योगी आदित्यनाथ के नाम चिट्ठी में पूर्व नौकरशाहों ने लिखा- ‘यूपी नफ़रत की राजनीति का केंद्र बना’ - प्रेस रिव्यू

योगी आदित्यनाथ

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सौ से अधिक पूर्व नौकरशाहों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने सीएम योगी से 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध क़ानून, 2020' को वापस लेने की मांग की है.

इन पूर्व अधिकारियों ने इस चिट्ठी में लिखा है कि 'इस क़ानून ने उत्तर प्रदेश को नफ़रत, विभाजन और कट्टरता की राजनीति का केंद्र बना दिया है.'

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, इस ख़ुले ख़त में 104 पूर्व नौकरशाहों ने हस्ताक्षर किए हैं. इनमें से एक हस्ताक्षर पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे शिवशंकर मेनन का है. इसके अलावा पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव, पूर्व प्रधानमंत्री सलाहकार रहे टीकेए नायर जैसे बड़े नाम इसमें शामिल हैं.

इस ख़ुले ख़त में लिखा गया है कि- "उत्तर प्रदेश एक समय में गंगा-जमुना तहज़ीब को सींचने वाला... अब नफ़रत, विभाजन...कट्टरता की राजनीति का केंद्र बन चुका है."

किसान

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किसानों और सरकार के बीच आज होनी है बातचीत, क्या निकल सकेगा समाधान?

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ 26 नवंबर से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों और सरकार के बीच आज यानी बुधवार को एकबार फिर बातचीत होनी है.

किसानों का कहना है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन बातचीत तय एजेंडे पर ही होगी. बुधवार को ही किसान ट्रैक्टर मार्च निकालने वाले थे जिसे उन्होंने स्थगित कर दिया है.

दैनिक हिंदुस्तान की ख़बर के मुताबिक़, कृषि बिलों पर जारी गतिरोध को ख़त्म करने के लिए किसानों और सरकार के बीच बुधवार, 30 दिसंबर को दोपहर क़रीब दो बजे मुलाक़ात हो सकती है.

अख़बार लिखता है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को भेजे पत्र में लिखा है कि बातचीत उन्हीं पुराने एजेंडो पर होगी. केंद्र सरकार को बताना होगा कि वह तीन क़ानूनों को निरस्त करने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाएगी. एमएसपी की गारंटी देने के लिए क्या किया जाएगा और पराली जलाने से जुड़े बिल में कैसे बदलाव होगा.

इससे पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के घर पर मंत्रियों की बैठक हुई. इस बैठक में बातचीत का ख़ाका तैयार किया गया. बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर समेत केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल भी शामिल थे.

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भारत के साथ संघर्ष चीन के लिए अहितकर- भारतीय वायु सेना प्रमुख

भारतीय वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को समूची सैन्य ताक़त को मज़बूत करने की ज़रूरत है.

एक ऑनलाइन सेमिनार के दौरान उन्होंने कहा कि भारत के साथ कोई भी बड़ा संघर्ष चीन की आकांक्षाओं और योजनाओं के लिए ठीक नहीं है.

आरकेएस भदौरिया

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जनसत्ता ने इस ख़बर को प्रमुखता से प्रकाशित किया है.

अख़बार लिखता है कि सेमिनार में वायु सेना प्रमुख ने कहा कि- "भारत को पश्चिम और उत्तरी मोर्चे पर साथ ही भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए समूची सैन्य ताक़त को मज़बूत करने की ज़रूरत है."

हालांकि उन्होंने साथ में यह भी कहा कि वायुसेना किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.

कोरोना

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वुहान में कोरोना वायरस के मामले रिपोर्ट मामलों के दस गुना हो सकते हैं

आज के समय में पूरी दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में है और अब तो कोरोना वायरस के एक नए स्ट्रेन के बारे में भी पुष्टि हो गई है. यह नया स्ट्रेन भी दुनिया के क़रीब आधा दर्जन देशों में पाया जा चुका है.

लेकिन चीन के जिस शहर से कोरोना वायरस संक्रमण की शुरुआत मानी जाती है उसे लेकर हिंदुस्तान टाइम्स ने एक ख़बर प्रकाशित की है.

अख़बार लिखता है कि वुहान में कोरोना वायरस संक्रमण के जितने मामले रिपोर्ट किये गए, हो सकता है कि असल में संक्रमण के मामले उसके दस गुना रहे हों. चीन के सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों के एक अध्ययन से यह संकेत मिलते हैं.

इसके मुताबिक़, वुहान की आबादी क़रीब एक करोड़ दस लाख (11 मिलियन) है. अध्ययन के दौरान अधिकारियों ने पाया कि यहां 4.4 फ़ीसदी लोगों में कोरोना वायरस का मुक़ाबला करने के लिए ख़ास एंटीबॉडी मौजूद है. इससे यह पता चलता है कि ये लोग बीते वक़्त में संक्रमित हुए होंगे. सर्वे के आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि वुहान में क़रीब पांच लाख लोग संक्रमित रहे होंगे.

यह संख्या अप्रैल के मध्य में जारी किये गए आंकड़े का दस गुना अधिक है.

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