प्रियंका गांधी और योगी सरकार में बसों को लेकर जारी है विवाद

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 5 मिनट
उत्तर प्रदेश में प्रवासी मज़दूरों को उनके घरों तक पहुँचाने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की एक हज़ार बसें भेजने की पेशकश का मामला तूल पकड़ता जा रहा है.
यूपी सरकार और कांग्रेस पार्टी में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. हालांकि यूपी सरकार ने 1000 बसें उपलब्ध कराने की प्रियंका गांधी की पेशकश को दो दिन बाद स्वीकार कर लिया था.
लेकिन इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से लगातार हो रहे पत्राचार ने इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिकरण कर दिया है. कांग्रेस पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि बसें आगरा के पास राजस्थान सीमा पर पहुंचा दी गई हैं जबकि राज्य सरकार ने उन्हें ग़ाज़ियाबाद और नोएडा पहुँचाने के लिए कहा है.
कांग्रेस पार्टी की ओर से इसके लिए पाँच बजे तक का समय दिए जाने की बात कही गई है लेकिन पार्टी का आरोप है कि आगरा में बसों को प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जा रही है.
अनुमति का इंतज़ार

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यूपी में कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना बीबीसी से बातचीत में कहती हैं, "बसें आगरा में ऊँचा नागला स्थित उत्तर प्रदेश बॉर्डर तक पहुंचा दी गईं हैं लेकिन स्थानीय प्रशासन कह रहा है कि उन्हें ऊपर से कोई सूचना नहीं है. जैसे ही स्थानीय प्रशासन की अनुमति मिल जाती है बसें वहां से निकल जाएंगी और शाम पाँच बजे से पहले ग़ाज़ियाबाद और नोएडा में पहुंच जाएंगी. इस बीच, हमने सरकार से अनुरोध किया है कि यात्रियों की सूची हमें उपलब्ध करा दी जाए और रूट भी बता दिया जाए जहां बसें भेजी जानी हैं. हम पूरी तरह से सरकार के साथ समन्वय बनाकर चलना चाहते हैं. हमारा एकमात्र मक़सद यह है कि सीमाओं पर फँसे प्रवासी मज़दूर सुरक्षित अपने घरों को पहुंच सकें."
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प्रियंका गांधी ने प्रवासी श्रमिकों के लिए एक हज़ार बसें भेजने की सरकार से तीन दिन पहले अनुमति माँगी थी. सोमवार को राज्य सरकार ने उन्हें यह कहते हुए इसकी अनुमति दे दी कि बसों का विवरण चालक और परिचालक के साथ उपलब्ध कराया जाए.
बाद में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि कांग्रेस महासचिव से बसों का विवरण माँगा गया था लेकिन वह उन्हें नहीं दिया जा रहा है जबकि प्रियंका गांधी के निजी सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि सोमवार देर रात भेजी जाने वाली बसों का पूरा विवरण सरकार को उपलब्ध करा दिया गया है.प्रियंका गांधी के निजी सचिव संदीप सिंह कहते हैं, "यूपी सरकार ने 18 मई को पत्र भेजा जिसमें कहा गया कि समस्त बसों का विवरण ड्राइवर्स के फिटनेस सर्टिफिकेट समेत उपलब्ध कराए जाएं. इसके अलावा ड्राइवर्स के ड्राइविंग लाइसेंस और बसों के नंबर सहित सारी जानकारी उपलब्ध कराएं. हमने यूपी सरकार को सारी जानकारी तुरंत मुहैया करा दी लेकिन इसके बाद रात 11 बजकर 40 मिनट पर यूपी सरकार का ई-मेल मिला कि 19 मई को सुबह 10 बजे तक लखनऊ डीएम को सारी जानकारी दी जाए और बसें लखनऊ हैंडओवर की जाएं."
कांग्रेस पार्टी की आपत्ति
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बसों को लखनऊ भेजने संबंधी निर्देश पर कांग्रेस पार्टी ने आपत्ति जताई और इसे समय की बर्बादी कहा. संदीप सिंह ने अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी को भेजे पत्र में लिखा कि बसों को अनावश्यक रूप से लखनऊ न मँगाया जाए और न ही इस मुद्दे पर राजनीति की जाए.

