सोनिया गांधी ने तेल की बढ़ी हुई क़ीमतों को बताया 'जनता से वसूली'

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पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में हो रही बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर जनता से वसूली करने का आरोप लगाया है. वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि 'मांग में तेज़ी के कारण तेल के दाम में अस्थिरता आई है.'
लॉकडाउन के बीच लगातार तेल की क़ीमतें बढ़ने के विरोध में कांग्रेस ने आज देशभर में प्रदर्शन किया. इस दौरान पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कार्यकर्ताओं को वीडियो के ज़रिये संबोधित किया.
इसके अलावा, सोनिया गांधी ने लॉकडाउन के बाद से तेल की क़ीमतों में 22 बार बढ़ोतरी होने पर कहा कि 'सरकार का काम संकट के समय जनता की मदद करना था न कि उनकी गाढ़ी कमाई से मुनाफ़ा कमाना.’
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतें जब लगातार कम हो रही थीं, तब भी मोदी सरकार ने आम जनता को उसका लाभ नहीं दिया.
18 लाख करोड़ वसूलने का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने मोदी सरकार पर लॉकडाउन के दौरान अपना खज़ाना भरने का आरोप लगाते हुए कहा, "सरकार ने 12 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई जिससे सरकार ने लगभग 18 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली की है. ये अपने आप में जनता की मेहनत की कमाई से पैसा निकाल के खज़ाना भरने का जीता-जागता सबूत है."
सोनिया गांधी ने कहा कि 'सरकार की ज़िम्मेदारी ये है कि मुश्किल समय में देशवासियों का सहारा बने, न कि उनकी मुसीबत का फ़ायदा उठाकर मुनाफ़ाखोरी करे.'
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतें कम होने का हवाला देते हुए सरकार से पेट्रोल और डीज़ल के बढ़े हुए दाम वापस लेने की मांग की.
कब घटेंगी क़ीमतें?
वहीं केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है इस समय भारत की अर्थव्यवस्था चुनौतियों भरे दौर से गुज़र रही. तेल की कीमतों को लेकर उन्होंने कहा कि 'लॉकडाउन के बीच तेल की मांग अचानक बढ़ने से क़ीमतों में उछाल आया है.’
समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “दुनिया और भारत की अर्थव्यवस्था चुनौतियों भरे दौर से गुज़र रही है. कोविड-19 महामारी के कारण ऊर्जा उद्योग मुश्किल में है.”

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “पेट्रोल की मांग अप्रैल और मई के महीनों में 70-80 प्रतिशत नीचे चली गई थी जिससे अर्थव्यवस्था को सीधा नुकसान पहुंचा. अब फिर माँग बढ़ने लगी है.”
तेल की क़ीमत को लेकर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “कोई भी तेल की क़ीमतों का अनुमान नहीं लगा सकता मगर हमारा अंदाज़ा है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतें स्थिर होते ही भारत में भी तेल की क़ीमतें स्थिर हो जाएगी.”
इस बीच सोमवार को एक बार फिर तेल के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिली है. सात जून के बाद से डीज़ल का दाम 22 बार और पेट्रोल का दाम 21 बार बढ़ चुका है.
सोमवार को सरकारी तेल कंपनियों की कीमतों की नोटिफ़िकेशन के अनुसार, पेट्रोल का दाम पांच पैसे प्रति लीटर और डीज़ल का दाम 13 पैसे प्रति लीटर बढ़ाया गया है.
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