मुंबई: 24 घंटे खुला रहने के लिए कितना तैयार है सपनों का ये शहर

मंबुई

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, निधि राय
    • पदनाम, बिज़नेस रिपोर्टर, मुंबई
  • प्रकाशित

मुंबई के लिए कहा जाता है कि ये शहर कभी नहीं सोता. अब ये बात वाकई सच भी होने वाली है.

महाराष्ट्र सरकार ने मॉल, रेस्तरां और मल्टीप्लेक्स को 24 घंटे खुलने रखने की एक योजना को मंज़ूरी दे दी है.

फिलहाल ये एक पायलट प्रोजेक्ट है लेकिन अधिकारियों का अनुमान है कि महाराष्ट्र को इस फ़ैसले से लंदन की तरह आर्थिक फ़ायदा मिल सकता है.

जिस तरह लंदन में 'नाइट इकोनॉमी' यानी रात को होने वाला कारोबार पांच बिलियन पाउंड है, उसी तरह मुंबई में भी कमाई के इस अनछुए विकल्प का फायदा लिया जा सकता है.

महाराष्ट्र के पर्यटन एवं पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा था, "मुंबई के गैर-आवासीय क्षेत्रों में दुकानें, मॉल और रेस्तरां चौबीसों घंटे खुले रह सकते हैं. इससे लोगों को काम ख़त्म करने के बाद बाहर जाने के लिए ज़्यादा जगह और समय मिल पाएगा."

उन्होंने कहा था कि सरकार के इस फ़ैसले से ज़्यादा राजस्व मिलेगा और नौकरियां भी बढ़ेंगी.

मुंबई में रहने वालीं नबिला शेख़ इस्लाम
इमेज कैप्शन, मुंबई में रहने वालीं नबिला शेख़ इस्लाम

क्या सोचते हैं मुंबई के लोग

मुंबई में रहने वालीं 16 साला की नबिला शेख़ इस्लाम कहती हैं, "मरीन ड्राइव पर घूमने और लोगों और पुलिस से बचते-बचाते गलियों में घूमने के बजाए अब हम मल्टीप्लेक्स जाकर सुबह तक फ़िल्म देख सकते हैं."

कॉलेज स्टूडेंट रिज़वी कहते हैं, "अब हम रात को कैफे में बैठ सकते हैं या मॉल में साथ खाना खा सकते हैं जो ज़्यादा सुरक्षित भी होता है क्योंकि वहां पर स्टाफ रहता है."

मीडिया में लंबे समय से काम करने वाली 32 साल की सोनिया वर्गीज़ इस फ़ैसले को एक वरदान मानती हैं.

वह कहती हैं, "रात में एक बजे के बाद बहुत कम रेस्तरां खुले रहते हैं इसलिए खाने के लिए जगह ढूंढना ही मुश्किल हो जाता है. खाने-पीने की ज़्यादातर जगह बहुत दूर हैं. ऑनलाइन खाना मंगाने में बहुत समय लगता है. इस फ़ैसले से उन लोगों को मदद मिलेगी जो रात में अच्छे खाने की तलाश करते हैं."

मीडिया में लंबे समय से काम कर रहीं सोनिया वर्गीज़
इमेज कैप्शन, मीडिया में लंबे समय से काम कर रहीं सोनिया वर्गीज़

जो सहमत नहीं हैं...

लेकिन, हर किसी को ये फ़ैसला पसंद नहीं है.

64 साल के सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी दीपक बख़्शी कहते हैं, "जो लोग रात को पार्टी करना चाहते हैं या बाहर खाना चाहते हैं वो लोग फाइव स्टार होटलों में जा सकते हैं. एक रेस्तरां खोलने में बहुत खर्च होता है. ये फैसला तर्कसंगत नहीं है. बस वोट पाने का एक तरीका है."

45 साल की रीना शाह का कहना है कि ये फ़ैसला समाज के लिए ठीक नहीं है.

वह कहती हैं, "आपको रात में सोना चाहिए ना कि पार्टी करनी चाहिए. मुझे नहीं लगता कि हमारी पुलिस और आधारभूत ढांचा इसे लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है. इसमें कई सारी चुनौतियां हैं और फिर इसकी ज़रूरत भी नहीं है. ये एक बेकार आईडिया है."

सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी दीपक बख़्शी
इमेज कैप्शन, सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी दीपक बख़्शी

कारोबारी कितने तैयार

मौजूदा आर्थिक सुस्ती के दौर में कारोबारी लंबे समय से सरकार से मदद मांग रहे थे. कई कारोबारी हालिया बजट में किए गए उपायों या अर्थव्यवस्था में सुधार लाने की सरकार की कोशिशों से भी संतुष्ट नहीं थे.

अब सरकार के फ़ैसले के बाद मॉल्स ने कहा है कि वो कुछ जगहों पर शुक्रवार, शनिवार और राष्ट्रीय अवकाशों पर सुबह तीन बजे तक फूड कोर्ट खुला रखेंगे. अगर कुछ सकारात्मक नज़र आया तब वो दूसरी जगहों पर भी ऐसा करेंगे.

