भारत सालों बाद चीन पर पड़ा भारी, पर ये हुआ कैसे? - प्रेस रिव्यू

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चीन से भारत के आयात के साथ-साथ उसके व्यापार घाटे में नवंबर महीने में तेज़ गिरावट देखी गई है.

द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच, बीते 11 महीने की अवधि में व्यापार क़रीब 78 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा है जबकि साल 2019 में यह 84.4 अरब डॉलर का रहा था.

नवंबर महीने के अंत में चीन का भारत में शिपमेंट (आयात) क़रीब 59 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें 13 प्रतिशत गिरावट आई है. साथ ही भारत को अपना व्यापार घाटा कम करने में मदद मिली है जो पिछले वर्ष के 51.6 अरब डॉलर से घटकर 40 अरब डॉलर रह गया है. साल 2005 के बाद पहली बार भारत के व्यापार घाटे में ऐसी गिरावट दर्ज की गई है.

पिछले सप्ताह, भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने बताया था कि नवंबर में भारत के कुल आयात में 13.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. उसी के बाद भारत में चीन के निर्यात में गिरावट की व्यापक संभावना जताई गई थी.

केंद्र सरकार के आँकड़ों से पता चलता है कि भारत के विद्युत और ग़ैर-विद्युत मशीनरी के आयात में 13.4% की गिरावट आई है और इस किस्म की सामग्री का भारत में सबसे ज़्यादा आयात चीन से होता रहा है.

चीन का सरकारी डेटा दिखाता है कि चीन के निर्यात में नवंबर में 21.1% की वृद्धि हुई. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, फ़रवरी 2018 के बाद से यह सबसे तेज़ वृद्धि है. चीनी निर्यात में आयी यह वृद्धि अक्तूबर की तुलना में लगभग दोगुनी है.

वैश्विक स्तर की आर्थिक सुस्ती और महामारी के प्रभाव के बावजूद, चीन ने नवंबर महीने में ज़्यादा निर्यात किया है. यह क़रीब 268 अरब डॉलर का है.

सरकारी डेटा के अनुसार, साल 2019 में इलेक्ट्रिकल मशीनरी और अन्य इलेक्ट्रिक उत्पाद भारत द्वारा सबसे अधिक चीन से आयात किए गए जिनकी क़ीमत क़रीब 20 अरब डॉलर थी.

बीजिंग में स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, इलेक्ट्रिक सामानों के अलावा भारत चीन से ऑर्गेनिक कैमिकल, लौह अयस्क, कपास और फ़र्टिलाइज़र मंगवाता है.

वहीं चीन में भारत का निर्यात नवंबर में 16% रहा, जो इस वर्ष के 11 महीनों के बाद 19 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया. संभवतः लौह अयस्क के चीनी आयात में सुधार के कारण ऐसा हुआ.

इसके अलावा, नवंबर में ही चीन भारत से चावल का आयात करने के लिए राज़ी हुआ. बीते तीन दशकों में ऐसा पहली बार है, जब चीन भारत से चावल आयात करने वाला है.

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चावल का सौदा 'विशुद्ध रूप से एक व्यावसायिक क़दम' था, क्योंकि यह 'घरेलू समकक्षों की तुलना में सस्ता' था.

वीडियो कैप्शन, तनाव के बावजूद भारत से स्टील क्यों ख़रीद रहा है चीन?

भारत से चीन लोहा जमकर ख़रीद रहा

कोरोना वायरस की महामारी के कारण भारत की अर्थव्यवस्था संकटग्रस्त है लेकिन स्टील का निर्यात अप्रैल और जुलाई के बीच दोगुने से भी ज़्यादा हो गया है.

कम से कम पिछले छह सालों में उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. भारत के स्टील निर्यात में यह अप्रत्याशित उछाल चीन के कारण है जबकि दोनों देशों में भारी तनातनी है.

एक तरफ़ भारत चीन के निवेश को लेकर सतर्कता बरत रहा है तो दूसरी तरफ़ चीन इन सबकी उपेक्षा कर भारत से जमकर स्टील ख़रीद रहा है. आख़िर ऐसा क्यों है? समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कारोबारियों ने कहा है कि ऐसा कम क़ीमत के कारण हो रहा है.

भारतीय विक्रेताओं के पास उत्पादन की बड़ी खेप मौजूद थी क्योंकि कोविड 19 के कारण घरेलू मांग प्रभावित होने से माल बिक नहीं रहा था. ऐसे में भारतीय विक्रेता इस सरप्लस से छुटकारा चाहते थे और राजस्व कम नहीं होने देना चाहते थे. अभी तक साफ़ नहीं है कि चीन से स्टील की इस पैमाने पर बिक्री किसी नियम का उल्लंघन है या नहीं. लेकिन चाइना आइरन एंड स्टील एसोसिएशन ने एक बयान में कहा है कि वो निगरानी कर रहा है.

