कोरोना लॉकडाउन: दिल्ली के बाद केरल में मज़दूरों की उमड़ी भीड़

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केरल के कोट्टायम ज़िले के पाइप्पड में रविवार को बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के तकरीबन 1500 मज़दूर सड़क पर आ गए. उनकी मांग थी कि उन्हें उनके गृह राज्य वापस भेजा जाए.
कोट्टायम के कलेक्टर सुधीर बाबू ने बीबीसी हिंदी के सहयोगी इमरान क़ुरैशी से कहा, "वो दूसरे राज्यों में लोगों के अपने घर जाने की ख़बरें देख रहे थे तो वे ख़ुद भी वापस जाना चाहते थे. हमने उन्हें बताया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने साफ़ कर दिया है कि जो जहां पर है वो वहीं पर रहें, इसलिए परिवहन की व्यवस्था संभव नहीं है."
कलेक्टर ने ऐसे 200 घरों का दौरा किया जहां प्रवासी मज़दूर रहते हैं. उन मज़दूरों ने उन्हें बताया कि वे केरल सरकार की ओर से प्रवासी मज़दूरों को दिया जा रहा पका हुआ खाना नहीं चाहते हैं जिसके बाद उन्हें वो खाद्य सामग्री दी जाएगी जो वो ख़ुद पका सकते हैं.
कलेक्टर सुधीर बाबू ने कहा, "हमने उनसे कहा कि उन्हें सभी प्रकार की सुविधाएं दी जाएंगी लेकिन वापस जाना संभव नहीं है. हमें कुछ लोग मिले थे जो उनकी भाषा में उनसे बात कर सकते थे."

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तो क्या समस्या समाप्त हो गई है?
कलेक्टर ने बताया, "हां अभी के लिए तो हो गई है. हमने वॉलंटियर्स भेजे हैं जो देखेंगे कि उन्हें क्या समस्याएं हैं."
ज़िला प्रशासन यह भी देख रहा है कि युवा मज़दूरों को कोई भड़का तो नहीं रहा है और उनकी मज़दूरी नहीं दे रहा है.
हालांकि, एक प्रवासी मज़दूर ने एक निजी मलयाली चैनल को बताया कि उसे एक पुलिसकर्मी ने पीटा और उसे कई दिनों से खाना या पानी नहीं मिला है. उसने कहा, "मैं घर जाना चाहता हूं."
सेंटर फ़ॉर माइग्रेशन एंड इन्क्ल्युसिव डिवेलपमेंट के एग्ज़ियक्युटिव डायरेक्ट बेनॉय पीटर ने बीबीसी हिंदी से कहा, "कोट्टायम में प्रवासी मज़दूर अधिकतम दिहाड़ी मज़दूर हैं. उनके पास स्थाई रूप से काम करने की कोई जगह नहीं है और ठेकेदार उन्हें यहां लाते हैं. काम न होने की वजह से उनके पास सोशल मीडिया की अधिक पहुंच है. ऐसा लगता है कि उन्हें कहा गया है कि वो इसका अधिक प्रचार करेंगे, तो उन्हें वापस घर जाने की अनुमति मिल जाएगी."
पीटर कहते हैं, "प्रवासी मज़दूरों का गांवों की ओर वापस लौटना ग्रामीण भारत के लिए एक मुसीबत होगी क्योंकि वहां पर बहुत सी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं. तो हमने मांग की है कि पंचायत प्रवासी मज़दूरों को अनाज उपलब्ध कराए."
दुर्भाग्य से केरल की सड़कों पर प्रवासी मज़दूरों के आने की यह पहली घटना है. इस राज्य में इन्हें 'मेहमान मज़दूर' कहा जाता है.

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उद्धव का आश्वासन
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रविवार को यह भरोसा दिलाया की राज्य सरकार सभी प्रवासी मज़दूरों के लिए खाने और पानी जैसी बुनियादी ज़रूरतें मुहैया कराएगी.
उन्होंने कहा कि 'शिव भोजन' जो अब तक 10 रुपये में दिया जाता था, उसका दाम 1 अप्रैल से 5 रुपये कर दिया गया है.
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि राज्य में प्रवासी मज़दूरों को पानी और खाना देने के लिए 163 सेंटर बनाए जा चुके हैं.
उन्होंने कहा कि राज्य उन्हें खाना देगा और उनकी सुरक्षा करेगा लेकिन उन्हें इस जगह को नहीं छोड़ना चाहिए, उन्हें संक्रमण का ख़तरा नहीं बढ़ाना चाहिए.

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दिल्ली के आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्ढ पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए एफ़आईआर दर्ज की गई है.
राघव चड्ढा पर यह एफ़आईआर नोएडा में एक प्रशांत पटेल नामक वकील ने करवाई है.
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राघव चड्ढा ने ट्वीट करके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगाया था कि वे दिल्ली से अपने घरों की ओर जा रहे लोगों को पिटवा रहे हैं.
ग़ौरतलब है कि कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन के बाद दिल्ली से प्रवासी मज़दूर अपने घरों की ओर लौट रहे हैं.

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