सीबीएसई परीक्षाओं और स्कूल-कॉलेज खोलने के बारे में क्या बोले केंद्रीय मंत्री निशंक

रमेश पोखरियाल निशंक
    • Author, सारिका सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए जब लॉकडाउन हुआ तो स्कूल-कॉलेजों के दरवाज़े भी बंद हो गए. भारत के प्राथमिक स्तर से लेकर विश्वविद्यालय तक के 33 करोड़ से ज़्यादा विद्यार्थी घर पर बैठ गए.

महामारी और लॉकडाउन का असर भारत समेत दुनियाभर के लगभग 70 फ़ीसदी छात्रों पर पड़ा है.

पर अब जब धीरे-धीरे लॉकडाउन में ढील दी जा रही है, तो स्कूलों को भी अगस्त के महीने के बाद खोलने की तैयारी है.

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इस दौरान मानव संसाधन मंत्रालय, गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर गाइडलाइंस तैयार कर रहा है.

जब बदले माहौल में स्कूल खुलेंगे, तो पढ़ने-पढ़ाने का तरीक़ा बदल जाएगा. पढ़ाई के साथ-साथ सोशल डिस्टेंसिंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी.

छात्रा

बदल जाएगा पढ़ाई का तरीक़ा?

बीबीसी से ख़ास बातचीत में भारत के मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने दावा किया कि जब तक बच्चे स्कूल नहीं पहुँच रहे हैं, तब तक ऑनलाइन क्लास के ज़रिए उनके स्कूल घर तक पहुँच गए हैं.

क्या ई-लर्निंग क्लास रूम का विकल्प हो सकता है? इस सवाल पर मानव संसाधन मंत्री ने कहा कि इसके अलावा फ़िलहाल कोई और विकल्प नहीं है, छात्रों की पढ़ाई बिल्कुल नहीं हो पाती. उससे बेहतर है कि घर बैठे-बैठे उन्हें पढ़ने का मौक़ा मिल रहा है.

उन्होंने कहा, "हमारे शिक्षा मंत्रालय ने घरो पर बच्चों को एक साथ ऑनलाइन शिक्षा देने की कोशिश की है. हमने बच्चों को निराश नहीं होने दिया है, अभिभावकों को परेशान नहीं होने दिया है. आज अध्यापक और अभिभावक दोनों मिलकर बच्चों को सँवार रहे हैं."

स्कूली बच्चे

क्या वाक़ई शहर से लेकर सूदूर गांव के इलाकों तक सबको बराबर शिक्षा मिल पा रही है वो भी भारत जैसे देश में, जहाँ आज भी 23-24 फ़ीसदी लोगों के घरों में ही इंटरनेट है.

शहरों में तो फिर भी कई घरों में लैपटॉप और डेस्क टॉप मिल जाएंगे, लेकिन गाँवों में ज़्यादातर बच्चों के पास इंटरनेट के नाम पर मोबाइल फ़ोन की ही सुविधा है तो उस छोटे से फ़ोन में उनके इतना बड़ा पाठ्यक्रम समा पाएगा?

इस सवाल पर मानव संसाधन मंत्री ने कहा कि स्कूली शिक्षा के लिए दीक्षा और ई-पाठशाला जैसे ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म हैं लेकिन अगर किसी बच्चे के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है तो उनके लिए स्वयंप्रभा के 32 चैनलों के ज़रिए शिक्षा पहुंचाई जा रही है और भविष्य में ज़रूरत पड़ी तो रेडियो का भी इस्तेमाल होगा.

उन्होंने कहा, "हम अंतिम छोर पर रहने वाले बच्चों की भी चिंता कर रहे हैं, जिनके पास इंटरनेट और स्मार्टफ़ोन नहीं हैं, उन्हें भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. हम उनके हिसाब से पाठ्यक्रम लाएंगे. ज़रूरत पड़ी तो रेडियो का भी प्रयोग करेंगे."

