मन की बातः पीएम मोदी बोले, कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई का रास्ता लंबा है

कोरोना
प्रकाशित

प्रधानमंत्री मोदी ने आज कहा कि कोरोना महामारी से हमारी 'मन की बात' भी अछूती नहीं रही है.

रविवार को कार्यक्रम 'मन की बात' में उन्होंने कहा, "पिछली बार जब आपसे बात की थी तब यातायात बंद था, दुकान बज़ार बंद थे, हवाई सेवाएं बंद थी. लेकिन अब वो हालात नहीं हैं. अब काफी कुछ खुल चुका है. श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं, यातायात शुरू हो चुका है, सुरक्षा के बीच हवाई सेवा भी शुरू हो चुकी है - इस कारण हमें पहले से अधिक सावधानी बरतने की ज़रूरत है."

उन्होंने कहा कि हमारी जनसंख्या दूसरे देशों से अधिक है लेकिन फिर भी हमारे देश में कोरोना उतनी तेज़ी से नहीं फैला जितना दूसरे देशों में फैला है. साथ ही कोरोना के कारण हमारी मृत्युदर भी कम है.

मोदी के मन की बात

प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कुछ कहा पढ़िए -

  • कोरोना महामारी से जो नुक़सान हुआ उसका दुख सभी को है, लेकिन जो हम बचा पाए हैं वो हमारी सामूहिक संकल्पशक्ति का प्रतीक है. कोरोना के ख़िलाफ़ हमारी ये पूरी मुहिम पीपल ड्रिवन है.
  • कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई का रास्ता लंबा है. ये एक ऐसी आपदा है जिसका दुनिया के पास अब तक कोई इलाज नहीं है, न ही दुनिया के पास इसका पहले का कोई अनुभव है.
  • इस कारण हमें रोज़ नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इस दौर में हर वर्ग परेशानी में हैं, लेकिन ग़रीब मज़दूर पर इसकी सबसे बुरी मार पड़ी हैं.
मोदी के मन की बात
  • इस संकट की घड़ी में कई लोगों ने सामने आ कर दूसरों की मदद की है. लोगों की शक्ति के अलावा एक और शक्ति हमारे साथ है जो देश में लोगों की सेवा शक्ति. ये केवल हमारा आदर्श नहीं बल्कि हमारी जीवन पद्धति है.
  • सेवा स्वयं में सुख है, सेवा में ही है. जो दूसरों की सेवा में लगता है उसे डिप्रेशन नहीं होता, उसके जीन में सकारात्मकता नज़र आती है. हमारे डॉक्टर,स्वास्थ्यर्मी, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी, मीडियाकर्मी लोगों की सेवा में जुड़े हैं.

सेवा में अपना सब कुछ समर्पित कर देने वाले लोगों की संख्या अनगिनत है. ऐसे ही कुछ लोग हैं -

