चीन ने भारत के ऐप बैन का किया विरोध, कहा ग़लती सुधारो - प्रेस रिव्यू

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बुधवार के अख़बारों में एक अहम ख़बर है कि चीन ने मंगलवार को चीनी ऐप बैन करने के भारत के हालिया फ़ैसले का विरोध जताया है और भारत को कहा है कि वो अपनी ये ग़लती सुधारे.
चीन ने कहा कि ये जानबूझ कर किया गया और चीन अपने कारोबारों की सुरक्षा के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाएगा.
दरअसल भारत ने चीनी कंपनियों से जुड़े कुछ ऐप्स बैन कर दिए हैं और इसके पीछे वजह बताई गई कि ये ऐप कथित तौर पर भारत के राष्ट्रीय हित के लिए नुक़सानदायक गतिविधियों में शामिल थे.
भारत ने हाल में 47 और ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया है जो टिकटॉक समेत 59 चीनी ऐप्स के क्लोन थे. मतलब, पहले से बैन ऐप के जैसे ऐप बनाकर उतार दिए गए थे.
कुल 250 चीनी ऐप पर सरकार नज़र रख रही है और जो ख़तरा लग रहा है उसे हटाया जा रहा है.
चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने एक बयान में कहा कि वीचैट ऐप पर प्रतिबंध के मामले को भारतीय पक्ष के सामने उठाया गया है.
उन्होंने कहा, "हमने संबंधित रिपोर्टों को ध्यान में लिया है. 29 जून को भारतीय सरकार ने चीन से जुड़े वीचैट समेत 59 चीनी ऐप बैन कर दिए. जिससे चीनी कंपनियों के वैध अधिकारों और हितों को गंभीर रूप से नुक़सान पहुंचा है. चीनी पक्ष ने भारतीय पक्ष के सामने ये मामला गंभीरता से उठाया है और अपनी ग़लतियों को सुधारने के लिए कहा है."
राम मंदिर भूमि पूजन के लिए चैनलों को निर्देश, 'विवादित' पक्षों को ना बुलाएं

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अयोध्या ज़िला प्रशासन ने निर्देश दिया है कि जो समाचार चैनल पांच अगस्त को होने वाले राम मंदिर के भूमि पूजन को कवर करना चाहते हैं, उन्हें लिखित में देना होगा कि वो किसी डिबेट के लिए "विवादित पक्षकार" को नहीं बुलाएंगे. साथ ही उन्हें ये भी सुनिश्चित करना होगा कि वो किसी धर्म, समुदाय या किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी नहीं करेंगे.
अंडरटेकिंग का जो फॉरमेट ज़िला प्रशासन ने तैयार किया है, उसके मुताबिक़, अगर टीवी चैनल की वजह से कोई लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बनती है तो उन चैनलों के प्रमुखों को इसका ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा.
इस अंडरटेकिंग पर मीडिया हाउस के प्रमुखों को हस्ताक्षर करना होगा, जिसपर लिखा है, "क़ानून व्यवस्था को बनाए रखा जाएगा तथा अगर किसी प्रकार से कोई गड़बड़ी होगी तो इसकी ज़िम्मेदारी मेरी व्यक्तिगत रूप से होगी."
न्यूज़ चैनलों को जो फॉरमेट भेजा गया है, उसमें नौ बिंदु हैं, जिसमें ये भी शामिल है कि कार्यक्रम के लिए कोई सार्वजनिक जगह ना चुनें, बल्कि कार्यक्रम प्राइवेट इंडोर स्पेस में किया जाए.
इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखने के लिए कहा गया है. साथ ही पैनल में शामिल लोगों के अलावा कोई दर्शक या भीड़ ना हो.
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उप निदेशक, सूचना, मुरलीधर सिंह ने कहा, "मीडिया को कार्यक्रम कवर करने में कोई दिक़्क़त नहीं होगी, सारी तैयारियां कर ली गई हैं. अलग से मीडिया सेंटर और लाइव कास्ट बनाया गया है. लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के लिए और कोविड को देखते हुए न्यूज़ चैनलों को पहले से अनुमति लेनी होगी और सुनिश्चित करना होगा कि भीड़ इकट्ठा ना हो. कोई विवादित बयान नहीं होने चाहिए और सही प्रोटोकॉल का पालन करना होगा."