भारत की अग्रणी स्टील कंपनी टाटा स्टील लीमिटेड और जेएसडब्ल्यू स्टील लीमिटेड उन कंपनियों में शामिल हैं जिन्होंने अप्रैल से जुलाई के बीच कुल 40.64 लाख टन निर्मित और अर्धनिर्मित स्टील उत्पाद विश्व बाज़ार में बेचे. इसकी तुलना में इसी वक़्त पिछले साल महज़ 10.93 लाख टन ही स्टील बेचे गए थे. 40.64 लाख टन स्टील में चीन और वियतनाम ने केवल 10.37 लाख स्टील ख़रीदे हैं.

इस मामले में टाटा, जेएसडब्ल्यू और भारत सरकार की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. वियतनाम भारतीय स्टील का नियमित ख़रीदार है लेकिन चीन के बड़े ख़रीदार के तौर पर उभार से भारत के पारंपरिक मार्केट इटली और बेल्जियम पीछे छूट गए हैं. यह सबके लिए चौंकाने वाला है. वह भी ऐसा तब हो रहा है जब भारत के साथ चीन के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से ख़राब हैं.

किसान नेताओं ने बंद के लिए ग़ैर-राजनीतिक समर्थन मांगा - प्रेस रिव्यू

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किसान नेताओं ने बंद के लिए ग़ैर-राजनीतिक समर्थन माँगा

भारत बंद की पूर्व संध्या पर किसान नेता एक संतुलन बनाते दिखे. उन्होंने देशव्यापी हड़ताल के आह्वान पर विपक्ष के समर्थन को अपने आंदोलन के बढ़ते दायरे की तरह दिखाया, साथ ही सरकार के उन आरोपों का भी खंडन किया कि प्रदर्शनों को अब राजनीतिक हितों के लिए हाइजैक कर लिया गया है.

सोमवार को सिंघु बॉर्डर पर एक प्रेस वार्ता के दौरान क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा, "हम राजनीतिक पार्टियों को उनके समर्थन के लिए शुक्रिया कहना चाहते हैं और उनसे अपील करना चाहते हैं कि वो अपने झंडे और बैनर घर पर छोड़ दें और सिर्फ किसानों के समर्थन में खड़े हों."

दर्शन पाल ने केंद्र के उन आरोपों को खारिज किया कि पार्टी पॉलिटिक्स किसानों के एजेंडा को ओवरटेक कर रही है.

उन्होंने कहा, "यहां तक कि केजरीवाल साब सुबह आए, लेकिन हमने उन्हें अपना मंच नहीं दिया. हम यहां 27 नवंबर से हैं. आप एक उद्हारण नहीं दे सकते कि किसानों ने राजनीतिक पार्टियों से फंड लिया हो, या उन्हें अपने मंच पर बोलने की अनुमति दी हो. हम इस पर बहुत दृढ़ हैं."

सरकार के लिए उन्होंने कहा, "बीजेपी का अपना ख़ुदका नेरेटिव हो सकता है. लेकिन उन्हें बताना चाहिए कि हमें समाज के बड़े हिस्से का ऐसा समर्थन क्यों मिला है."

द हिंदू अख़बार के मुताबिक़, किसान समूहों की मानें तो अब तक बंद को 24 राजनीतिक पार्टियों का समर्थन हासिल हुआ है. इस लिस्ट में कांग्रेस और वामपंथी दल और डीएमके, टीआरएस, एसपी, बीएसपी, आरजेडी, शिव सेना, एनसीपी, एसएडी, टीएमसी, एआईएमआईएम, जेएमएम और गुपकर गठबंधन शामिल है.

देशव्यापी बंद से पहले गृह मंत्रालय ने सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइज़री जारी की कि मंगलवार की हड़ताल के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं होनी चाहिए. एडवाइज़री में उन्हें शांति और धीरज बनाए रखने और ये सुनिश्चित करने के लिए कहा कि सभी कोविड-19 दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए.

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.

किसान नेताओं का कहना है कि हड़ताल सुबह 10 बजे से दोपहर तीन बजे तक जारी रहेगी. लेकिन कोई ज़रूरी या आपात सेवाओं को रोका नहीं जाएगा.