रमेश पोखरियाल निशंक

लेकिन पूरी शिक्षा ऑनलाइन हो जाए, इसके लिए क्या भारत का शिक्षा तंत्र तैयार था इस सवाल पर उन्होनें कहा, "किसी को नहीं पता था कि ये होने वाला है, कोई तैयार नहीं था. लेकिन हम भविष्य की तैयारियों में जुटे थे कि एक दिन ऐसा ज़रूर आना है जब शिक्षा को ऑनलाइन होना है, जब दूरस्थ क्षेत्र में बैठे बच्चों को भी शहरी बच्चों जैसी सुविधाएँ मिलीं. अब जब ये वक़्त आया तो हमने अपनी तैयारियों की गति बढ़ाई और सभी तक ऑनलाइन शिक्षा पहुँचाने की कोशिश की. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आत्म निर्भर भारत का मंत्र दिया है शिक्षा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने का मौक़ा है."

हालाँकि मानव संसाधन मंत्री से ये सवाल पूछे जाने के अगले ही दिन केरल की कक्षा 10 में पढ़ने वाली 14 साल की एक लड़की ने इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि उसे ऑनलाइन पढाई करने का मौका नहीं मिल रहा था.

इस छात्रा के पिता दिहाड़ी पर काम करते हैं. आर्थिक स्थिति ठीक ना होने की वजह से उनके घर में टीवी नहीं था और वो स्मार्ट फोन का भी जुगाड़ नहीं कर पाए. यहीं नहीं केरल में लगभग ढाई लाख छात्र-छात्राएँ हैं जिनके पास टीवी या कंप्यूटर नहीं है.

दलित एक्टिविस्ट सनी कपिकड़ का मानना है कि शिक्षा ग़रीब तबक़े तक नहीं पहुंच रही है तो इसकी वजह लैपटॉप या स्मार्टफोन ना होना नहीं है. सरकार को हाशिए पर रह रहे लोगों के नज़रिए से शिक्षा की ज़रूरत को देखना होगा. सबसे पहले घर और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुवीधाएं ग़रीबों को मुहैया करानी होंगी.

जुलाई में परीक्षा की तैयारी

स्कूली बच्चे

हज़ारों छात्रों का भिवष्य इस बात पर टिका है कि उनकी परीक्षाएं कब होंगी और कैसे वो मेरिट के आधार पर अपना विषय चुनेंगे. कुछ ऐसा ही इंतज़ार जेईई और नीट के परीक्षार्थियों को भी है.

लॉकडाउन से पहले सीबीएसई की 10वीं और 12वीं के कुछ विषयों की परीक्षा हो चुकी थी, लेकिन जब कोरोनावायरस का संक्रमण बढ़ा, तो देश में सभी परीक्षाएँ रद्द कर दी गईं.

सीबीएसी के कुल 71 विषयों की परीक्षा भी हो चुकी थी और अब बचे हुए 29 विषयों की परीक्षा जुलाई के महीने में 1 से 15 तारीख़ के बीच होगी.

मानव संसाधन मंत्री ने बताया कि इन परीक्षाओं के लिए उन्हें परीक्षा केंद्रों पर नहीं जाना होगा बल्कि उनके ही स्कूल में ही परीक्षा हो जाएगी.

उन्होंने कहा कि जो बच्चे लॉकडाउन की वजह से अपने गृह ज़िलों को चले गए हैं उनका सेंटर उनके घर के पास ही होगा.

लेकिन इन तमाम इंतज़ामों के बाद भी एक्सपर्ट्स ये मान रहे हैं कि संक्रमण के डर के बीच परीक्षा देना, सोशल डिसटेंसिंग के नियमों का पालन करना और परफॉर्म करना कुल मिलाकर इन सबका दबाव छात्रों पर पड़ सकता है.

वीडियो कैप्शन, भारत में स्कूल और कॉलेज कब खुलेंगे, शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया

हमने जब ये सवाल रमेश पोखरियाल से पूछा तो उनका कहना था, "छात्रों को परीक्षाओं का इतंज़ार है ताकि उनका मेरिट तय हो सके जिसके दम पर वो आगे अपनी राह चुन सकें. सारी सुविधाएँ बच्चों को दी जा रही हैं, मुझे लग रहा है बच्चे तनाव में नहीं है, वो मस्ती के साथ परीक्षा देंगे. उन्हें तैयारी करने का पूरा समय मिला है."

जुलाई के ही महीने में जेईई और नीट की परीक्षा की भी तैयारी है. नीट में देश भर के छात्र हिस्सा लेते हैं. जेईई परीक्षा कई शिफ़्टों में होती है. पिछले साल क़रीब 3 हज़ार सेंटर पर छात्रओं ने परीक्षा दी थी.

