कुलभूषण जाधव के लिए वकील नियुक्त हो, तीसरी बार कन्सुलर ऐक्सेस मिले: इस्लामाबाद हाईकोर्ट - आज की बड़ी ख़बरें

कुलभूषण जाधवा
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पाकिस्तान में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि मौत की सज़ा सुनाए गए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को तीसरी बार कॉन्सुलर ऐक्सेस दिया जाए और उनके लिए एक वकील भी तय किया जाए.

पाकिस्तान की क़ैद में मौजूद कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी सरकार भारत का जासूस बताती है जबकि भारत का कहना है कि वो एक पूर्व नौसेना अधिकारी और बिज़नेसमैन हैं.

सोमवार को इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अतहर मिनल्लाह ने सुनवाई करते हुए सरकार से कहा कि वो भारतीय अधिकारियों से संपर्क करें.

अदालत का कहना था, "भारत को कुलभूषण जाधव के लिए वकील नियुक्त करने का एक और मौक़ा दें. उनके विदेश कार्यालय के ज़रिए उनसे संपर्क करें."

अदालत ने ये भी आदेश दिया कि कमांडर कुलभूषण जाधव को ख़बर करें कि इस बारे में हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही है.

हाईकोर्ट ने पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल ख़ालिद जावेद से कहा कि कुलभूषण जाधव को तीसरी बार कॉन्सुलर ऐक्सेस दिया जाए.

हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने कहा कि कमांडर जाधव को निष्क्ष ट्रायल का मौक़ा मिलना चाहिए. अदालत ने इस बारे में किसी को भी कोई बयान देने पर पाबंदी लगा दी है.

इस मौक़े पर अटॉर्नी जनरल ने कहा, "हमलोग ख़ुश होंगे अगर भारत कुलभूषण जाधव के लिए वकील नियुक्त करता है तो."

अदालत ने तीन सितंबर को अगली सुनवाई करने की तारीख़ दी है.

कौन हैं कुलभूषण जाधव

कुलभूषण जाधव के बारे में पाकिस्तान का दावा है कि वो भारतीय नौसेना के मौजूदा अधिकारी हैं जिन्हें 2016 में पाकिस्तान के बलूचिस्तान से गिरफ़्तार किया गया था.

पाकिस्तान एक लंबे अर्से से भारत पर आरोप लगाता रहा है कि वो बूलचिस्तान में सक्रिय पाकिस्तान विरोधी चरमपंथी गुटों की मदद करता है.

भारत इन आरोपों से इनकार करता रहा है और कुलभूषण जाधव के बारे में भारत का कहना है कि वो एक सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और वो अपने बिज़नेस के सिलसिले में ईरान गए थे और पाकिस्तान-ईरान सीमा पर उनको अग़वा किया गया था.

पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में कुलभूषण जाधव को जासूसी और दहशतगर्दी का दोषी क़रार देते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी.

इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ भारत ने मई 2017 में अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) का दरवाज़ा खटखटाया था और माँग की थी कि कुलभूषण जाधव की सज़ा ख़त्म की जाए और उनकी रिहाई के आदेश दिए जाएं.

आईसीजे ने भारत की इस माँग को ठुकरा दिया था लेकिन पाकिस्तान को आदेश दिया था कि वो जाधव को कॉन्सुलर ऐक्सेस दें और उनकी सज़ा पर पुनर्विचार करे. अदालत ने ये भी कहा था कि जब तक पुनर्विचार याचिका पर फ़ैसला नहीं आ जाता कुलभूषण जाधव को फाँसी न दी जाए.

आईसजे के फ़ैसले के बाद पाकिस्तान अब तक दो बार कुलभूषण जाधव को कॉन्सुलर ऐक्सेस दे चुका है. इसके अलावा पाकिस्तान ने अपने यहां एक अध्यादेश लाकर कुलभूषण जाधव को सैन्य अदालत के ज़रिए दी गई सज़ा के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के सिविल कोर्ट में अपील करने का अधिकार दिया था.

अध्यादेश के अनुसार कुलभूषण के पास इसके लिए 60 दिनों का समय था लेकिन 60 दिन बीत जाने के बाद भी कुलभूषण जाधव अपील नहीं कर सके.

