कोरोना लॉकडाउन-4: नए रूप रंग में कैसा होने वाला है?
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Author, सरोज सिंह
पदनाम, बीबीसी संवाददाता
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प्रधानमंत्री मोदी ने साफ़ कर दिया है कि लॉकडाउन 4 आएगा.
राष्ट्र के नाम संबोधन में उन्होंने कहा, "लॉकडाउन का चौथा चरण, लॉकडाउन 4, पूरी तरह नए रंग रूप वाला होगा, नए नियमों वाला होगा. राज्यों से हमें जो सुझाव मिल रहे हैं, उनके आधार पर लॉकडाउन 4 से जुड़ी जानकारी भी आपको 18 मई से पहले दी जाएगी. मुझे पूरा भरोसा है कि नियमों का पालन करते हुए, हम कोरोना से लड़ेंगे भी और आगे भी बढ़ेंगे."
इसके बाद से ही चर्चा है कि नए रूप रंग वाला लॉकडाउन 4, आख़िर कैसा होगा?
इसका जवाब बहुत हद तक प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों की बैठक में से निकल कर सामने आया है.
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राज्यों को इस लॉकडाउन में मिलेंगे ज़्यादा अधिकार?
भारत में अब तक जितने लॉकडाउन के फ़ेज दिखे हैं, उन सबमें एक बात जो आम थी, वो थी केंद्र सरकार का क़ानून बनाना. गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ़ से आदेश जारी होता था और राज्य सरकारों को अमल में लाना होता था.
लेकिन सोमवार को मुख्यमंत्रियों की बैठक में कई राज्यों ने माँग की है कि राज्यों को अपने हिसाब से नियम तय करने में छूट मिले, चाहे वो रेड, ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन में ज़िलों को बाँटने की बात हो, या फिर लॉकडाउन बढ़ाने की बात हो, या फिर मज़दूरों को लाने ले जाने की बात हो.
केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने सुझाव दिया कि रेड ज़ोन को छोड़कर लॉकडाउन में ढील देने का फ़ैसला राज्य सरकारों पर छोड़ना चाहिए.
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यात्री ट्रेन सेवा को शुरू नहीं करने का अनुरोध किया है.
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कोरोना वायरस लॉकडाउन को बढ़ाने की मांग की है.
ममता बनर्जी ने भी केंद्र पर राज्य के काम में हस्तक्षेप करने के आरोप कई बार पहले भी लगाए हैं.
इन राज्यों के रुख़ से साफ़ है कि वो आगे के फ़ैसले में अपनी भागीदारी चाहते हैं. हो सकता है कि लॉकडाउन-4 में बहुत हद तक केंद्र सरकार राज्यों को ऐसी छूट देने के लिए मान जाए, क्योंकि केंद्र को अब अर्थव्यवस्था पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है. . इसके संकेत आज के भाषण में भी प्रधानमंत्री मोदी ने दिए.
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कई और अर्थिक गतिविधियों की होगी अनुमति
प्रधानमंत्री मोदी ने आज के भाषण में 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है, ताकि संकट के इस काल में देश आत्मनिर्भर बन सके. इससे एक उम्मीद जगी है कि देश में और नई नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे, सिस्टम दुरुस्त होगा, तकनीक का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा होगा.
केंद्र सरकार पर कई और आर्थिक गतिविधियों को शुरू करने का दवाब उद्योग संगठनों की तरफ़ से लगातार बनाया जा रहा था.
कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) की तरफ़ से 8 मई को ही 15 लाख करोड़ के पैकेज की माँग की गई है.
उनके मुताबिक़ 50 दिन से कई कंपनियां बंद पड़ी हैं, उनके पास लोगों को सैलेरी देने तक के पैसे नहीं हैं. मध्यम एवं लघु उद्योगों को मदद ना दी गई तो वो दोबारा खड़े नहीं हो पाएंगे.
आज प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन से ऐसा लगा कि उद्योग जगत के हिस्से भी 20 लाख करोड़ में से कुछ आएगा.
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गली मोहल्ले वाली दुकानें और बाज़ार
अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "देश ने हमारे गरीब भाई-बहनों की संघर्ष-शक्ति, उनकी संयम-शक्ति का भी दर्शन किया है. खासकर हमारे जो रेहड़ी वाले भाई-बहन हैं, ठेला लगाने वाले हैं, पटरी पर सामान बेचने वाले हैं, जो हमारे श्रमिक साथी हैं, जो घरों में काम करने वाले भाई-बहन हैं, उन्होंने इस दौरान बहुत तपस्या की है, त्याग किया है. ऐसा कौन होगा जिसने उनकी अनुपस्थिति को महसूस नहीं किया."
इससे साफ़ है कि छोटे व्यापारियों की दशा से वो वाक़िफ हैं.
भारत में रीटेल व्यपारियों के संगठन, कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स एसोसिएशन (कैट) के प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं, "पिछले 50 दिनों में सरकार को 1लाख 15 हज़ार करोड़ के जीएसटी का नुक़सान हुआ है. हम व्यापारियों का जो हो रहा है वो अलग. हमने सरकार को बाज़ार खोलने के कई सुझाव दिए हैं. उम्मीद है सरकार लॉकडाउन-4 में हमारी भी सुनेगी."
सरकार को सौंपे गए प्लान को बीबीसी से साथ साझा करते हुए प्रवीण खंडेलवाल ने कहा:
• बाज़ार हफ़्ते में 6 दिन के बजाए, शुरूआत में 2 या 3 दिन खोलने का सुझाव दिया है. सरकार ऐसा भी कर सकती है कि सड़क की एक तरफ़ वाली दुकानें एक दिन खुलें और दूसरी तरफ़ वाली दुकानें दूसरे दिन खुलें.
