कृषि विधेयक पर बोले मोदी: दशकों तक राज करने वाले भ्रम फैला रहे हैं

मोदी
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किसान विधेयक को लेकर हो रहे विरोधों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सरकार की स्थिति स्पष्ठ करते हुए कहा कि राजनीतिक पार्टियां विधेयक को लेकर दुष्प्रचार कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि किसानों को एमएसपी का फ़ायदा नहीं मिलने की बात ग़लत है.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बिहार की कई परियोजनाओं का शुभारंभ करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "जो लोग दशकों तक देश में शासन करते रहें हैं, सत्ता में रहे हैं, देश पर राज किया है, वो लोग किसानों को भ्रमित कर रहे हैं, किसानों से झूठ बोल रह हैं."

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मोदी ने कहा कि विधेयक में वही चीज़ें हैं जो देश में दशकों पर राज करने वालों ने अपने घोषणापत्र में लिखी थी. मोदी ने कहा कि यहां "विरोध करने के लिए विरोध" हो रहा है.

उन्होंने कहा बिचौलिए जो किसानों की कमाई का एक बड़ा हिस्सा खा जाते थे, उनसे बचने के लिए ये विधेयक लाना ज़रूरी था.

बिना किसी का नाम लिए मोदी ने कहा, "किसान देख रहा है कि कौन से लोग बिचौलियों के साथ हैं." एमएसपी के लेकर मोदी ने कहा कि यह बात की किसानों से धान-गेंहूं सरकार नहीं ख़रीदेगी ग़लत हैं, झूठ है और मनगढ़ंत है.

किसान

उन्होंने कहा, "सरकार उचित मूल दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी रहेगी. सरकार की ख़रीद आगे भी जारी रहेगी."

उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों के मुताबिक़ किसान अपनी फ़सल किसी भी बाज़ार में अपनी मनचाही क़ीमत पर बेच सकेगा. इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के अधिक अवसर मिलेंगे

मोदी ने इसे "आज़ादी के बाद किसानों को किसानी में एक नई आज़ादी" देने वाला विधेयक बताया.

देशभर के किसान विरोध कर रहे हैं

कृषि सुधार के दावों के साथ केंद्र सरकार ने जो तीन नए विधेयक पेश किए हैं, उनका देश भर के किसान विरोध कर रहे हैं. किसान संगठनों का आरोप है कि नए क़ानून के लागू होते ही कृषि क्षेत्र भी पूँजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा और इसका नुक़सान किसानों को होगा.

किसान

तीन नए विधेयकों में आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव के साथ-साथ ठेके पर खेती को बढ़ावा दिए जाने की बात कही गई है और साथ ही प्रस्ताव है कि राज्यों की कृषि उपज और पशुधन बाज़ार समितियों के लिए गए अब तक चल रहे क़ानून में भी संशोधन किया जाएगा.

हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफ़ा

विधेयक को लेकर गुरुवार को हरसिमरत कौर बादल ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफ़ा देकर अपनी पार्टी शिरोमणि अकाली दल के कड़े रुख़ का संकेत दिया था.

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हरसिमरत का इस्तीफ़ा तीन अध्यादेशों के ख़िलाफ़ है. ये तीन अध्यादेश हैं- उत्पाद, व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश 2020, किसान सशक्तीकरण और संरक्षण अध्यादेश और आवश्यक वस्तु (संशोधन).

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केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद हरसिमरत कौर बादल ने ट्वीट किया, "मैंने केंद्रीय मंत्री पद से किसान विरोधी अध्यादेशों और बिल के ख़िलाफ़ इस्तीफ़ा दे दिया है. किसानों की बेटी और बहन के रूप में उनके साथ खड़े होने पर गर्व है."

अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल का कहना है कि उनकी पार्टी से इन अध्यादेशों को लेकर संपर्क नहीं किया गया, जबकि हरसिमरत कौर ने इसे लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि 'पंजाब और हरियाणा के किसान इससे ख़ुश नहीं हैं.'

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