घर वापस लौटतीं महिला किसान

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घर वापस लौटतीं महिला किसान

एक हफ़्ते तक प्रदर्शन में बैठने के बाद कई प्रदर्शनकारी महिलाएं उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के अपने घर को लौट रही हैं. इसकी वजह है गाज़िपुर प्रदर्शन स्थल पर साफ़ शौचालय और नहाने की जगह का ना होना.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़, "बिजनौर के 62 वर्षीय किसान दालचंद प्रधान कहते हैं, अफसोस की बात है कि महिलाओं को अपने घर वापस जाना पड़ रहा है, क्योंकि वो खुले में नहीं नहा सकतीं. यहां कोई सुविधा नहीं है. आदमी तो किसी तरह कर लेते हैं लेकिन महिलाओं के लिए ज़्यादा दिक़्क़त है."

अख़बार ने जब पिछले हफ़्ते 10 महिलाओं से बात की थी तो उन्होंने कहा था कि शौचालय ना होने की वजह से उन्हें दिक़्क़त आ रही है और वो वापस जाने के बारे में सोच रही हैं. हालांकि गाज़ियाबाद नगर निगम ने सड़क के दोनों तरफ पोर्टेबल वॉशरूम लगाए हैं, लेकिन उनका कहना है कि वो ज़्यादातर पुरुष इस्तेमाल करते हैं और इस्तेमाल के बाद साफ़ भी नहीं करते.

62 साल की रामलेठी वर्मा अपने परिवार की तरफ से प्रदर्शन में शामिल हुई थीं. उनके पति और बच्चे घर पर काम संभाल रहे थे. उन्होंने बताया, "हम अंधेरे में या सुबह जल्दी खुले में जाती हैं. इस वजह से हममें से कुछ बीमार पड़ रही हैं. हमारी साड़ियां गंदी हैं, हम कई दिनों तक नहा नहीं पाई हैं."

महिलाओं का कहना है कि सबसे ज़्यादा दिक़्क़त उन्हें महावारी के वक़्त हो रही है. क्योंकि वो कपड़ा इस्तेमाल करती हैं और इस्तेमाल के बाद उसे धो नहीं पातीं.

अवार्ड लौटाने जा रहे खिलाड़ियों को रोका

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अवार्ड लौटाने जा रहे खिलाड़ियों को रोका

किसान आंदोलन के समर्थन में राष्ट्रीय स्तर के क़रीब 35 खिलाड़ियों ने अपने अवार्ड वापस करने का एलान किया है.

हिंदुस्तान अख़ाबर के मुताबिक़, एशियाई खेलों में दो बार के स्वर्ण पदक विजेता रहे पहलवान करतार सिंह की अगुआई में 20 खिलाड़ी सोमवार को पदक लौटाने राष्ट्रपति भवन जा रहे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया.

वर्ष 1982 में अर्जुन पुरस्कार और 1987 में पद्म श्री से नवाज़े गए करतार सिंह के साथ ओलंपिक स्वर्ण विजेता टीम के सदस्य पूर्व हॉकी खिलाड़ी गुरमेल सिंह और महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान राजबीर कौर भी शामिल थीं. गुरमेल को 2014 में ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

टॉप 10 ग्लोबल हथियार-निर्माताओं में तीन चीनी सरकारी यूनिट

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टॉप 10 ग्लोबल हथियार-निर्माताओं में तीन चीनी सरकारी यूनिट

दुनिया की 10 शीर्ष हथियार-निर्माता कंपनियों में से तीन चीन की सरकारी संस्थाएं हैं. वहीं चौथी टॉप 25 में शामिल है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, ये पीपल्स लिबरेशन आर्मी के व्यापक आधुनिकीकरण और पाकिस्तान, बांग्लादेश और अल्जीरिया जैसे देशों में चीनी हथियारों के तेज़ी से बढ़ते एक्सपोर्ट की ओर ध्यान दिलाता है.

दुनिया की 25 सबसे बड़ी हथियार कंपनियों की लिस्ट उनकी साल में होने वाली बिक्री के आधार पर बनाई जाती है. ये लिस्ट प्रमुख कंफ़्लिक्ट थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ने सोमवार को जारी की.

लिस्ट में द एविएशन इंडस्ट्री कॉपरेशन ऑफ़ चाइना, चाइना इलेक्ट्रोनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉपरेशन, चाइना नॉर्थ इंडस्ट्रियल ग्रुप कॉपरेशन और चाइना साउथ इंडस्ट्रीज़ ग्रुप कॉपरेशन को छठा, आठंवां, नौवां और 24वां स्थान मिला.

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ने कहा, "चीनी की हथियार कंपनियों को पीएलए के लिए सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम का फायदा हुआ है." साथ ही संस्था ने ये भी कहा कि उसने पहले इन संस्थाओं को अपनी रैंकिंग में शामिल इसलिए नहीं किया था क्योंकि विश्वसनीय डेटा की कमी थी.

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