• इसके अलावा अलग-अलग टाइमिंग पर बाज़ार खोलने के बारे में भी हमने सरकार को सुझाव दिए हैं.
• सरकार से कैट ने ये भी कहा कि खुदरा व्यापारी, व्यापार के तौर तरीक़ों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए हर दिशा निर्देश का पालन करने के लिए तैयार हैं.
बहुत संभव है कि सरकार लॉकडाउन-4 में उनके सभी सुझाव तो नहीं लेकिन कुछ एक सुझाव मान ले. ऐसा इसलिए क्योंकि ये सरकार और व्यापरियों दोनों के हित में होगा.
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पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी चल सकते हैं
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्लीवासियों से लॉकडाउन-4 से जुड़े सुझाव मांगे हैं. इसके लिए उन्होंने फ़ोन, ईमेल और वॉट्सऐप नंबर भी जारी किए हैं. सुझाव में उन्होंने बस, मेट्रो, ऑटो, टैक्सी खोलना चाहिए या नहीं उस पर जनता की राय मांगी है.
दरअसल 12 मई से सीमित संख्या में रेल यात्रा दिल्ली से शुरू हो रही है. इसमें जिनके पास कंफ़र्म टिकट होगा, उनके लिए स्टेशन आने जाने के लिए कुछ गाड़ियों को इजाज़त दी गई है.
कई सरकारी और प्राइवेट संस्थान भी लॉकडाउन-3 में खोले जा चुके हैं. लॉकडाउन-4 में बाज़ार और कुछ ऑफ़िस और खुलेंगे तो आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट खोलना, मजबूरी भी है और ज़रूरी भी.
हर आदमी के पास अपनी गाड़ी होती नहीं. इसलिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए, बहुत मुमकिन है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट फ़िक्स टाइमिंग के साथ खोलने की अनुमति दी जाए.
महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई लोकल चलाने के लिए रेल मंत्री से माँग की है ताकि आवश्यक सेवाओं में लगे लोगों को सहूलियत हो सके.
केंद्रीय उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी ने भी लॉकडाउन-4 में घरेलू उड़ान खोले जाने के संकेत पहले ही दिए हैं.
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने ख़ुद प्रधानमंत्री के साथ बैठक में कंटेनमेंट ज़ोन के अलावा सब चीज़ें खोलने की बात कही है, उससे एक अंदाज़ा ये लगाया जा रहा है कि दिल्ली मेट्रो भी कुछ रियायतों और सख़्ती के साथ चलाई जा सकती है.
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अस्पताल में ओपीडी और मोहल्ले के क्लीनिक
कोरोना के दौर में अबतक नॉन कोरोना वाली बीमारियों पर सबकी निगाहें नहीं जा रही थीं. लेकिन इस बीच मलेरिया, चिकनगुनिया, सर्जरी, थैलेसीमिया जैसी बीमारियों वाले लोगों और डायलिसिस कराने वाले लोगों को इलाज मिलने में मुश्किल आ रही है. इसलिए ज़्यादातर अस्पतालों में इमरजेंसी के साथ-साथ ओपीडी सेवाएं भी खोली जा रहीं हैं.
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी का कहना है कि जब तक कोरोना के लिए वैक्सीन या दवा नहीं मिल जाती, तब तक बीमारी के साथ जीने की आदत डालने की ज़रूरत है.
ऐसे में अब धीरे-धीरे हमें लॉकडाउन-4 में थोड़ा और चीज़ों को खोलने की ज़रूरत है. ज़रूरी चीज़ो पर 50-60 से ज़्यादा दिनों की रोक नहीं लगाई जा सकती. डॉ. रेड्डी उस संस्था से जुड़े हैं, जिनसे सरकार समय-समय पर सुझाव मांगती रही है.
"क्या इसके बिना हमारा काम नहीं चल सकता?" डॉ. रेड्डी के मुताबिक़ ये सवाल हमें घर से बाहर निकलने के पहले ख़ुद से पूछना होगा. तभी हम कोरोना के साथ सतर्क हो कर जीवन जी सकेंगें.
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स्कूल, कॉलेज, मॉल और सिनेमा हॉल का क्या होगा?
हालांकि लॉकडाउन-4 में कुछ सेवाएं जो बंद रखी जा सकती हैं वो हैं, स्कूल, कॉलेज, मॉल और सिनेमाघर. तुरंत इन सुविधाओं की ज़रूरत फ़िलहाल नहीं दिखाई दे रही.
हालांकि जीविका का संकट यहां भी है. लेकिन जानकारों के मुताबिक़ ये ज़रूरत नहीं बल्कि लक्ज़री में आती है. इसलिए ये सभी सेवाएं थोड़े दिन और बंद रहना अफोर्ड भी कर सकती है.
लेकिन जहां भी छूट मिलने की गुंज़ाइश है, वहां ये बात अब जोड़ने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए कि हर जगह पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन, मास्क पहनना और हाथ धोने के जो बेसिक उपाए हैं, वो करते रहने पड़ेंगे.
सरकार इन सब कामों में आरोग्य सेतु ऐप को एक ई-पास के तौर पर इस्तेमाल करने की बात पहले ही कह चुकी है.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
बीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
बाीबीसी न्यूज़स्वास्थ्य टीम
जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.