मनमोहन सिंह एम्स से डिस्चार्ज, सीने में दर्द की शिकायत के बाद हुए थे भर्ती

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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस नेता मनमोहन सिंह को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से डिस्चार्ज कर दिया गया है.
रविवार की रात सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था.
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कांग्रेस समेत कई पार्टियों के नेताओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी.
87 वर्षीय मनमोहन सिंह की हार्ट की दो बाइपास सर्जरी हो चुकी है. 2009 में एम्स में ही उनकी बाइपास सर्जरी हुई थी, जबकि 1990 में ब्रिटेन में उन्होंने बाइपास सर्जरी कराई थी.
मनमोहन सिंह 2004 से लेकर 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे हैं.

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मनमोहन सिंह को ढूंढ़कर लाए थे नरसिम्हा राव
विनय सीतापति अपनी किताब 'हाफ़ लायन- हाऊ पीवी नरसिम्हा राव ट्रांसफ़ॉर्म्ड इंडिया' में लिखते हैं कि नरसिम्हा राव का कांग्रेस और भारत के लिए सबसे बड़ा योगदान था डॉक्टर मनमोहन सिंह की खोज.
विनय सीतापति ने बीबीसी संवाददाता रेहान फ़ज़ल से कहा बताया था, "जब नरसिम्हा राव 1991 में प्रधानमंत्री बने तो वो कई चीज़ों के विशेषज्ञ बन चुके थे. स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालय वो पहले देख चुके थे. वो भारत के विदेश मंत्री भी रह चुके थे. एक ही विभाग में उनका हाथ तंग था, वो था वित्त मंत्रालय. प्रधानमंत्री बनने से दो दिन पहले कैबिनेट सचिव नरेश चंद्रा ने उन्हें आठ पेज का एक नोट दिया था जिसमें बताया गया था कि भारत की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब है."
सीतापति आगे कहते हैं, "उनको एक चेहरा या मुखौटा चाहिए था जो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और उनके घरेलू विरोधियों को संबल बंधा सके कि भारत अब पुराने ढर्रे से नहीं चलेगा. उन्होंने उस समय के अपने सबसे बड़े सलाहकार पीसी एलेक्ज़ेंडर से पूछा कि क्या आप वित्त मंत्री के लिए ऐसे शख़्स का नाम सुझा सकते हैं जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता हो. अलेक्ज़ेंडर ने उन्हें रिज़र्व बैंक के गवर्नर रह चुके और लंदन स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स के निदेशक आईजी पटेल का नाम सुझाया."

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सीतापति के मुताबिक, "आईजी पटेल दिल्ली आना नहीं चाहते थे क्योंकि उनकी माँ बीमार थीं और वो वड़ोदरा में रह रहे थे. फिर एलेक्ज़ेंडर ने ही मनमोहन सिंह का नाम लिया. एलेक्ज़ेंडर ने शपथ ग्रहण समारोह से एक दिन पहले मनमोहन सिंह को फ़ोन किया. उस समय वो सो रहे थे क्योंकि कुछ घंटे पहले ही विदेश से लौटे थे. जब उन्हें उठाकर इस प्रस्ताव के बारे में बताया गया तो उन्होंने इस पर विश्वास नहीं किया."
"अगले दिन शपथ ग्रहण समारोह से तीन घंटे पहले मनमोहन सिंह के पास विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दफ़्तर में नरसिम्हा राव का फ़ोन आया कि मैं आपको अपना वित्त मंत्री बनाना चाहता हूँ. शपथ ग्रहण समारोह से पहले नरसिम्हा राव ने मनमोहन सिंह से कहा कि अगर हम सफल होते हैं तो हम दोनों को इसका श्रेय मिलेगा लेकिन अगर हमारे हाथ असफलता लगती है तो आपको जाना पड़ेगा."
सीतापति बताते हैं कि 1991 के बजट से दो हफ़्ते पहले जब मनमोहन सिंह बजट का मसौदा लेकर नरसिम्हा राव के पास गए तो उन्होंने उसे सिरे से ख़ारिज कर दिया. उनके मुंह से निकला, "अगर मुझे यही चाहिए था तो मैंने आपको क्यों चुना?"
अपने पहले बजट में मनमोहन सिंह ने विक्टर ह्यूगो की उस मशहूर लाइन का ज़िक्र किया था कि "दुनिया की कोई ताकत उस विचार को नहीं रोक सकती, जिसका समय आ पहुंचा है." उन्होंने अपने बजट भाषण में राजीव गांधी, इंदिरा और नेहरू का बार-बार नाम ज़रूर लिया, लेकिन उनकी आर्थिक नीतियों को पलटने में वो ज़रा भी नहीं हिचके.
मनमोहन सिंह कहा करते थे कि मंत्रिमंडल में हर कोई उनके ख़िलाफ़ हुआ करता था लेकिन उनके पास हमेशा एक शख़्स का बहुमत होता था... वो थे प्रधानमंत्री राव. जब उनको यूरो मनी ने 1994 में सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री का पुरस्कार दिया था तो उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि इसका श्रेय नरसिम्हा राव को दिया जाना चाहिए.

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