  • तमिलनाडु के सी मोहन जो मदुरै में एक सैलून चलाते हैं. उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए 5 लाख रुपये बचाए थे. लेकिन इस घड़ी में उन्होंने अपनी पूरी कमाई ज़रूरतमंदों और गरीबों की सेवा में लगा दी.
  • अगरतला में ठेला चला कर जीवन चलाने वाले गौतम दास अपनी रोज़ की कमाई की बचत में से चावल दाल खरीद कर ज़रूरतमंदों को खाना खिला रहे हैं.
  • पंजाब के पठानकोट ने रहने वाले दिव्यांगभाई राजू ने दूसरों की मदद से जोड़े गए पैसों से 3000 से अधिक मास्क बना कर लोगों में बांटे. इस मुश्किल समय में उन्होंने 100 परिवारों के लिए खाना भी जुटाया.
  • देश के सभी हिस्सों से वीमेन सेल्प हेल्प ग्रुप भी परिश्रम कर रहे हैं. गांवों कस्बों में बहनें बेटियां हज़ारों की संख्या में मास्क बना रही हैं. ऐसे सभी लोगों की मैं प्रशासा करता हूं.
मोदी के मन की बात
  • संकट की इस घड़ी में देश में इनोवेशन जारी है. हमारे लैब्स कोरोना से लड़ने के लिए रातदिन कोशिश कर रहे हैं. लोग भी अपने संतर पर इस महामारी को फैलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं.
  • नासिक के राजेंद्र यादव गांव सतना में रहते हैं. वो एक किसान हैं. अपने गांव को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए उन्होंने ट्रैक्टर से जोड़ कर एक सैनिटाइज़ेशन मशीन बनाई है जो असरदार तरीके काम कर रही है.
  • कई दुकानदारों ने दो गज की दूरी के लिए दुकान में पाइपलाइन लगाई हैं जिससे सोश डिस्टेंसिंग का पालन बेहतर तरीके से किया जा रहा है.
दक्षिण और पूर्वी एशिया में भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सबसे अधिक हैं. .  .
  • कोरोना वैक्सीन के लिए हमारे लैब्स में जो काम हो रहा है जिसकी दुनिया भर की नज़रें हैं. इससे हम सबकी आशा भी जुड़ी है.
  • आगे बढ़ने के लिए इच्छाशक्ति के साथ काफी कुछ इनोवेशन पर भी निर्भर करता है. मानव जाति की यात्रा आधुनिक दौर में इनोवेशन से ही पहुंची है.
  • कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई का रास्ता लंबा है. ये ऐक ऐसी आपदा है जिसका दुनिया के पास कोई इलाज नहीं है और न ही पहले का इसका कोई अनुभव है. इस कारण हमें रोज़ नई चुनौतियां मिल रही हैं. देश में कोई वर्ग ऐसा नहीं है जो परेशानी में न हो.
  • इस संकट की सबसे बड़ी चोट ग़रीब मज़दूर और श्रमिक वर्ग पर पड़ी हैं. उनकी पीड़ा को शब्दों में बयान करना मुश्किल है. उनकी और उनके परिवार की तकलीफों को हम सब मिल कर बांटने की कोशिश कर रहे हैं.
भारत मज़दूर
  • रेलवे के साथी उनकी मदद में लगे हुए हैं, वो भी एक प्रकार से अग्रिम पंक्ति में खड़े कोरोना वॉरियर्स ही हैं. श्रमिकों की पीड़ा में हम पूर्वी हिस्से की पीड़ा देख सकते हैं. देश के पूर्वी हिस्से में देश का ग्रोथ इंजन बनने की क्षमता है.
  • मज़दूरों की ज़रूरतों को देखते हुए नए कदम उठाना ज़रूरी हो गया है. माइग्रेशन कमीशन बनाने की बात हो रही है. केंद्र सरकार भी इसके लिए कोशिश कर रही है. ये सभी फैसले मज़दूरों के विकास और आत्मनिर्भरता के लिए है.
  • इस संकट से हमने काफी कुछ सीखा है. आज कई समस्याओं ने वो रूप नहीं लिया होता अगर हम आत्मनिर्भर होते. लेकिन अब वक्त आ गया है कि हम वोकल फॉर लोकल को प्रमोट करें.
  • कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है. कोरोना संकट के दौर में योग ज़रूरी इसलिए है क्योंकि ये कोरोना वायरस हमारे सांस की प्रणाली को प्रभावित करता है. कई सालों से योग में हमारी रेस्पीरेटरी सिस्टम को मज़बूत करने के लिए कई योग हैं जिससे लोगों को लाभ मिल सकता है.
भारत मज़दूर
  • गरीबों को मुफ्त में इलाज देने के लिए सरकार ने आयुष्मान भारत योजना लागू की है जिससे एक करोड़ लोग लाभ ले रही हैं. इनमें गांव के गरीब लोग हैं जो देश में कहीं भी अपना इलाज करा सकते हैं. एक करोड़ से अधिक मतलब नॉर्वे और सिंगापुर जैसे देश की कुल जनसंख्या की दोगुनी संख्या.
  • इस एक करोड़ लाभार्थियों में से 80 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों से हैं. इनमें से 70 प्रतिशत लोगं की सर्जरी की गई है. भारत में कई लोगों को इस योजना क लाभ मिला है.
  • मणिपुर के चुराचांदपुर के हने वाले 6 साल के तेलेन सांग को ब्रेन की गंभीर बीमारी हो गई. उसकी मां बुनाई का काम करती हैं और पिता दिहाड़ी मज़दूर हैं. उनके लिए तेलेन का इलाज करना मुश्किल था. आयुष्मान भारत योजना से उन्हें नया जीवन मिला है.
  • पुडुचेरी की अमुर्थावली के 27 साल के बेटे जीवा को दिल की बीमारी थी. उनके पति की मौत हार्ट अटैक से हुई थी. जीवा दिहाड़ी मजदूर हैं. अमुर्थावली ने आयुष्मान भारत योजना में अपने बेटे का रजिस्ट्रेशन कराया जिसके 9 दिन बाद उनकी हार्ट सर्जरी हो गई.
  • कोरोना संकट के बीच देश के कुछ हिस्सों में प्राकृतिक आपदा आई है. एक तरफ पूर्वी भारत में अंफान तूफान के कहर से जूझ रहे हैं तो दूसरी तरफ कई इलाकों में टिड्डी दलों ने कहर बरपाया हुआ है. टिड्डी दल का हमला हमें बताता है कि छोटा जीव भी घातक साबित हो सकता है.
टिड्डी दल
  • लॉकडाउन के हर कोई प्रभावित ज़रूर हुआ है लेकिन प्रकृति को इसे कुछ लाभ हुआ है. कई जगहों से जानवरों के उन्मुक्त विचरण की ख़बरें रही हैं और वो चिड़िया जो कुछ वक्त पहले तक कहीं खो गई थीं अब उनकी चहचहाने की आवाज़ सुनाई देने लगी है.
  • जल ही जीवन है और जल की कल है. हमारी कोशिश होनी चाहिए कि पानी को बचाएं, जितना हो सके इसका संरक्षण करें. हमें व्यक्तिगत स्तर पर पर्यावरण के साथ नाता बनाने की ज़रूरत है.
  • इतनी कठिनईयों के बाद अब जो हालात हैं उसे हमें बिगाड़ने नहीं देना है. हम लापरवाह हो जाएं ये कोई विकल्प नहीं है. कोरोना से लोगों को अभी भी उतना ही गंभीर ख़तरा हो सकता है.
  • हमें दो गज की दूरी, चेहरे पर मास्क और बार-बार हाथ धोना - ये वो बातें हैं जिसका हमें ऐसे ही पालन करना है जैसा पहले करते आए थे. अपने लिए, अपनों के लिए, अपने देश के लिए ये सावधानियां रखना ज़रूरी है.
मोदी के मन की बात

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

End of कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
End of मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

End of अपने आप को और दूसरों को बचाना

मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

End of मैं और मेरा परिवार
कोरोना वायरस के बारे में जानकारी
लाइन
कोरोना वायरस के बारे में जानकारी
कोरोना वायरस के बारे में जानकारी

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)