पाकिस्तान का कहना था कि कुलभूषण जाधव सैन्य अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील नहीं करना चाहते हैं, जबकि भारत का कहना था कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को मजबूर कर दिया है कि वो अपनी सज़ा के ख़िलाफ़ अपील न करें.

मामला जब इस्लामाबादा हाईकोर्ट पहुँचा तो सोमवार को हाईकोर्ट ने तीसरी बार कॉन्सुलर ऐक्सेस देने और एक बार फिर उन्हें अपना वकील करने का मौक़ा देना का आदेश दिया है.

श्रीनगर में चार-पांच अगस्त को क़र्फ्यू

आर्टिकल 370 को निरस्त किए जाने के एक साल पूरा होने से ठीक पहले चार और पांच अगस्त को श्रीनगर में क़र्फ्यू लागू किया जा रहा है.

श्रीनगर

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श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर शाहिद इक़बाल चौधरी ने इस बाबत आदेश जारी किया है. आदेश के मुताबिक श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पास ऐसे इनपुट मिल रहे थे जिसके मुताबिक पाकिस्तान प्रायोजित समूह 5 अगस्त को ब्लैक डे मनाने वाले थे, इस दौरान हिंसक प्रदर्शन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है.

इस आशंका के चलते ही श्रीनगर में दो दिनों के लिए क़र्फ्यू लगाने की घोषणा की गई है. हालांकि कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए कई इलाकों में पाबंदियां पहले से ही लागू हैं. हालांकि इस दौरान मेडिकल स्टाफ़ और आवश्यक सेवा के लिए ज़रूरी लोग कोविड-19 ड्यूटी पास और मान्य आदेश पत्र के साथ मूवमेंट कर सकते हैं.

क्या टिकटॉक पर बैन से पलटे डोनाल्ड ट्रंप?

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अमरीकी टेक कंपनी 'माइक्रोसॉफ़्ट' ने कहा है कि वो लोकप्रिय शॉर्ट वीडियो शेयरिंग ऐप 'टिकटॉक' के अमरीका समेत कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में संचालन के अधिकार लेना चाहती है जिसके लिए वो चीनी कंपनी बाइटीडांस से बातचीत जारी रखेगी.

एक बयान में कंपनी ने कहा है कि 'वो 15 सितंबर तक इस बातचीत को किसी अंजाम तक पहुँचाना चाहते हैं.'

कंपनी के सीईओ सत्या नडेला और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रविवार को हुई मुलाक़ात के बाद माइक्रोसॉफ़्ट ने यह बयान जारी किया है.

हालांकि शुक्रवार को ही राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि 'वे अमरीका में टिकटॉक को बैन करने वाले हैं.'

कंपनी ने कहा है कि 'वो इस बात को सुनिश्चित करेगी कि टिकटॉक इस्तेमाल करने वाले सभी अमरीकी यूज़र्स का डेटा अमरीका में ही रहे और उसे कहीं बाहर ट्रांसफ़र ना किया जाये.'

माइक्रोसॉफ़्ट ने अपने बयान में यह भी कहा है, "कंपनी राष्ट्रपति ट्रंप की चिंताओं का अच्छे से समझती है. हम टिकटॉक के संचालन में इसलिए भी हिस्सा चाहते हैं ताकि सुरक्षा की समीक्षा का काम पूरा किया जा सके और जो आर्थिक फ़ायदे अमरीका को मिलने चाहिए, वो मिल सकें."

हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि चीनी कंपनी के साथ यह डील हो पायेगी या नहीं, इसे लेकर फ़िलहाल कुछ भी यक़ीन से नहीं कहा जा सकता.

bbc

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसमें दावा किया गया है कि ट्रंप ने भारी दबाव के बाद, ख़ासकर अपनी ही पार्टी के कुछ बड़े नेताओं के कहने पर टिकटॉक को लेकर अपनी राय बदली है और वे दोनों कंपनियों को समझौते के लिए 45 दिन देने को तैयार हुए हैं.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमरीकी सरकार की 'कमेटी ऑन फ़ॉरेन इनवेस्टमेंट इन द यूएस' की निगरानी में माइक्रोसॉफ़्ट और बाइटीडांस के बीच ये समझौता होना है और इस सरकारी कमेटी को यह अधिकार होगा कि वो इन दोनों कंपनियों के बीच समझौते पर प्रतिबंध लगा सके.

