यूपी 'ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस' में दूसरे नंबर से गदगद, पंजाब-ओडिशा को रैंकिंग पर एतराज़

योगी आदित्यनाथ

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    • Author, शुभम किशोर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 4 मिनट

भारत सरकार की ओर से ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में आंध्र प्रदेश पहले और उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है. उत्तर प्रदेश ने पिछले साल के मुकाबले 10 स्थान की छलांग लगाई.

उत्तर प्रदेश सरकार इसे उपलब्धि की तरह पेश कर रही है लेकिन इस रैंकिंग को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. ओडिशा और पंजाब ने इस रैंकिंग को लेकर शिकायत दर्ज करने की बात कही है.

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पाँच सितंबर को ये रैंकिंग जारी की. केंद्र सरकार की इस सालाना रैंकिंग का मक़सद यह बताना है कि आसान व्यापार की प्रक्रिया में सुधार के लिए कौन से राज्य कितना बेहतर काम कर रहे हैं.

साल 2019 की सालाना रैंकिंग में शीर्ष 10 राज्य:

1.आंध्र प्रदेश

2.उत्तर प्रदेश

3.तेलंगाना

4.मध्य प्रदेश

5.झारखंड

6.छत्तीसगढ़

7.हिमाचल प्रदेश

8.राजस्थान

9.पश्चिम बंगाल

10.गुजरात

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यूपी कैसे बना नंबर 2 राज्य?

केंद्र सरकार ने राज्यों की रैंकिंग तो जारी की है, लेकिन उसमें यह नहीं बताया गया है कि किन पैमानों पर राज्यों को कितने अंक मिले हैं. रैंकिंग से जुड़ी प्रेस रिलीज़ में बताया गया कि बिज़नेस रिफ़ॉर्म एक्शन प्लान में 12 अलग अलग क्षेत्रों से जुड़े 180 बदलावों या रिफॉर्म का ज़िक्र किया गया था जिनमें सिंगल विंडो सिस्टम, श्रम, पर्यावरण, एक्सेस टू इंफॉर्मेशन शामिल हैं.

लेकिन केंद्र सरकार ने यह नहीं बताया है कि किस राज्य को किस बदलाव के लिए कितने अंक दिए गए थे.

योगी आदित्यनाथ

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उत्तर प्रदेश की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ में बताया गया कि, "सुझाए गए 187 सुधारों में से उत्तर प्रदेश द्वारा 186 सुधार लागू किए गए. प्रदेश की इस उपलब्धि में सिंगल विंडो पोर्टल 'निवेश मित्र' का महत्वपूर्ण योगदान है. विगत 2 वर्षों में प्राप्त 2,29,936 अनापत्ति/लाइसेंस प्रकरणों में से निवेश मित्र के माध्यम से 94 प्रतिशत मामलों को निस्तारित करते हुए उद्यमियों को अनापत्ति/लाइसेंस निर्गत किए गए."

"कारोबारी सुगमता को और व्यापक बनाने तथा सम्पूर्ण प्रदेश में 'ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस' सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा समस्त 75 जनपदों के लिए 'ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस' की जनपदवार रैंकिंग निर्धारित करने की व्यवस्था की गई है. इससे जनपदों के मध्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित होगी, प्रदेश में निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी और 'ईज ऑफ़ डुइंग बिजनेस' में वृद्धि होगी."

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हालांकि कुछ जानकार मानते हैं कि रैंकिंग से यह अर्थ निकालना सही नहीं होगा कि ज़मीन पर बहुत बड़े बदलाव आ गए हैं.

बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार के लखनऊ के ब्यूरो चीफ़ सिद्धार्थ कालहंस बताते हैं, "इस रैंकिंग के पीछे बड़ा कारण है कि केंद्र सरकार ने जो सुझाव दिए थे, वो माने गए. ये रैंकिंग नीतियों में सुधार के लिए अपनाई गई प्रक्रिया के लिए मिली है, निवेश के आ जाने से या इंडस्ट्री के बढ़ जाने से इसका ताल्लुक नहीं है. इस छलांग के पीछे सैद्धांतिक कारण ज़्यादा नज़र आ रहे है, व्यावाहारिक कारण कम,"

उनके मुताबिक यूपी को लेकर देश विदेश के बड़े निवशकों के अंदर जो छवि है, उसमें कोई बदलाव नहीं दिख रहा.

दूसरे राज्यों को क्या है आपत्ति

ओडिशा और पंजाब ने रैंकिंग को लेकर शिकायत दर्ज करने की बात कही है. इस रैंकिंग में ओडिशा को 29वां स्थान दिया गया है.

ओडिशा में बीबीसी के सहयोगी सुब्रत कुमार पति से बात करते हुए ओडिशा के उद्योग मंत्री दिब्य शंकर मिश्रा ने कहा, "ये रैंकिंग सिर्फ साल 2018 की एक तय तारीख की है, पिछले 2 सालों में राज्य में कई बदलाव आए है. अप्रैल से सितंबर 2019 के बीच ओडिशा में सबसे ज़्यादा निवेश आए हैं, जो कि पूरे देश का 18 प्रतिशत है. कोविड के दौरान भी राज्य को 200 से ज़्यादा प्रस्ताव मिले हैं."

नवीन पटनायक

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उनके मुताबिक ओडिशा ने सुझाए गए 187 बदलावों में से 180 बदलाव लागू किए लेकिन कुछ ऐसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रैंकिंग में ऊपर रखा गया है जिन्होंने कम बदलाव लागू किए हैं. ओडिशा ने इसके ख़िलाफ शिकाय़त करने का फ़ैसला किया है.

19 वें नंबर पर आने वाले प्रदेश पंजाब की सरकार ने भी ऐसे ही सवाल उठाए हैं.

पंजाब के डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडस्ट्रीज़ एंड कॉमर्स के डायरेक्टर सिबिन सी नेबीबीसी से कहा, "हम एक बहुत बेहतर रैंकिंग की उम्मीद में थे. सरकार को बताना चाहिए कि किस राज्य ने किस क्षेत्र में कैसा काम किया है, लक्षद्वीप जैसा केंद्र शासित प्रदेश जहां उद्योग नहीं है, उसे भी हमसे बेहतर रैंकिंग मिली है."

सिबिन ने बताया कि वो केंद्र सरकार से डिटेल आने का इंतज़ार कर रहे हैं, उसके बाद शिकायत करने पर फैसला लिया जाएगा.

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विश्व बैंक देशों के रैंकिंग पर रोक लगा चुका है

ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस को लेकर दुनियाभर के देशों को भी रैंकिंग दी जाती थी, लेकिन विश्व बैंक ने उसमें होने वाली अनियमितताओं के कारण उसे रोकने का फ़ैसला किया.

27 अगस्त को जारी किए गए एक बयान में विश्व बैंक ने कहा, "पिछले 17 सालों से डूइंग बिज़नेस रिपोर्ट देशों के एक महत्वपूर्ण टूल रहा है. साल 2018 और 2020 के डेटा में कई अनियमिताएं देखी गईं. डेटा में बदलाव डूइंग बिज़नेस के तरीकों से मेल नहीं खाते. हमारे लिए हमारी विश्वसनीयता और निष्पक्षता सर्वोपरि है."

विश्व बैंक ने कहा कि वो इसकी समीक्षा करेंगे और उसके बाद ही रैंकिंग को लेकर कोई फ़ैसला करेंगे.

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