महाराष्ट्र: देवेंद्र फडणवीस को कल साबित करना होगा बहुमत

अमित शाह

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पढ़ने का समय: 3 मिनट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र में सरकार गठन के मुद्दे पर अपना फ़ैसला सुनाते हुए कहा है कि देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को बुधवार को विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करना होगा.

कोर्ट ने कहा है कि प्रोटेम स्पीकर के चुनाव के बाद फ़्लोर टेस्ट की कार्यवाही शुरू की जाएगी जो गुप्त मतदान से नहीं होगा.

विधानसभा की कार्यवाही का लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा.

कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा है कि आज संविधान दिवस के मौक़े पर सुप्रीम कोर्ट ने देश की सारी जनता के सामने संविधान का महत्व स्वीकार किया है.

चव्हाण ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कहा है कि आज के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कल ये सब होने से पहले इस्तीफ़ा दे दें.

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कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर से ट्वीट करके लिखा है, "हम महाराष्ट्र विधानसभा में फ़्लोर टेस्ट कराए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हैं. ये भारतीय संविधान, लोकतंत्र और सच्चाई की जीत है"

सुप्रीम कोर्ट

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वहीं, कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट किया है, "सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर जो फ़ैसला दिया है, उसके बाद मैं आश्वस्त हूं कि माननीय अदालत ने लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों को बरकरार रखा है. ये बाबा साहेब आंबेडकर को एक सच्ची श्रद्धांजलि है."

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बीजेपी की ओर से राव साहेब दानवे ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया है कि इस फ़ैसले के बाद बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक हुई है. इस बैठक में बीजेपी के सभी विधायकों को आज शाम 9 बजे तक वानखेड़े स्टेडियम में पहुंचने को कहा गया है.

पक्ष-विपक्ष की दलीलें

सुप्रीम कोर्ट में इससे पहले सोमवार को सभी पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें दी थी.

अदालत में कांग्रेस नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने ग़ैर-बीजेपी गठबंधन की ओर से दलील देते हुए 48 एनसीपी विधायकों के समर्थन की चिट्ठी दिखाते हुए कहा था कि ऐसा कैसे हो सकता है कि उनके पास 54 विधायकों का समर्थन है और हमारे पास भी 48 विधायकों का समर्थन हो.

उन्होंने कहा था कि, ''क्या सुप्रीम कोर्ट इसकी अनदेखी कर सकता है. जब दोनों ही पक्ष बहुमत साबित करने के लिए तैयार हैं तो देर किस बात की है.''

वहीं, शिव सेना की ओर से दलील देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि सुबह 5.17 पर राष्ट्रपति शासन हटाने की क्या जल्दी थी?

सिब्बल ने कहा था कि, ''ऐसी कौन सी आपातकाल की स्थिति आ गई थी कि देवेंद्र फडणवीस को सुबह आठ बजे शपथ दिलवाई गई. जब ये बहुमत का दावा कर रहे हैं तो इसे साबित करने से क्यों बच रहे हैं.''

वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से दलील देते हुए मुकुल रोहतगी ने कहा था कि एनसीपी के 54 विधायक अजित पवार और फडणवीस के साथ हैं.

देवेंद्र फडणवीस

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महाराष्ट्र में अब तक क्या हुआ?

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद से लेकर अब तक सरकार बनाने को लेकर सभी पक्षों में आपसी कलह चल रही है.

सबसे पहले एक साथ चुनाव लड़ने वाली बीजेपी और शिव सेना के बीच चुनाव के नतीजे जारी होने के कुछ दिन बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद पैदा हो गया.

इसके बाद देवेंद्र फडणवीस ने सार्वजनिक रूप से कहा कि आने वाले पांच सालों में भी बीजेपी का ही सीएम रहेगा.

इस बयान के बाद शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस ने एक साथ मिलकर सरकार बनाने की जुगत शुरू की.

इस बीच महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया.

और कई दिनों तक इन तीन दलों की कोशिशें जारी रहने के बाद बीती 23 तारीख़ को सुबह लगभग साढ़े पांच बजे महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोशियारी ने अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी.

इसके बाद ही शिव सेना समेत तमाम दूसरे दलों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.

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