पहलू ख़ान के ख़िलाफ़ एफ़आईआर हाई कोर्ट ने की रद्द

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- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
- प्रकाशित
राजस्थान के अलवर में लगभग दो साल पहले कथित रूप से भीड़ के हाथों मारे गए पहलू ख़ान के ख़िलाफ़ गो-तस्करी के मामले में दर्ज पुलिस प्राथमिकी को राजस्थान हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है.
पहलू ख़ान के ख़िलाफ़ गो-तस्करी का आरोप इंसाफ़ के तराजू में नहीं ठहर पाया लेकिन अब वो भी इस दुनिया में नहीं हैं.
पहलू ख़ान के परिजनों ने अदालत के इस फ़ैसले पर राहत की सांस ली है. पहलू ख़ान के बेटे इरशाद कहते हैं कि अदालत के इस फ़ैसले से अब उन्हें न्याय की उम्मीद बंधी है.
अलवर पुलिस ने इस साल 24 मई को पहलू ख़ान के दो बेटों इरशाद, आरिफ़ और उनके ड्राइवर ख़ान मोहम्मद के ख़िलाफ़ स्थानीय अदालत में गो-तस्करी के मामले में आरोप पत्र दाख़िल किया था.
इस चार्जशीट में पहलू ख़ान का भी ज़िक्र किया गया था लेकिन उनकी मौत हो जाने की वजह से पुलिस ने पहलू ख़ान के खिलाफ़ कार्रवाई रोक दी थी.
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पहलू ख़ान के बेटों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी
पहलू ख़ान के परिजनों ने पुलिस में दर्ज मामले को झूठा बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. उनके वकील कपिल गुप्ता ने बीबीसी को बताया कि हाईकोर्ट ने पुलिस में दर्ज एफ़आईआर को निरस्त कर दिया है.
गुप्ता के मुताबिक़ पूरा मामला इसी प्राथमिकी पर आधारित था. अब पहलू ख़ान, उनके दो बेटों और ड्राइवर के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं होगी.
पहलू ख़ान के परिजनों का कहना था कि वे पशु खरीद कर ला रहे थे और उन्होंने इसके काग़जात भी पुलिस को दिखाए थे लेकिन पुलिस ने इसे तवज्जो नहीं दी.
परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उलटे राजस्थान गोजातीय पशु अधिनियम के तहत पहलू ख़ान और उनके बेटों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर अदालत में चार्जशीट दाख़िल कर दी थी.
उस समय राज्य में बीजेपी का शासन था. पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार में गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने बीबीसी से कहा कि वो अदालत के फ़ैसले पर कोई टिप्प्पणी नहीं करेंगे.
कटारिया ने ये भी कहा कि पुलिस ने उस वक़्त उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखकर ही कार्रवाई की थी.
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पहलू ख़ान मामले में क्या हुआ था?
यह घटना एक अप्रैल 2017 को उस वक़्त हुई थी जब पहलू ख़ान और उनके बेटे कुछ लोगों के साथ गाय खरीदकर अलवर होते हुए हरियाणा जा रहे थे. तभी अलवर जिले में भीड़ ने घेरकर रोक लिया और उनपर हमला बोल दिया.
इस पूरी मारपीट का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इस हमले में पहलू ख़ान गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इसके बाद चार अप्रैल 2017 को पहलू ख़ान की अस्पताल में मौत हो गई थी.
पुलिस ने तब पहलू ख़ान के बयान पर छह नामजद लोगों सहित 100 से अधिक लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था.
पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को गिरफ़्तार कर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था. लेकिन इस मामले में सभी अभियुक्त बरी हो गए थे.
अदालत के इस फ़ैसले के खिलाफ पहलू ख़ान के परिजनों ने अपील दायर की थी.
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'अब इंसाफ़ की उम्मीद जगी'
पहलू ख़ान के बेटे इरशाद कहते हैं कि अदालत के इस निर्णय से उन्हें अब इंसाफ़ की उम्मीद जगी है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "कुछ घटनाओं से हमें झटका लगा था और हम निराश हो गए थे. अब लगता है देर है मगर इंसाफ़ दूर नहीं है."
पहलू ख़ान की मौत के मामले में सभी अभियुक्तों के छूट जाने पर राज्य सरकार ने एसआईटी (विशेष जांच दल) गठित कर पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे.
एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जांच में किस स्तर पर लापरवाही बरती गई और इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है.
बहरहाल दो साल तक चली जांच-पड़ताल के बाद भी यह कोई नहीं बता पा रहा है कि पहलू ख़ान को किसने मारा.
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