कोरोना वायरस: ‘टीवी पर राष्ट्रपति के भाषण से पता चला मैं संक्रमित हूँ’

कोरोना संक्रमण

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    • Author, जोशुआ नेवेट
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

तेज़ बुखार, उबकाइयाँ और सूखी खांसी. सीता त्यासूतामी को कोरोना संक्रमण के बताये जाने वाले ये तीन लक्षण थे.

वो इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में स्थित एक अस्पताल में भर्ती थीं लेकिन संक्रमण की अब तक पुष्टि नहीं हुई थी.

उनकी माँ मारिया भी जकार्ता के इसी अस्पताल में भर्ती थीं, वैसे ही लक्षण, मगर दोनों के कमरे अलग-अलग थे और दोनों को ही अपनी रिपोर्ट का इंतज़ार था. तभी इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने एक बड़ी घोषणा की.

देश के नाम संबोधन में राष्ट्रपति जोको विडोडो ने कहा कि दो इंडोनेशियाई नागरिक कोरोना वायरस से संक्रमित पाये गए हैं. उन्होंने कहा कि ‘ये देश में कोविड-19 के पहले दो मामले हैं. दोनों महिलाएं हैं. एक 64 वर्षीय और दूसरी महिला 31 वर्ष की हैं. जकार्ता के एक अस्पताल में दोनों का इलाज किया जा रहा है.’

राष्ट्रपति आवास के बाहर, प्रेस की भीड़ के सामने, राष्ट्रपति ने देश को यह संदेश दिया और जिसका डर था, इंडोनेशिया में भी उसकी पुष्टि हो गई.

अस्पताल में त्यासूतामी और उनकी माँ ने जब टीवी स्क्रीन पर राष्ट्रपति का संदेश देखा तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि इंडोनेशिया में भी संक्रमण पहुँच गया है.

वो हैरान थीं कि राष्ट्रपति विडोडो ने दो मरीज़ों की बात की जो उन्हीं के अस्पताल में भर्ती हैं, उन्हीं की उम्र की हैं, उन्हीं के जैसे लक्षण और एक जैसी कॉन्टैक्ट हिस्ट्री है.

राष्ट्रपति विडोडो को दोनों मरीज़ों के नाम नहीं बताने थे, इसलिए उन्होंने उनके नाम सार्वजनिक नहीं किये. लेकिन राष्ट्रपति की घोषणा से बेचैन हुईं त्यासूतामी अस्पताल की नर्स से सवाल पूछने से ख़ुद को नहीं रोक पाईं.

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‘मैं गुस्से में थी’

उन्होंने पूछा, “क्या इस अस्पताल में किसी कोरोना संक्रमित मरीज़ का इलाज चल रहा है?” इस पर नर्स ने त्यासूतामी को जो जवाब दिया, वो उन्हें पेट में किसी ज़ोरदार मुक्के जैसा लगा.

त्यासूतामी और उनकी माँ इंडोनेशिया में कोरोना वायरस संक्रमण के पहले दो ‘शिकार’ हैं, ये उन्हें स्पष्ट हो चुका था.

सीता त्यासूतामी ने बीबीसी से कहा, “मैं व्याकुल थी, गुस्से में थी और निराश भी. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करना है क्योंकि ये ख़बर मीडिया में हर जगह फैल गई थी.”

संक्रमण की पुष्टि होने से पहले, त्यासूतामी एक पेशेवर डांसर थीं, बढ़िया आर्टिस्ट थीं, एक अच्छी बहन, बेटी, दोस्त थीं. पर बाद में उनकी पहचान घटकर सिर्फ़ ‘कोरोना वायरस केस-1’ रह गई जो उनके लिए बहुत अपमानजनक था.

त्यासूतामी ने बताया कि उनके मेडिकल रिकॉर्ड लीक कर दिये गए थे जिसके आधार पर मीडिया ने काफ़ी भ्रामक रिपोर्टें दिखाईं और देखते ही देखते सोशल मीडिया बहुत सारी अफ़वाहों से भर गया.

इन सब चीज़ों ने मिलकर, कुछ ही घंटों बाद त्यासूतामी को इंडोनेशिया में कोरोना वायरस संक्रमण का चेहरा बना दिया.

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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST

त्यासूतामी

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कैसे हुई थी शुरुआत?

त्यासूतामी याद करती हैं कि ये सब गले में हल्की ख़राश से शुरु हुआ था.

उन्हें लगा कि ये सामान्य ख़राश है जिसपर उन्होंने ध्यान नहीं दिया. 17 फ़रवरी को जब वे उठीं तो कुछ और लक्षण दिखाई दिये, जो किसी साधारण बुखार से ज़्यादा लग रहे थे.

