कोरोना: मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे मोदी, लॉकडाउन पर हो सकता है फ़ैसला- प्रेस रिव्यू

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से बात करने वाले हैं. माना जा रहा है कि इस बातचीत में लॉकडाउन को लेकर कोई फ़ैसला लिया जा सकता है.
प्रधानमंत्री ने 24 मार्च को 21 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी, जो 14 अप्रैल को समाप्त हो रहा है. ऐसे में लॉकडाउन को ख़त्म करना है या फिर आगे बढ़ाना है इस पर फ़ैसला लिया जा सकता है.
इस बीच ओडिशा और पंजाब ने अपने यहां पहले ही लॉकडाउन को बढ़ाने का आदेश दे दिए हैं. इन राज्यों ने एक मई तक के लिए लॉकडाउन की अवधि को बढ़ा दिया है.
स्टेट्समैन अख़बार में छपी एक ख़बर के अनुसार इससे पहले प्रधानमंत्री ने बीते सप्ताह मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बात की थी और लॉकडाउन को लेकर उनकी सलाह मांगी थी.
ज़्यादातर राज्यों ने लॉकडाउन बढ़ाने के पक्ष में ही संकेत दिये थे लेकिन अभी तक केंद्र की ओर से इस संबंध में कोई आदेश नहीं आया है.

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कोरोना को टक्कर देती नॉर्थ-ईस्ट की 'रेड आर्मी'
नॉर्थ-ईस्ट के गांवों ने काम करने वाली रेड आर्मी में ज़्यादातर लोगों की उम्र 60 साल या उससे अधिक है.
द हिंदू अख़बार में छपी एक ख़बर के अनुसार सरकार के साथ मिल कर गांव के कुछ बुज़ुर्गों ने एक सेना तैयार की है कि जो गाँव वालों और वायरस के बीच ढाल बनकर खड़े हैं. सरकार से मिले हुए लाल रंग के कोट के कारण उन्हें रेड सेना कहा जा रहा है. सरकार की ओर से इन्हें डेढ़ हज़ार रुपए प्रति माह स्टाइपेंड भी दिया जाता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना वायरस का सबसे अधिक असर बुज़ुर्गों पर हो सकता है लेकिन गाँवों में बुज़ुर्गों की ये सेना कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए काम कर रही है.
अरुणाचल प्रदेश के सियांग ज़िले के लिलेंग गांव के एक बुज़ुर्ग तानोम मिबांग के हवाले से अख़बार लिखता है कि ये लोग मानते हैं कि गांव में छोटे-बड़े मौक़ों पर गांव वाले उनकी ओर देखते हैं ऐसे में उनकी हमारी ज़िम्मेदारी है कि वो गाँव वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करें.
ये बुज़ुर्ग समूहों में काम करते हैं. समूह के सदस्यों की संख्या गाँव के आधार पर तय की जाती है. चाहे कोई आपदा हो या महामारी ये बुज़ुर्ग बैठते हैं, चर्चा करते हैं और फिर तय करते हैं कि कैसे क्या करना है.

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उत्तर प्रदेश में 4,80,000 श्रमिकों के खाते में डाले एक-एक हज़ार रुपये
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विभिन्न श्रेणी के क़रीब चार लाख अस्सी हज़ार दैनिक श्रमिकों के भरण-पोषण के लिए प्रति व्यक्ति एक हज़ार रुपए की राशि जारी की.
जनसत्ता अख़बार के अनुसार दिल्ली में सरकार की ओर से भी निर्माण कार्य से जुड़े पंजीकृत सात हज़ार से अधिक मज़दूरों के खाते में पांच-पांच हज़ार रुपये की आर्थिक मदद जारी की गई है.

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फ़ेक न्यूज़ को रोकने और गाँवों तक पहुंचने के लिए टिकटॉक
कोरोना से जुड़ी फ़ेक ख़बरों को फैलने से रोकने और गांव-गांव तक इसके बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए कर्नाटक सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक की भी मदद ले रही है.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार संकट के इस दौर में कर्नाटक सरकार इस मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करने वाली पहली सरकार बन गई है.
टिकटॉक के भारत में 200 मिलियन एक्टिव यूज़र हैं. ऐप खुलने पर सबसे पहले मनजमेमा का एक वीडियो मोबाइल स्क्रीन पर पॉप-अप करता है जिसमें वो बड़ी बिंदी लगाए, लाल साड़ी पहने सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में बताती दिखती हैं.
टिकटॉक पर पोस्ट हुए 30 सेकंड के इस वीडियो को हजारों लोग देख चुके हैं. ये वीडियो कर्नाटक सरकार की मुहिम का हिस्सा है.
पब्लिक हेल्थ कम्यूनिकेशन एंड सोशल मीडिया टास्क फ़ोर्स का नेतृत्व करने वाली आईएएस शिखा सी के हवाले से अख़बार लिखता है कि लोगों से इस संबंध में जो सुझाव मांगे गए ते उनमें से टिकटॉक के इस्तेमाल का भी सुझाव था.
वो कहती हैं कि इस मोबाइल ऐप की पहुंच गांव तक है इसलिए इसके इस्तेमाल का फ़ैसला लिया गया.

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