चीन के सरकारी अख़बार 'चाइना डेली' ने सोमवार को एक रिपोर्ट में चीनी कंपनी बाइटीडांस को अमरीकी 'विच हंट' का शिकार बताया है और लिखा है कि अमरीका अब तक कोई सबूत नहीं दे पाया है कि 'चीनी ऐप किस तरह उनकी सुरक्षा के लिए ख़तरनाक है.'

माइक्रोसॉफ़्ट और चीनी कंपनी बाइटीडांस के बीच अगर यह समझौता होता है तो यह माइक्रोसॉफ़्ट के लिए एक 'बड़ी क़ामयाबी' होगी.

सुशांत सिंह राजपूत

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सुशांत केस की जाँच के लिए मुंबई पहुँचे बिहार पुलिस के अधिकारी 'ज़बरन क्वारंटीन' किये गए

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का कहना है कि सुशांत सिंह राजपूत मामले की जांच करने गए आईपीएस विनय तिवारी को मुंबई में जबरन क्वारंटीन कर दिया गया है.

विनय तिवारी बिहार पुलिस की तरफ से मुंबई पहुंची टीम का नेतृत्व करने के लिए रविवार को मुंबई पहुंचे थे.

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सुशांत के पिता केके सिंह ने पटना में रिया चक्रवर्ती के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई है जिसके बाद ही बिहार पुलिस की एक टीम मुंबई में मामले की जांच-पड़ताल कर रही है.

इसी टीम का नेतृत्व करने के लिए विनय तिवारी मुंबई पहुँचे थे.

विनय तिवारी को क्वारंटीन करने की ख़बर की पुष्टि करते हुए बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने एक ट्वीट किया है.

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उन्होंने कहा, "आईपीएस ऑफ़िसर विनय तिवारी आज मुंबई पहुंच गए. वे पटना से ऑफ़िशियल ड्यूटी के तहत मुंबई में जांच कर रही टीम का नेतृत्व करने के लिए पहुंचे थे. लेकिन वहां उन्हें बीएमसी के अधिकारियों द्वारा जबरदस्ती रात 11 बजे क्वारंटीन कर दिया गया. अनुरोध के बावजूद उन्हें आईपीएस मेस में आवास नहीं किया गया था जिसके बाद वो गोरेगांव (मुंबई) के एक गेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे." 

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बीएमसी ने इस बारे में स्पष्टीकरण देते हुए ट्वीट किया है, "विनय तिवारी को मौजूदा गाइडलाइंस के अनुसार ही क्वारंटीन किया गया है.''

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सुशांत सिंह राजपूत मामले में मुंबई पुलिस पर सहयोग न करने के लगातार आरोप लग रहे हैं. इस बीच इस मामले की सीबीआई जांच की भी मांग की जा रही है. हालांकि महाराष्ट्र और बिहार पुलिस दोनों ही का कहना है कि वे जांच में सक्षम हैं.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पहले ही सीबीआई जांच की मांग को दरकिनार करते हुए कह चुके हैं कि उनके राज्य की पुलिस इस मामले को सुलझाने में सक्षम है और अगर किसी के पास कोई सुबूत है तो वो पेश करे.

आईपीएस विनय तिवारी

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वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि एफ़आईआर करने वाले सुशांत सिंह राजपूत के पिता के के सिंह अगर सीबीआई जाँच की माँग करते हैं तो ये मामला सीबीआई को दिया जा सकता है.

एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में नीतीश कुमार ने कहा "राज्य सरकार मामले को मज़बूती से देख रही है. बहुत से लोगों ने सीबीआई जाँच की माँग की है, सुशांत सिंह के पिता ने केस दर्ज किया है. पुलिस का काम है उसी पर जाँच करना और आगे बढ़ना. इसमें बिहार का कोई रोल नहीं है. हाँ,अगर जिन्होंने इस मामले में केस दर्ज किया है, अगर वो सीबीआई जाँच की माँग करते हैं तो फिर बिहार सरकार सीबीआई जाँच की सिफ़ारिश कर सकती है."

महाराष्ट्र और बिहार सरकार के बीच जारी इस विवाद को आगामी बिहार चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है.

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