उनकी माँ मारिया जो जकार्ता इंस्टीट्यूट ऑफ़ आर्ट्स में एक डांस प्रोफ़ेसर हैं, वो भी उसी सप्ताह के अंत में बीमार पड़ गईं. लेकिन 23 फ़रवरी आते-आते उनकी परेशानी गंभीर होती चली गई.

इसके बाद दोनों ने एक स्थानीय अस्पताल में अपना चेकअप करवाया जो जकार्ता के बाहरी इलाक़े में स्थित है. डॉक्टर ने कहा कि मारिया को टायफ़स है जो बैक्टीरिया से होने वाली एक बीमारी है, जबकि त्यासूतामी में उन्हें निमोनिया के लक्षण लगे.

त्यासूतामी ने बताया, “हमने डॉक्टर से पूछा भी था कि क्या कोविड-19 का टेस्ट कराने की ज़रूरत है? क्या ये टेस्ट हो सकता है? पर उन्होंने मना कर दिया क्योंकि उनके पास उस वक़्त कोविड-19 टेस्ट करने की सुविधा नहीं थी.”

27 फ़रवरी को दोनों, माँ और बेटी को अस्पताल में ही रखा गया, यह ना जानते हुए कि जो वायरस त्यासूतामी और उनकी माँ को संक्रमित कर चुका है, वो अपने आप को और बढ़ाने के लिए लगातार फैलता है.

उसी दिन त्यासूतामी के एक दोस्त ने उन्हें फ़ोन पर याद दिलाया कि जिस डांस इवेंट में वो गई थीं, वहाँ एक जापानी महिला भी आई थीं, जिन्हें कोरोना संक्रमित पाया गया है.

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‘राष्ट्रपति ने कुछ ग़लत नहीं किया’

त्यासूतामी व्यक्तिगत तौर पर जापान की उन महिला के बारे में तो नहीं जानती थीं, पर उन्हें ख़तरे की गहराई समझ आ गई थी.

त्यासूतामी ने बताया, “जब डॉक्टर से मैंने अपनी कॉन्टैक्ट हिस्ट्री शेयर की, तो उन्हें मेरी बात समझ आयी. उन्हें मेरी माँ और मुझे जकार्ता के बड़े अस्पताल में शिफ़्ट किया, जहाँ हम दोनों का कोविड-19 टेस्ट हुआ.”

त्यासूतामी और उनकी माँ को उम्मीद थी कि जो भी रिपोर्ट होगी, वो पहले उन्हें बताई जाएगी. लेकिन राष्ट्रपति विडोडो का 2 मार्च को जनता के सामने उनकी रिपोर्ट पढ़ना, देश की जनता के लिए जितना बड़ा झटका था, उससे कहीं ज़्यादा त्यासूतामी और उनकी माँ के लिए था.

और क्या ऐसा करना क़ानूनन सही था? जनता को बताने से पहले, क्या मरीज़ को उसकी रिपोर्ट के बारे में नहीं बताया जाना चाहिए था? इस बारे में इंडोनेशियाई सरकार के प्रवक्ता एचमद यूरिआंतो ने बीबीसी से बात की.

उन्होंने कहा, “इसमें कुछ भी ग़लत नहीं था. 2009 के स्वास्थ्य संबंधी क़ानून कहते हैं कि जब मामला सार्वजनिक हित का हो, तो मरीज़ की अनुमति महत्वपूर्ण नहीं रह जाती. इसीलिए राष्ट्रपति ने जो किया, वो क़ानूनन सही था.”

जोको विडोडो

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‘भीड़ ने दोषी ठहराया’

जकार्ता में रहने वाले इंडोनेशियाई क़ानून के जानकार बेवित्री सुसांति भी सरकारी प्रवक्ता की इस दलील से सहमत हैं. पर उनका मानना है कि मरीज़ के मेडिकल रिकॉर्ड का लीक होना ग़लत था.

केस-1 (त्यासूतामी) और केस-2 (मारिया) के मेडिकल रिकॉर्ड इंडोनेशिया में वॉट्सऐप पर शेयर हो रहे थे. उनके नाम और घर का पता भी सार्वजनिक हो चुका था.

सोशल मीडिया पर लोग उनके बारे में बुरी-बुरी बातें लिख रहे थे और त्यासूतामी को इंडोनेशिया में कोरोना वायरस लेकर आने का दोषी ठहराया जा रहा था, जबकि हो सकता है कि 2 मार्च से पहले भी इंडोनेशिया में कोरोना संक्रमण का कोई मामला रहा हो.

हालांकि सरकार इस बात से इनकार कर रही है कि 2 मार्च से पहले इंडोनेशिया में कोविड-19 का कोई केस था. लेकिन हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का एक अध्ययन इस बात पर ज़ोर देता है कि चीन के क़रीबी देशों में हो सकता है कि ये वायरस काफ़ी पहले आ चुका हो, पर इसकी पहचान ना की जा सकी हो.

