चीन की LAC में बदलाव की कोशिश स्वीकार नहीं: जनरल बिपिन रावत- प्रेस रिव्यू

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देश के चीफ़ ऑफ़ डिफेन्स सर्विसेज जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल में किसी तरह का कोई बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा.
अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के मुताबिक़ उन्होंने कहा, "सुरक्षा के लिहाज से चीन से साथ लड़ाई की आशंका कम ही है लेकिन सीमा पर तनाव और बिना उकसावे के सैन्य कार्रवाई के कारण संघर्ष बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता."
लद्दाख में बीते छह महीनों से जारी सीमा तनाव को सुलझाने के लिए शुक्रवार को भारतीय और चीनी सैन्य कमांडर की आठवें दौर की बातचीत शुरू हुई है.
अख़बार लिखता है कि जनरल रावत भारत के जाने-माने नेशनल डिफेन्स कॉलेज की 60वी वर्षगांठ के मौक़े पर एक सेमिनार में हिस्सा ले रहे थे.
लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल पर जारी तनाव के लिए उन्होंने "चीन की हरकतों को ज़िम्मेदार ठहराया" और कहा कि भारत लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल में किसी तरह का कोई बदलाव स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि सीमा पर यथास्थिति को बरकरार रखा जाएगा.
अख़बार के अनुसार उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की कड़ी प्रतिक्रिया चीनी सेना लद्दाख में अपने दुस्साहस के अप्रत्याशित परिणामों को झेल रही है.
उन्होंने कहा कि सीमा पर बड़े पैमाने पर संघर्ष की आशंका नहीं है लेकिन चीन और पाकिस्तान की दोस्ती कभी भी "ख़तरा" बन सकती है.
इस बारे में समझाते हुए उन्होंने कहा कि "भारत कई प्रकार की बाहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है. हमारे दो पड़ोसी जो परमाणु हथियारों से लैस हैं उन दोनों के साथ भारत पहले युद्ध कर चुका है. दोनों अब आपस में गठजोड़ कर रहे हैं. इससे क्षेत्रीय अस्थिरता का ख़तरा बढ़ गया है, जो हमारी क्षेत्रीय अखंडता और रणनीतिक सामंजस्य के लिए ख़तरा है."
उन्होंने ये भी कहा कि चीन के साथ भारत के रिश्ते प्रतिस्पर्धी रहने वाले हैं. उन्होंने कहा, "चीन के साथ सीमा विवाद पहले ही चल रहा है, रोड परियोजनाओं को लेकर वो दक्षिण एशिया में अपना प्रभुत्व बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. हम दोनों के बीच असंतुलित आर्थिक संबंध भी हैं. ऐसे में दोनों देशों के संबंध प्रतियोगी बने रहेंगे."
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कोर्ट की मंज़ूरी मिली तो चुनाव के बाद शुरू करेंगे एनआरसी
अख़बार द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार असम के वित्त मंत्री हिमन्ता बिसवा सर्मा ने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट से इजाज़त मिली तो 2021 में होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद असम में नेशनल सिटिज़नशिप रजिस्टर (एनआरसी) का काम शुरू करेंगे.
इससे पहले प्रदेश से मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनेवाल ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की थी. इस दौरान उन्होंने बताया था कि 31 अगस्त 2019 को एनआरसी की जो आख़िरी सूची प्रकाशित हुई थी उसमें से 10 से 20 फ़ीसदी लोगों की फिर से वेरिफिकेशन किए जाने की ज़रूरत है.
असम की बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने एनआरसी को ये कहते हुए ख़ारिज कर दिया था कि राज्य के एनआरसी कोऑर्डिनेटर प्रतीक हजेला ने पूरी प्रक्रिया को ग़लत तरीके से संचालित किया था.
इस सूची में 3.3 करोड़ आवेदकों में से 19 लाख की गिनती नहीं की गई है. नागरिकता पहचान की पुष्टि के लिए उचित दस्तावेज़ न होने के कारण इनके आवेदन को रिजेक्ट कर दिया गया था.
वित्त मंत्री ने इससे पहले कुछ रैलियों में कहा था कि बीजेपी का मानना है कि एनआरसी प्रक्रिया से उन लोगों की पहचान की जा सकेगी जो अवैध रूप से यहां रहते हैं या जिनकी नागरिकता संदेहास्पद है.

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तेलंगाना में अमेज़न 20,761 करोड़ का निवेश करेगी
भारत के तेलंगाना राज्य में अमेज़न वेब सर्विसेस 20,761 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली है.
अख़बार द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार शुक्रवार को कंपनी ने कहा कि को भारत में अपना दूसरा डेटा सेंटर बनाने जा रही है जो 2022 के मध्य तक काम करना शुरू करेगा.
निवेश के बारे में फिलहाल कंपनी ने विस्तार से कुछ नहीं बताया है लेकिन तेलंगाना के आईटी और उद्योग मंत्री केटी रामाराव ने जानकारी दी है कि 20,761 करोड़ रुपये के निवेश से कंपनी राज्य में कई डेटा सेंटर बनाएगी. उन्होंने इसे राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा विदेशी निवेश करार दिया है और कहा है कि तीन एवेलेबिलिटी ज़ोन में कंपनी निवेश करेगी.
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