लेकिन इस बार हालात अलग होंगे. सोशल डिसटेंसिंग का ध्यान रखते हुए इस बार क़रीब दो-तीन गुना सेंटर की ज़रूरत होगी. इसकी भी तैयारी करनी होगी.

मानव संसाधन मंत्री ने कहा कि हमने जेईई और नीट के परीक्षाओं की भी तिथियां तय की हैं.

सारिका सिंह और निशंक

बदलाव के लिए कितना तैयार है भारत का शिक्षा तंत्र?

भारत में हर साल लगभग साढ़े सात लाख छात्र विदेशों में पढ़ाई के लिए जाते हैं, लेकिन अब उन्हें देश में ही उस स्तर की शिक्षा दिलाने की बात कही जा रही है.

क्या भारत में इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है? मानव संशाधन मंत्री ने कहा, "उन छात्रों और उनके अभिभावकों से मैं अपील करूंगा कि उनको भारत से बाहर जाने की ज़रूरत नहीं है."

उन्होंने कहा, "हमारी सिक्षा का स्तर ये है कि दुनिया की शीर्ष कंपनियों के सीईओ हिंदुस्तान से पढ़कर गए नौजवान है. ये हमारी शिक्षा का स्तर है. अगर विदेशों में ज़्यादा अच्छी शिक्षा थी तो इन श्रेष्ठ कंपनियों के सीईओ वहीं के छात्र होते. आईआईटी और आईएएम, एनआईटी से निकलने वाले बच्चे दुनिया में छाए हुए हैं."

मानव संसाधन मंत्री ने ये भी कहा सरकार इन शीर्ष संस्थानों की संख्या बढ़ाएगी.

स्कूल, कॉलेज

आत्मनिर्भर होगी शिक्षा भी-आएगी नई शिक्षा नीति

हलाँकि एक तरफ़ जहां ग्लोबल भारतीय दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं, वहीं इस बार की नई शिक्षा नीति के भारतीयकरण पर ज़ोर है. शिक्षा में भारतीय मूल्यों और भारत की स्थानीय भाषाओं पर ज़ोर दिया जा रहा है. 22 भाषाओं में अब पढ़ाई पर ज़ोर दिया जा रहा है.

भारत के मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल ने कहा है कि कोरोना के इस दौर में जब दुनिया बदल रही है तो शिक्षा भी बदलेगी.

उन्होंने कहा, "अब शिक्षा व्यवस्था भी आत्मनिर्भर होगी. इसलिए कोरोना वायरस के संकट के इस दौर में छात्रों को विदेश जाकर पढ़ाई करने की ज़रूरत नहीं है बल्कि उन्हें देश में ही शिक्षा मिलेगी."

उन्होंने कहा, "नई शिक्षा नीति भारतीय मूल्यों पर आधारित होगी. भारतीय विज़न और संस्कार, जीवन मूल्य दुनिया में छाएँगे, आज इनकी दुनिया को ज़रूरत है."

स्कूली बच्चे

कोरोना वायरस संकट की वजह से भारत में अब तक 12 करोड़ लोगों की नौकरी गई है. ऐसे लोग बच्चों की पढाई का ख़र्च कैसे उठाएँगे, इस सवाल पर उन्होनें कहा कि सर्वशिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में उन्हें शिक्षा मिल सकती है.

उन्होंने कहा, "हम बेसिक शिक्षा दे रहे हैं, पूरे देश में सर्व शिक्षा अभियान के तहत फ्री शिक्षा दे रहे हैं. सरकारी स्कूलों में जाने की मनाही नहीं है तो छात्र सरकारी स्कूलों में जाएँ."

हलांकि जिस देश में अमरीका की आबादी के बराबर अगर छात्रों की ही आबादी है, जिसकी लगभग 65 फ़ीसदी आबादी युवा है उनकी शिक्षा ना किसी सरकार की प्राथमिकता रही है ना ही इसके लिए बज़ट का बड़ा हिस्सा दिया जाता है, ऐसे में कोरोना काल की ये चुनौती छात्रों के लिए अवसर बन पाएगी या भविष्य में आगे बढ़ने के अवसर कम होंगे फिलहाल ये साफ़ नहीं.

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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