इस वक़्त इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया के उन देशों में से एक है, जो कोरोना वायरस महामारी से बुरी तरह प्रभावित हैं. इंडोनेशिया में अब तक 12,000 से ज़्यादा मामले सामने आये हैं जिनमें से क़रीब 900 लोगों की मौत हो चुकी है.

इंडोनेशिया में भले ही इस बात की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हो सकी है कि ये वायरस कब से फ़ैलना शुरू हुआ, पर केस-1 और केस-2 का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है.

सीता त्यासूतामी

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‘मीडिया ने सब हदें पार कीं’

त्यासूतामी ने बताया, “बीमारी से पहले इंस्टाग्राम पर मेरे 2000 से कम फ़ॉलोवर थे. कोई मुझे नफ़रत से भरे संदेश नहीं भेजता था. पर कुछ ही दिनों में फ़ॉलो करने वालों की संख्या बढ़कर 10,000 हो गई, ये लोग मेरी तस्वीरों पर भद्दे कमेंट कर रहे थे.”

3 मार्च को राष्ट्रपति विदोदो ने देश के नाम एक अन्य संबोधन में अस्पताल के कर्मचारियों और अधिकारियों से गुज़ारिश करते हुए कहा था कि ‘वे कोविड-19 से जूझ रहे मरीज़ों की गोपनीयता का ध्यान रखें.’ लेकिन जब उन्होंने ये कहा, तब तक किसी का काफ़ी नुक़सान हो चुका था.

त्यासूतामी कहती हैं कि मीडिया को भी इस बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए कि जिस तरह से मेरे मामले में रिपोर्टिंग की गई, क्या वो तरीक़ा सही था.

सीता त्यासूतामी

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वे कहती हैं, “मीडिया अपनी हदों से बहुत आगे चला गया था. कैसे मेरे घर को घेरा गया, क्या-क्या हुआ, मैंने सब अस्पताल में रहते हुए टीवी पर देखा.”

त्यासूतामी के परिवार के हर सदस्य को कोविड-19 का टेस्ट कराना पड़ा जिनमें उनकी बड़ी बहन अनिंद्याजती भी शामिल हैं. 33 वर्षीय ऑर्ट मैनेजर अनिंद्याजती विएना में रहती हैं. वो पहले से ही बीमार चल रही थीं और फ़रवरी की शुरुआत में जब वे छुट्टियां मनाने इंडोनेशिया पहुँची, तो ठीक हो गई थीं.

लेकिन कोविड-19 टेस्ट से अनिंद्याजती को भी इस बात की पुष्टि हो गई जिसका उन्हें पहले से अंदेशा था. वे इंडोनेशिया की कोविड-19 केस-3 बनीं और उन्हें भी अपने परिवार के साथ उसी अस्पताल में रहना पड़ा.

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‘एक नया जीवन’

कुछ परेशानियों को छोड़कर, तीनों के लिए रिकवरी का समय ठीक ही रहा. 13 मार्च को 14 दिन के आइसोलेशन के बाद अनिंद्याजती और सीता त्यासूतामी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी. पर उनकी माँ मारिया अभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुई हैं, इसलिए उन्हें कुछ दिन और अस्पताल में रहने की सलाह दी गई है.

मारिया कहती हैं कि इस अनुभव ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया है. उन्हें लगता है कि ‘कोविड-19 के बाद उन्हें जैसा दूसरा जीवन मिला है.’

अब जब कि इंडोनेशिया में यह महामारी फ़ैल चुकी है, हज़ारों संक्रमित लोगों के बीच यह सिर्फ़ उन तीन लोगों की कहानी है, जिनके जीवन को इस वायरस से पूरी तरह हिलाकर रखा दिया. और जब बीमारी इतने लोगों में फैल चुकी है, तब भी इससे जुड़ा कलंक अपनी जगह पर बना हुआ है.

त्यासूतामी ने बताया कि कुछ दिन पहले भी उन्हें किसी ने मैसेज भेजकर ‘शैतान’ और ‘चुड़ैल’ कहा. हालांकि उनकी बड़ी बहन अनिंद्याजती ऐसे संदेशों पर ध्यान नहीं देतीं, बल्कि वे इसमें छिपी अच्छाई को देखती हैं.

वे कहती हैं, “हमें विश्वास है कि हमारे अस्पताल पहुँचने से पहले भी यहाँ केस रहे होंगे. पर जब हम तीनों में संक्रमण की पुष्टि हुई, तो सरकार ने कम से कम इस पर कुछ एक्शन लेना शुरू किया.

(रिपोर्टिंग में बीबीसी इंडोनेशिया के रेस्टी वोरो यूनिआर ने सहयोग किया.)

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