे और अन्य मामलों में एफ़आईआर दर्ज की गई. तीसरा केस भी उसी दिन कुंडली पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था.

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शिव कुमार ने डॉक्टरों को बताया कि 12 जनवरी की दोपहर सोनीपत में एक मजदूर संघ के धरने पर बैठने को लेकर पुलिस के साथ विवाद हुआ था.
उन्होंने दावा किया कि वह उस समय उस वक्त वहाँ मौजूद नहीं थे. उन्होंने कहा, "कुंडली पुलिस स्टेशन की पुलिस ने आकर कुछ लोगों को गिरफ्तार किया और एसएचओ ने दोस्त के साथ मारपीट की."
पुलिस का कहना है कि शिव कुमार भी 12 तारीख़ की उस घटना के वक़्त मौक़े पर मौजूद थे, जब फ़ैक्टरी के गेट पर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया था. इस घटना के बाद दर्ज दो एफ़आईआर में अवैध धन वसूली और हत्या की कोशिश से जुड़ी गंभीर धाराएँ लगाई गई हैं.
उनके परिवार का कहना है कि शिव कुमार और संगठन के अन्य सदस्यों पर कार्रवाई इसलिए की गई, क्योंकि वो केआईए में काम करने वाले मज़दूरों के हक़ की आवाज़ उठाते हैं.

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संगठन के अन्य सदस्यों ने बीबीसी को बताया था कि 12 तारीख़ की घटना वाले दिन भी संगठन के लोग, जिनमें ज़्यादातर मज़दूर ही शामिल हैं, किसी मज़दूर का बकाया वेतन दिलाने के लिए ही एक फ़ैक्टरी के बाहर धरना दे रहे थे, जहाँ पुलिस ने आकर पहले लाठीचार्ज किया.
उनका कहना है कि शिव कुमार अपनी आँखों की समस्या की वजह से मज़दूरों का बकाया दिलाने के लिए बाक़ी लोगों के साथ कम ही जाते थे.
वो अधिकतर सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन में लगाए अपने संगठन के टेंट के पास बैठे मिलते थे, जहाँ कई मज़दूर आकर अपने बकाया वेतन को दिलाने के लिए संगठन से मदद की गुहार लगाते थे.
उनका कहना है कि 12 तारीख़ को भी शिव कुमार वहीं बैठे थे.
शिवकुमार के मुताबिक 16 जनवरी को जब वो किसानों के आंदोलन में थे, तो पुलिस ने उन्हें उठा लिया कथित रूप से उसके साथ मारपीट की गई. पुलिस ने कथित तौर पर उसके दोनों पैर बांध दिए, उन्हें ज़मीन पर लेटा दिया, और उसे तलवों पर मारा.

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पुलिस ने मारपीट से किया था इनकार
उन्होंने कथित तौर पर सपाट लकड़ी से मारा और उनके हाथ बांध दिए. उन्हें तीन दिनों तक सोने की अनुमति नहीं थी. रिपोर्ट में मानसिक और शारीरिक यातना के गंभीर विवरण हैं.
पुलिस ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उन्हें 16 नहीं, 23 जनवरी को गिरफ़्तार किया गया था, जिसके तुरंत बाद उनके परिवार को बताया भी गया.
कुछ दिनों पहले बीबीसी से बातचीत में सोनीपत के कुंडली थाने के एसएचओ रवि कुमार ने कहा कि शिव कुमार का मेडिकल कराया गया था, और उनके पास सबूत हैं कि शिव कुमार के साथ कोई मारपीट नहीं हुई.
नौदीप भी इसी मामले में गिरफ़्तार
24 वर्षीय मज़दूर अधिकार कार्यकर्ता शिव कुमार भी उसी मामले में जेल में हैं, जिसमें नौदीप कौर है.
वो हरियाणा के कुंडली इंडस्ट्रियल एरिया (केआईए) में प्रवासी मज़ूदरों का बकाया वेतन दिलाने की मुहिम चला रहे मज़दूर अधिकार संगठन के अध्यक्ष हैं. नौदीप कौर इसी संगठन की सदस्य हैं.

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