भारत सरकार ने वीज़ा और यात्रा प्रतिबंधों पर दी छूट, पर्यटक वीज़ा पर छूट अभी भी नहीं - आज की बड़ी ख़बरें

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भारत सरकार ने गुरुवार से सभी विदेशी नागरिकों के साथ-साथ सभी ओसीआई और पीआईओ कार्डधारकों को हवाई या समुद्र मार्ग से भारत की यात्रा करने की अनुमति दे दी है. हालांकि अभी भी पर्यटक वीज़ा पर विदेशियों के भारत आने पर रोक रहेगी.
पीआईबी के अनुसार, भारत सरकार ने कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने के लिए इस साल फ़रवरी में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के आवागमन को प्रतिबंधित करने के लिए कई क़दम उठाए थे. लेकिन अब भारत सरकार ने यात्रा के इच्छुक विदेशी और भारतीय नागरिकों को अधिक श्रेणियों में वीज़ा देने और यात्रा प्रतिबंधों में क्रमिक छूट देने का फ़ैसला लिया है.
इसके तहत अधिकृत हवाई अड्डों और बंदरगाह के आव्रजन चेक पोस्ट के माध्यम से हवाई या पानी मार्ग से प्रवेश करने के लिए पर्यटक वीज़ा को छोड़कर, सभी ओसीआई और पीआईओ कार्ड धारकों को भारत आने की अनुमति देने का फ़ैसला लिया गया है.
इसमें वंदे भारत मिशन, एयर ट्रांसपोर्ट बबल की व्यवस्था के तहत या नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अनुमति प्राप्त या निजी उड़ानें भी शामिल हैं.
हालांकि यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को क्वरंटीन होना होगा और कोविड-19 को लेकर जारी किये गए सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा.
इस श्रेणीबद्ध छूट के तहत भारत सरकार ने सभी मौजूदा वीज़ा (इलेक्ट्रॉनिक वीज़ा, टूरिस्ट वीज़ा और मेडिकल वीज़ा को छोड़कर) को तत्काल प्रभाव से बहाल करने का फ़ैसला किया है.
मोदी को प्रेस संस्थाओं की चिट्ठी, पत्रकारों के ख़िलाफ़ मामले वापिस लिए जाएं

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दो अंतरराष्ट्रीय प्रेस संस्थाओं, द इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट और इंटरनेशनल फ़ेडरेशन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त पत्र लिखकर, उनसे यह आग्रह किया है कि 'वे पत्रकारों के उत्पीड़न को रोकने के लिए तत्काल ज़रूरी क़दम उठायें.'
दोनों संस्थाएं संपादकों, पत्रकारों और मीडिया में काम करने वालों की अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्थाएं हैं जिन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि 'पीएम मोदी राज्य सरकारों को पत्रकारों के ख़िलाफ़ सभी मामले वापस लेने का निर्देश दें.'
इस पत्र में कहा गया है कि पिछले कुछ महीनों में पत्रकारों पर अपना काम करने के बदले आईपीसी के सेक्शन-124ए के तहत राजद्रोह के मुक़दमें भी लगाये गये हैं जिन्हें वापस लिया जाना चाहिए.
इस पत्र में केरल के पत्रकार सिद्दक़ी कप्पन की गिरफ़्तारी पर विशेष रूप से चिंता ज़ाहिर की गई है जो हाथरस केस की रिपोर्टिंग कर रहे थे.
पत्र के अनुसार, कोरोना महामारी फैलने के बाद पत्रकारों के ख़िलाफ़ दर्ज मामलों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है.
इस पत्र में एक रिपोर्ट का हवाला देकर कहा गया है कि 25 मार्च से 31 मई के बीच, महामारी कवर करने वाले 55 पत्रकारों को निशाना बनाया गया और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा उन पर केस किये गए.
इन संस्थाओं ने लिखा है कि "स्वास्थ्य संकट का उपयोग उन लोगों को चुप कराने के लिए किया जा रहा है, जिन्होंने सरकार की प्रतिक्रिया में कमी को उजागर किया है. मगर स्वतंत्र मीडिया का होना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है."

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कोविड-19 वैक्सीन: एक वॉलंटियर की मौत, पर ट्रायल जारी रहेंगे
ब्राज़ील के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा है कि कोविड-19 के वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल के दौरान एक वॉलंटियर की मौत हो गई है लेकिन इसके बावजूद ट्रायल जारी रहेंगे.
ब्राज़ील में ऑक्सफोर्ड की बनाई कोरोना वायरस वैक्सीन का ट्रायल चल रहा है जिसका एस्ट्राज़ेनिका बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ऑक्सफोर्ड ने आकलन के बाद टेस्टिंग जारी रखने की बात की है और एक बयान जारी कर कहा है, "क्लिनिकल ट्रायल की सुरक्षा को लेकर कोई चिंताएं नहीं हैं."
इस मुद्दे पर अब तक एस्ट्राज़ेनिका ने कोई टिप्पणी नहीं की है.
रॉयटर्स ने एक सूत्र के हवाले से ख़बर दी कि जिस वॉलंटियर की मौत हुई है अगर उसे कोविड-19 की वैक्सीन दी गई होती तो ट्रायल बीच में ही रोक लिए जाते. लेकिन उन्हें कोविड-19 की वैक्सीन नहीं दी गई बल्कि मेनिन्जाइटिस की वैक्सीन दी गई थी.
ब्राज़ील में हो रहे तीसरे चरण के इन क्लिनिकल ट्रायल्स का संचालन कर रही साओ पालो की फेडेरल यूनिवर्सिटी का कहना है कि इस संबंध में एक स्वतंत्र समीक्षा समिति ने भी ट्रायल जारी रखने का सुझाव दिया है.
इससे पहले यूनिवर्सिटी ने कहा था कि जिस वॉलंटियर की मौत हुई वो ब्राज़ीलियाई नागरिक थे.

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सीएनएन ब्राज़ील के अनुसार जिस वॉलंटियर की मौत हुई है वे 28 साल के थे और रियो डी जेनिरो के रहने वाले थे. उनकी मौत कोविड-19 के कारण हुए कॉम्लिकेशन्स की वजह से हुई है.
यूनिवर्सिटी के एक प्रवक्ता ने कहा है कि अब तक देश के छह शहरों में आठ हज़ार वॉलंटियर्स को चिन्हित कर लिया गया है और उन्हें वैक्सीन की पहली डोज़ दे दी गई है. कई लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज़ भी दी गई है.
ब्राज़ील सरकार का कहना है कि उसकी योजना ऑक्सफोर्ड की बनाई वैक्सीन ख़रीदने की है जिसे रियो डी जेनिरो में मौजूद फियोक्रूज़ बायोमेडिकल रीसर्च सेंटर में बड़े पैमाने पर बनाया जाएगा.
ब्राज़ील के बूटानटान इंस्टीट्यूट में इस वक्त चीनी कंपनी साइनोवैक बायोटेक कंपनी की कोविड-19 वैक्सीन का टेस्ट भी चल रहा है. हालांकि ब्राज़ीलियाई राष्ट्रपति ज़ाएर बोलसोनारो का कहना है कि फिलहाल साइनोवैक की वैक्सीन ख़रीदने की उनकी कोई योजना नहीं है.
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