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उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में यूपी सरकार राजनीति कर रही है और मज़दूरों की मदद के लिए कांग्रेस की पेशकश को गंभीरता से नहीं ले रही है.
वहीं, संदीप सिंह के इस पत्र के तत्काल बाद अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने उसका जवाब भेजा कि आपकी असमर्थता को देखते हुए पाँच-पाँच सौ बसें नोएडा और ग़ाज़ियाबाद के ही बस अड्डों पर भेजने की अनुमति दी जाती है.
अपर मुख्य सचिव ने पत्र में लिखा, "संबंधित ज़िलाधिकारी बसों का परमिट, फ़िटनेस, इंश्योरेंस इत्यादि के अभिलेख व चालक के लाइसेंस तथा परिचालक के अभिलेख चेक कर बसों का उपयोग करेंगे. उन्हें इसके निर्देश दे दिए गए हैं."

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वहीं, कांग्रेस पार्टी ने इन बसों को मंगलवार सुबह ही आगरा के पास यूपी सीमा पर भेज दिया. पार्टी नेताओं का कहना है कि बसें ग़ाज़ियाबाद और नोएडा जाने के लिए तैयार हैं, बस उन्हें आगरा में स्थानीय प्रशासन से अनुमति मिलने भर की देरी है.
भाजपा का आरोप

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वहीं राज्य की बीजेपी सरकार ने कांग्रेस पार्टी पर कथित तौर पर फ़र्ज़ी बसें भेजने का आरोप लगाया है. राज्य सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा, "हमने जाँच की तो चौंकाने वाली बात पता चली. सरकार के पोर्टल वाहन से ही सारी जानकारियां निकाली गई हैं. उन्होंने एक हज़ार बसों के रजिस्ट्रेशन नंबर दिए हैं. बसों के नाम पर सामान ढोने वाले वाहनों के नाम दे दिए गए हैं. सामान ढोने वाले वाहनों से श्रमिकों को कैसे लाएंगे? इसके अलावा कुछ नंबर कारों और स्कूटरों तक के दिए गए हैं."
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लेकिन कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को नकारते हुए भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार पर इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया है.
विधायक आराधना मिश्रा मोना कहती हैं, "हमने लगभग 1100 बसें भेजी हैं. हो सकता है कि कुछ बसों में कोई गड़बड़ी हो, इसीलिए बसों की संख्या बढ़ाकर दी गई है. यदि कुछ इसमें गड़बड़ भी है तो हम ठीक कर देंगे. हमें पता है कि हो सकता है कि फ़िटनेस इत्यादि की वजह से भी कुछ बसों को बदलना पड़ सकता है. अतिरिक्त संख्या में बसें भेजने का यही मक़सद है. लेकिन यह इतना बड़ा मुद्दा तो नहीं है कि इसके लिए कैबिनेट मंत्री को आनन-फ़ानन में प्रेस वार्ता करनी पड़ी. मेरा अनुरोध है कि इस मुद्दे पर राजनीति न की जाए. मज़दूरों की अवस्था और उनकी विवशता को सरकार समझने की कोशिश करे."
बहरहाल, राजस्थान सीमा पर खड़ी बसों को आगरा में प्रवेश करने की इजाज़त मिलने का इंतज़ार है और कांग्रेस पार्टी को सरकार से यात्रियों की सूची का. इस दौरान बयानबाज़ी लगातार जारी है और यात्री नोएडा, ग़ाज़ियाबाद की सीमा और उसके आस-पास अपने घरों को जाने की जुगत में लगे हैं.

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