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चुनाव को लेकर उपराज्यपाल के बयान पर ऐतराज़
इंडियन एक्सप्रेस समेत तमाम अख़बारों के पहले पन्ने पर ख़बर है कि निर्वाचन आयोग ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल जीसी मूर्मू के केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव के समय को लेकर मीडिया में दिए बयानों पर आपत्ति जताई है.
एक कड़े बयान में आयोग ने कहा कि चुनावों का समय आदि तय करने के लिए केवल चुनाव आयोग ही अधिकृत है.
आयोग की ये प्रतिक्रिया मूर्मू के पिछले हफ़्ते दिए कई इंटरव्यूज़ को लेकर आई है. द ट्रिब्यून को दिए एक इंटरव्यू में राज्यपाल ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा का चुनाव परिसीमन पूरा होने बाद होगा.
जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां फिर से शुरू होने के सवाल पर मूर्मू ने हिंदुस्तान टाइम्स को कहा था कि "परिसीमन पर फ़ैसला लेने का अधिकार चुनाव आयोग को है. कोविड के अलावा चुनाव कराने में मुझे कोई और अड़चन नज़र नहीं आती."
ऐसे ही एक सवाल के जवाब में उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को कहा था कि कोविड-19 की वजह से जम्मू-कश्मीर के पंचायत चुनाव नहीं हो पा रहे हैं.
विधानसभा चुनाव पर उन्होंने कहा था, "दूसरी बात ये है कि परिसीमन समिति का गठन हो चुका है. अब परिसीमन का काम शुरू होगा. विधानसभा चुनाव भी इसी के साथ या इसके बाद कराए जाएंगे. तो इसका काम साथ में चल रहा है. मुझे लगता है रजनीतिक (वैक्यूम) अस्थाई है. "
विधान सभा चुनाव के समय पर उन्होंने कहा था, "चुनाव आयोग को फ़ैसला लेना होगा कि वो चुनाव पहले वाले परिसीमन के हिसाब से कराएंगे या वो नए परिसीमन के मुताबिक़ काम करेंगे. मुझे लगता है ये साल ख़त्म होने से पहले प्रक्रिया शुरू हो जाएगा."
चुनाव आयोग ने गुरुवार को कहा कि इस तरह के बयान उनके मेंडेट में हस्तक्षेप करते हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि "अच्छा होगा कि चुनाव आयोग के अलावा दूसरी अथॉरिटी इस तरह के बयान देने से बचे, जो वर्चुअली चुनाव आयोग के संवैधानिक मेंडेट में हस्तक्षेप करने के बराबर है."

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यलगार परिषद मामले में डीयू के प्रोफेसर गिरफ्तार
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक़, राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर हनी बाबू मुसालियरवीट्टिल थारियाल को यलगार परिषद मामले में गिरफ्तार कर लिया. आरोप है कि यलगार परिषद के कार्यक्रम में दिए गए भड़काऊ भाषणों की वजह से जनवरी 2018 में कथित तौर पर भीमा कोरोगांव हिंसा भड़की थी.
54 वर्षीय हनी बाबू उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर ज़िले में रहते हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के अंग्रेजी भाषा विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं.
बीते कुछ दिनों से जारी पूछताछ के बाद एनआईए ने उन्हें मुंबई से गिरफ्तार किया. एनआईए ने एक बयान में दावा किया कि हनी बाबू नक्सल गतिविधियों और माओवादी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे.

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तीन अभ्यारण्यों में कोई बाघ नहीं
हिंदुस्तान अख़बार की ख़बर के मुताबिक़, देश के मिज़ोरम के डंपा, पश्चिम बंगाल के बक्सा और झारखंड बेतला अभ्यारण्यों में एक भी बाघ नहीं है. पिछले साल किए गए बाघों के आकलन पर आधारित एक रिपोर्ट में ये पता चला.
पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक 231 बाघ उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में मौजूद हैं.
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