भारत-चीन तनाव: सेना के कमांडरों के बीच शांति स्थापित रखने को लेकर बैठक हुई

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सेना के आधिकारिक सूत्रों ने बताया है कि भारत और चीन की सेना के बीच कमांडर स्तर की बैठक 22 जून, 2020 को मोलडो में मैत्रीपूर्ण, सकारात्मक और संरचनात्मक माहौल में संपन्न हुई है. दोनों पक्षों के बीच सेनाओं के पीछे हटने पर आपसी सहमति बनी.
पूर्वी लद्दाख के सभी संघर्ष वाले क्षेत्रों में सेनाओं के पीछे हटने के ब्यौरे पर बैठक में बातचीत की गई और दोनों पक्ष इसे आगे बढ़ाएंगे.
उधर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
चीनी अख़बार पीपुल्स डेली ने चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजान के हवाले से इस बात की पुष्टि की है कि चीन और भारत की सेना के कमांडर के बीच 22 जून को दूसरी बैठक हुई है और बैठक में संवाद और परामर्श के माध्यम से मतभेदों को सुलझाने और तनाव को कम करने की इच्छा ज़ाहिर की गई है.
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भारत और चीन की सेना के बीच 15/16 जून की रात हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की जान चली गई थी. चीन की तरफ़ से किसी तरह के नुक़सान की अब तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
चीन की सरकारी मीडिया ने उन ख़बरों को 'फ़ेक न्यूज़' बताया है, जिनमें इस हिंसक झड़प में चीन के 40 जवानों के मारे जाने की बात कही गई थी.
चीन की सरकारी मीडिया सीजीटीएन के मुताबिक़ चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजान ने 23 जून को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इन ख़बरों को ख़ारिज करते हुए कहा, "मैं आपको आश्वस्त करता हूँ कि यह एक फ़ेक न्यूज़ है."

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इससे पहले दिल्ली में भारत-चीन संकट पर चर्चा के लिए बुलाई गई पार्टी कार्यकारिणी की बैठक में सोनिया गांधी ने कहा था, "भविष्य में क्या होगा ये तो अभी नहीं पता लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि परिपक्व कूटनीति और निर्णायक नेतृत्व हमारी क्षेत्रीय अखंडता को सुरक्षित रखने में मददगार होगी."
उन्होंने साथ ही अर्थव्यवस्था के संकट पर भी चिंता ज़ाहिर की और कहा, "भारत गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, कोरोना वायरस की महामारी और अब चीन के साथ सीमा पर संकट... "
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इन संकटों का कारण बीजेपी का कुप्रबंधन और उसकी ग़लत नीतियां हैं.
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इस बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की.
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