क़ुरान जलाने को लेकर पाक ने नॉर्वे को किया आगाह: पाँच बड़ी ख़बरें

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पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि उन्होंने नॉर्वे के राजदूत को समन भेजकर क़ुरान जलाए जाने को लेकर विरोध जताया है.
नॉर्वे के कृस्चनस्टैड शहर में इस्लाम विरोधी रैली में क़ुरान को अपवित्र करने का मामला सामने आया था. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने अपने बयान में कहा है, ''पाकिस्तान इसकी कड़ी भर्त्सना करता है. ऐसी चीज़ें बार-बार दोहराई जा रही हैं. ऐसी हरकतों से दुनिया भर में बसे 1.3 अरब मुसलमानों की भावना आहत हुई है और इनमें पाकिस्तानी भी शामिल हैं. ऐसी हरकतों को अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.''
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले हफ़्ते नॉर्वे में जिस व्यक्ति ने ऐसा किया है उसके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए. पाकिस्तान में इसे लेकर कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे. सोशल मीडिया पर वो वीडियो वायरल हो गया था जिसमें दिख रहा है कि एक व्यक्ति क़ुरान को जलाने की कोशिश कर रहा है.
इस वीडियो में एक मुसलमान युवक कूदकर उसे धक्का देता दिख रहा है और वो उसे ऐसा करने से रोकने की कोशिश कर रहा है. उस युवक की चौतरफ़ा प्रशंसा हो रही है.
पाकिस्तान में उस मुस्लिम युवक को किसी हीरो की तरह देखा जा रहा है. पाकिस्तान ने नॉर्वे से कहा है कि वो भविष्य में ऐसी घटनाओं के साथ सख़्ती से निपटे. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा है कि नॉर्वे में पाकिस्तान के राजदूत से कहा गया है कि वो अपना विरोध नॉर्वे की सरकार के सामने दर्ज कराएं.
नॉर्वे में 16 नवंबर को 'नॉर्वे का इस्लामीकरण रोको' नाम की एक रैली हुई थी. इसी रैली में हाथापाई हो गई और इसी दौरान एक व्यक्ति ने क़ुरान जलाने की कोशिश की थी. बाद में यह रैली हिंसक हो गई.
वीडियो में क़ुरान जलाने की कोशिश जो व्यक्ति कर रहा है वो स्टॉप इस्लामाइजेशन ऑफ नॉर्व का ही नेता है. उनका नाम है लार्स थॉर्सन. इस रैली के बाद नॉर्वे के मुस्लिम नेताओं ने 'स्टॉप इस्लामाइजेशन ऑफ नॉर्व' को लेकर पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी. नॉर्वे टुडे के अनुसार इस धड़े ने पहले ही क़ुरान जलाने की घोषणा कर दी थी. हालांकि पुलिस ने इसे लेकर चेताया था.
नॉर्वे टुडे से मुस्लिम यूनियन यूथ के नेता उमर सादिक़ ने कहा, ''लार्स को जो करना था उसे कर दिखाया. उसने पुलिस को धोखा दिया है. लार्स ने ऐसा कर तनाव पैदा किया है.'' उधर पाकिस्तान आर्मी के प्रवक्ता आसिफ़ ग़फ़ूर ने उस वीडियो को ट्वीट कर मुस्लिम युवक की तारीफ़ की है जिसने क़ुरान को जलने से बचाने की कोशिश की.
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उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है, ''बेहद निंदनीय हरकत को बहादुरी से रोकने के लिए इलियास को सलाम. इस तरह के इस्लामफ़ोबिया ग्रस्त उकसावे से नफ़रत और अतिवाद को ही बढ़ावा मिलेगा. सभी धर्मों का आदर होना चाहिए. इस्लामफोबिया वैश्विक शांति और सद्भावना के लिए ख़तरा है.''

