दिल्ली चुनाव: निर्वाचन आयोग ने डीसीपी चिन्मय बिश्वाल को क्यों हटाया?- प्रेस रिव्यू

डीसीपी चिन्मय बिश्वाल

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चुनाव आयोग ने दक्षिण-पूर्वी ज़िले के डीसीपी चिन्मय बिस्वाल को रविवार रात तत्काल प्रभाव से हटा दिया है.

2008 बैच के आइपीएस बिस्वाल को गृह मंत्रालय में रिपोर्ट करने को कहा गया है. उनकी जगह जिले के एडिशनल डीसीपी कुमार ज्ञानेश को पदभार सौंपा गया है. आयोग की इस कार्रवाई के पीछे शाहीन बाग की घटनाओं को माना जा रहा है.

रविवार सुबह चुनाव पर्यवेक्षक रहे राजस्थान कैडर के आइपीएस भंवर लाल मीणा ने शाहीन बाग़ का दौरा किया था. माना जा रहा है कि उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही यह कार्रवाई की गई.

चुनाव आयोग ने गृह मंत्रलय और पुलिस उपायुक्त को ज़िले के नियमित डीसीपी बनाए जाने के लिए तीन उपयुक्त नामों का एक पैनल भी आयोग को भेजने का निर्देश जारी किया है. दिल्ली के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब चुनाव के दौरान किसी डीसीपी को चुनाव आयोग ने तत्काल प्रभाव से डीसीपी को पद से हटा दिया हो.

नवभारत टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि डीसीपी चिन्मय को हटाने के पीछे जामिया और शाहीन बाग़ में हुए गोलीकांड को प्रमुख वजह माना जा रहा है. अचानक हुए ट्रांसफर से दिल्ली पुलिस के भी अधिकतर अफसर सकते में आ गए हैं.

दिल्ली चुनाव आयोग के अधिकारियों की ओर से भारतीय चुनाव आयोग को रिपोर्ट सौंपी गई थी, जिसमें 8 फ़रवरी को होने वाले मतदान से कुछ दिन पहले गुरुवार को गोली चलने और फिर शनिवार को फिर से गोलीबारी होने की रिपोर्ट दी गई थी.

बताया जाता है कि शाहीन बाग़ को लेकर चुनाव आयोग की चिंता पहले से ही चल रही थी. गुरुवार को एक नाबालिग की ओर से जामिया स्टूडेंट पर गोली चलाए जाने ने चुनाव आयोग की चिंता और बढ़ा दी थी.

अख़बार के अनुसार आयोग ने दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार से पूछा भी था कि शाहीन बाग़ और इस तरह के जहां-जहां धरने-प्रदर्शन हो रहे हैं, क्या वहां आराम से चुनाव संपन्न कराए जा सकेंगे? जवाब में दिल्ली पुलिस ने आयोग को संतुष्ट करते हुए कहा था कि आप चिंता ना करें.

निर्भया मामला

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निर्भया गैंगरेप केस में हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रखा

निर्भया गैंगरेप केस में दोषियों को अलग-अलग फांसी दी जा सकती है या नहीं, इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में रविवार को सुनवाई हुई.

रविवार छुट्टी के दिन मामले की सुनवाई तो हुई लेकिन अदालत ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया.

इससे पहले पटियाला कोर्ट के एक फ़रवरी की फांसी के आदेश को अगले आदेश तक टालने के ख़िलाफ़ केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. तिहाड़ जेल अधिकारियों ने भी कोर्ट से कहा था कि मामले की जल्द सुनवाई की जाए.

अब तक मामले में चारों दोषियों - मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय कुमार सिंह और पवन गुप्ता की फाँसी को दो बार टाला जा चुका है.

रविवार को सरकारी महाधिवक्ता तुषार मेहता ने हाई कोर्ट से कहा "दोषी जानबूझकर फांसी में देरी करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन फांसी देने में देरी नहीं की जानी चाहिए."

मेहता ने कहा कि "एक बार जब सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों के भाग्य का फ़ैसला कर दिया है, तो उन्हें अलग-अलग भी फांसी की सज़ा दी जा सकती है."

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. इस ख़बर को द हिंदू ने प्रकाशित किया है.

सबरीमाला

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एसटी-एससी एक्ट के कथित फ़र्ज़ी मुक़दमों से तंग आकर पलायन को मजबूर

नवभारत टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़, फिरोजाबाद के थाना नारखी के गांव गोथुआ में एससी-एसटी एक्ट के फ़र्जी मुक़दमों से तंग आक कई लोग अपने घरों को छोड़कर चले गए हैं.

बहुत से घरों के आगे 'बिकाऊ है' लिखा हुआ है. 27 जनवरी को कुछ बच्चों के बीच हुई मारपीट के बाद अनुसूचित जाति के एक पक्ष ने गांव वालों पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने और दूसरे आरोप लगाकर केस दर्ज करवाया था.

इस मामले में 14 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

गाँव वालों ने इन आरोपों को झूठा बताया है. उनका कहना है कि इससे उनके बच्चों का भविष्य ख़राब हो रहा है.

सबरीमाला समेत मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश पर फ़ैसला

सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय संवैधानिक पीठ सबरीमाला मंदिर, मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, बोहरा मुस्लिम समुदाय में महिलाओं के खतने जैसे मामलों पर सोमवार को अपना फ़ैसला दे सकती है.

सबरीमाला मंदिर मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नौ जजों की बेंच का गठन किया था. इस बेंच की अध्यक्षता चीफ़ जस्टिस एस.ए. बोबडे करेंगे.

बेंच में शामिल अन्य जज हैं- जस्टिस आर. भानुमति, एल. नागेश्वर राव, अशोक भूषण, मोहन एम. शांतनागौडर , एस. अब्दुल नज़ीर, आर. सुभाष रेड्डी, बी.आर. गवई और सूर्य कांत.

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