इनफिटी मॉल के सीईओ मुकेश कुमार कहते हैं, "मुझे उम्मीद है कि मुंबई के लोग और पर्यटक इसका पूरे दिल से समर्थन करेंगे और देर रात खरीदारी और खाने के लिए आया करेंगे."

कुछ कारोबारियों का ये भी सवाल है कि रात भर काम करने के लिए स्टाफ पर कितना खर्चा आएगा.

द नटक्रैकर रेस्तरां की मालिक एनी बाफना कहती हैं, "वैसे तो ये एक बेहतरीन पहल लग रही है लेकिन इसे लेकर मेरे दिमाग में कुछ सवाल हैं. क्या कारोबारी एक्स्ट्रा शिफ्ट का खर्चा उठा पाएंगे और रात में क्या इतनी कमाई होगी कि इस खर्चे को पूरा कर सकें."

मुंबई

इमेज स्रोत, Getty Images

लाइसेंस के लिए संघर्ष

कुछ कारोबार ऐसे हैं जिन्हें इस फ़ैसले से नए मौके मिल रहे हैं. अब नरीमन प्वॉइंट, मरीन ड्राइव और बांद्रा कुरला कॉम्प्लेक्स में फूड ट्रकों को आवाजाही की इजाज़त दी जाएगी.

एक फूड ट्रंक कंपनी ट्रकीला चलाने वाली हवेलिया वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक चिराग हवेलिया कहते हैं, "चौबीस घंटे की फूड ट्रक पॉलिसी प्रशासन की बेहतरीन पहल है. हालांकि, हम इसे लेकर सरकारी आदेश और कुछ दिशानिर्देशों का इंतज़ार कर रहे हैं."

अब तक फूड ट्रक व्यवसायों ने उचित लाइसेंस प्राप्त करने के लिए संघर्ष किया है क्योंकि उनके लिए नियमों में कोई प्रावधान नहीं है.

चिराग हवेलिया कहते हैं, "मेरा मानना है कि ज़मीनी हकीकत और वास्तविक मुद्दों पर विचार करके इस नीति को बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों और फूड ट्रक व्यवसाय मालिकों के बीच गंभीर बातचीत होनी चाहिए ताकि ये फ़ैसला कारोबार, सरकार और समाज के लिए मजबूत और बेहतर बन सके."

द नटक्रैकर की एनी बाफना समेत कुछ कारोबारियों का कहना है कि बेहतर होता कि 24 घंटे खुला रखने की इजाज़त देने की बजाए एल्कोहल देने के घंटे बढ़ाने का लाइसेंस दिया जाता.

नए क़ानून के मुताबिक दुक़ानें रातभर खुली रह सकेंगी और खाना सर्व करेंगी लेकिन बार रात में 1:30 बजे बंद करना होगा.

मंबुई

इमेज स्रोत, Getty Images

शुरू कीं तैयारियां

सोशल और स्मोक हाउस डेली जैसे ब्रांड चालने वाले इम्प्रेसेरियो एंटरटेनमेंट एंड हॉस्पिटैलिटी ने नए नियम को देखते हुए प्रोमशन करना और ऑफर्स देना भी शुरू कर दिया है.

इम्प्रेसेरियो हैंडमेड रेस्टोरेंट्स के सीईओ और एमडी रियाज़ अमलानी कहते हैं, "24 घंटे होने से इस सेक्टर में हमारे लिए काम करने के मौके बढ़ गए हैं. हम रसोई के और फ्लोर से जुड़े कामों के लिए और स्टाफ रख रहे हैं."

रियाज़ अमलानी ने कहा, "मुंबई के 24X7 होने से रोजगार बढ़ेगा क्योंकि शिफ्ट्स बढ़ेंगी और उनके लिए लोगों की ज़रूरत होगी. ऐसे में जो रेस्टोरेंट्स चौबीसों घंटे खुलेंगे वो 10 से 15 प्रतिशत ज़्यादा लोगों को रोजगार देंगे."

मुंबई

इमेज स्रोत, Getty Images

अर्थव्यवस्था को फायदा?

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ये कहना जल्दबाज़ी होगी कि ये कदम अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होगा या नहीं. इस फ़ैसले के साथ बहुत ज़्यादा लागत जुड़ी हुई है.

केयर रेटिंग्स लिमिटेड में डीएम (इंडस्ट्री रिसर्च) दर्शिनी कंसारा कहते हैं, "ऊपर से तो ये कदम सकारात्मक लगता है. लेकिन, रेस्तरांओं के लिए निश्चित लागत जैसे श्रम, बिजली, कच्चा माल और किराया बहुत ज़्यादा हैं और 24 घंटे खुले रहने पर परिवर्तनीय लागत (अतिरिक्त सुरक्षा, शिफ़्टस, ओवर टाइम) और भी ज़्यादा होगी."

विदेशों में लंदन और न्यूयॉर्क जैसे शहर 24 घंटे खुले रहते हैं. लेकिन, ये विकसित शहर हैं और इनमें मुंबई की तुलना में बेहतर सुरक्षा और आधारभूत ढांचा है.

अब देखना होगा कि क्या ये फ़ैसला मुंबई को और बेहतर व आधुनिक शहर बनाने के अपने मकसद में कामयाब हो पाएगा या नहीं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)