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महाराष्ट्र पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
आज सबकी नज़रें फिर महाराष्ट्र की सियासत पर होंगी. भारतीय सुप्रीम कोर्ट आज कांग्रेस, एनसीपी और शिव सेना की उस याचिका पर फ़ैसला सुना सकता है जिसमें देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री और अजित पवार के उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने को चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट में सुबह 10.30 बजे से इस याचिका पर फिर सुनवाई होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को दो चिट्ठियां पेश करने को कहा है. पहली चिट्ठी, अजित पवार की ओर से एनसीपी का समर्थन बीजेपी को देने का वादा और दूसरी देवेंद्र फडणवीस की ओर से सरकार बनाने के दावे से जुड़ी है. अदालत ने इसके लिए 10.30 बजे तक का समय तय किया है.
ये दोनों चिट्ठियां इस मामले में बेहद अहम हैं क्योंकि इसके बाद ही शीर्ष अदालत शिव सेना-एनसीपी-कांग्रेस की ओर से 24 घंटे के भीतर फ़्लोर टेस्ट कराने की साझा अर्ज़ी पर फ़ैसला लेगी.
उधर सोमवार देर रात देवेंद्र फडणवीस और एनसीपी नेता अजित पवार के बीच मुलाक़ात हुई.
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री दफ़्तर की ओर से दावा किया गया है कि इस मुलाक़ात में बारिश से प्रभावित किसानों के मुद्दे पर बात हुई.
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AAP का विज्ञापन ख़र्च कांग्रेस से चार गुना

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दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने अपने कार्यकाल के शुरुआती चार सालों में विज्ञापनों पर सालाना 78 करोड़ रुपए ख़र्च किए.
यह आँकड़ा पूर्ववर्ती शीला दीक्षित सरकार के विज्ञापन ख़र्च से कहीं अधिक है. शीला दीक्षित सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल में क़रीब 19 करोड़ रुपए सालाना ख़र्च किए थे. एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी मिली है.
समाचार एजेंसी आईएएनएस की ओर से दाख़िल की गई आरटीआई के जवाब में पता चला है कि कि 2008 से 2012 तक शीला दीक्षित की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने 75.9 करोड़ रुपए, यानी 18.97 करोड़ रुपये सालाना विज्ञापान पर ख़र्च किए थे. 2015 से 2019 के बीच केजरीवाल सरकार 311.78 करोड़ इस मद में ख़र्च कर चुकी है.

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वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या में इज़ाफ़ा
शहरी श्रमिकों में नियमित दिहाड़ी कामगारों और वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या बढ़ गई है.
अप्रैल-जून 2018 से लेकर जनवरी-मार्च 2019 तक शहरी वर्कफ़ोर्स में इनकी हिस्सेदारी 48.3 फ़ीसदी से बढ़कर 50 फ़ीसदी हो गई है.
राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्था (एनएसओ) की ओर से किए गए ताज़ा पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफ़एस) में यह बात सामने आई है.
यह भी पता चला है कि महिलाओं की स्थिति पुरुषों के मुक़ाबले बेहतर हुई है. संगठित क्षेत्र में वेतन पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों की संख्या में 2.1 फीसदी बढ़ोतरी हुई है जबकि पुरुष कर्मचारियों की संख्या में 1.5 फीसदी.

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हॉन्ग कॉन्ग में चीन समर्थक राजनीति को झटका
हॉन्ग कॉन्ग में स्थानीय चुनाव के बाद वोटों की गिनती जारी है और शुरुआती रुझान आने लगे हैं. रुझानों में लोकतंत्र समर्थक उम्मीदवारों को चीन समर्थक प्रतिद्वंद्वियों के मुक़ाबले शानदार जीत मिलती दिख रही हैं. लोकतंत्र समर्थक उम्मीदवार अब तक तीन चौथाई से ज़्यादा सीटें जीत चुके हैं.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट अख़बार के मुताबिक, 241 सीटों पर नतीजे आए हैं जिनमें से 201 लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों से जुड़े नेताओं को मिली हैं.
ज़िला स्तर के इन चुनावों में इस बार 29 लाख से ज़्यादा लोगों ने वोट किया. कुल मतदान 71 फीसदी रहा जो 2015 में सिर्फ़ 47 फीसदी था.
बीबीसी संवाददाता कहना है कि ये हॉन्गकॉन्ग के लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं की उम्मीद और कल्पना से भी बेहतरीन है.
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